श्रम कोड : देश भर में विरोध के बीच बिल पारित

मज़दूरों से गद्दारी, मालिकों से वफ़ादारी, वाह रे मोदी सरकार की तरफदारी!

मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी तीन बिल लाने आदि के खिलाफ 23 सितम्बर को देशभर में जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हुए और लेबर कोड की प्रतियाँ जलाई गईं। इन सबको दरकिनार करके मोदी सरकार ने मज़दूर विरोधी लेबर कोड भी पारित कर पूँजीपतियों की सेवा में श्रेष्ठता बरकरार रखी।

ज्ञात हो कि केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर मोदी सरकार द्वारा मालिकों के हित में तीन बिल लाने, सरकारी कंपनियों के निजीकरण, कई प्रमुख क्षेत्रों को 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए खोलने और मज़दूर वर्ग पर बढ़ते हमलों के खिलाफ 23 सितम्बर को अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन हुआ।

विरोधों को कुचलकर पारित हुए बिल

एक तरफ देश भर में मज़दूर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, दूसरी ओर उसी दिन मोदी सरकार ने राज्य सभा से भी मज़दूर विरोधी खतरनाक तीन लेबर कोड को पारित करा लिया है। गौरतलब है कि लोकसभा में मंगलवार को ही ये पारित किये गये थे।

बुधवार को राज्यसभा में विपक्षी दलों ने कार्यवाही का बहिष्कार किया था। लेकिन कोरोना/लॉकडाउन के दरमियान अध्यादेश से इन्हें पारित कराने को आतुर रही मोदी सरकार ने अंततः सभी विरोधों को ठेंगा दिखाते हुए उन्हें पारित कर लिया। अब इन अध्यादेशों पर राष्ट्रपति के मुहर की खानापूर्ति बची है।

इसके पहले श्रम कानून में बदलाव का एक बिल वेतन संहिता अध्यादेश कानूनी रूप भी ले चुका है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार जनविरोधी कृषक बिल के बाद लेबर कोड भी पारित कर देशी-विदेशी पूँजीपतियों का वह कर्ज पूरी वफ़ादारी से अदा कर रही है, जिसके तहत भारी रूपए पानी की तरह बहाकर मोदी की उन्होंने लगातार ताजपोशी कराई है।

  • इसे भी पढ़ें

मजदूर अधिकारों पर खुली डकैती

मजदूरों नेताओं ने कहा कि तमाम विरोधों के बावजूद मोदी सरकार द्वारा मज़दूर वर्ग पर हमले तेज होते जा रहे हैं। मज़दूर विरोधी श्रम संहिताएँ लाने से लेकर अधिकारों में तरह-तरह से डकैतियों के साथ निजीकरण की गति भी तेज हो गई है। मोदी सरकार सारे विरोधों को दर किनार कर मज़दूर विरोधी तीन श्रम संहिताएँ पेश कर दी हैं, जबकि वेतन संहिता कानूनी रूप भी ले चुका है।

से भी पढ़ें

वक्ताओं ने कहा कि कोविड-19 के बहाने मज़दूर वर्ग पर बढ़ते हमलों में राज्य सरकारें भी और ज्यादा आक्रामक हैं। काम के घंटे बढ़ाने, फ़िक्सड टर्म रोजगार को कानूनी मान्यता देने, श्रम कानूनों को स्थगित करने के साथ मज़दूरों के बोनस पर भी बंदिश लगा दी है।

  • से भी देखें

केंद्र सरकार जनता के खून पसीने से खड़ी सार्वजनिक संपत्तियों को तेजी से अड़ानियों-अम्बानियों के हाथों बेंच रही है। किसान विरोधी बिल ला चुकी है, शिक्षा लॉक डाउन है और शिक्षा का बाजारीकरण व भगवाकरण कर रही है। महँगाई, बेरोजगारी चरम पर है।

10 केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का आह्वान, मासा ने दिया था समर्थन

केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों के अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाने के इस आह्वान का मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) सहित देश की ज्यादातर यूनियनों व मज़दूर संगठनों ने समर्थन किया। सरकार के बहरे कानों में धमाके के लिए पूरे देश में मज़दूरों ने अपनी आवाज़ बुलंद की। हालाँकि संघ से जुडी बीएमएस किसी भी विरोध से दूर रही।

प्रमुख माँगें-

इस दौरान मजदूर विरोधी श्रम संहिताओं को रद्द करने, निजीकरण पर लगाम लगाने, किसान विरोधी बिल को वापस लेने, जन विरोधी नई शिक्षा नीति रद्द करने और मज़दूरों के अधिकारों को बहाल करने आदि की माँग हुई।

से भी देखें

इसके साथ ही श्रमिकों को लॉकडाउन के समय का वेतन देने, किसी भी मजदूर की छंटनी न करने, सभी जरूरतमंद लोगों को राशन देने, महामारी के दौरान काम से निकाल दिए गए श्रमिकों के खातों में 10-10 हज़ार रुपये डालने, जीडीपी का प्रतिशत जनस्वास्थ्य के लिए संरक्षित करने, महामारी के दौरान काम कर रहे हर श्रमिक का 50 लाख का बीमा करने, पीफ व बोनस में किसी प्रकार की कटौती ना करने, कोरोना महामारी का बोझ मजदूरों और मेहनतकशों की पीठ पर डालने पर लगाम लगाने और असंगठित क्षेत्र के सभी कामगारों और स्वरोजगार करने वालों को कम से कम छह महीने तक 7,500 रुपये की नकद सहायता राशि देने आदि की भी माँग हुई।

  • से भी पढ़ें

देशव्यापी प्रदर्शन की कुछ झलकियाँ-

दिल्ली :

दिल्ली के जंतर मंतर पर केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों सहित अन्य यूनियनों-संगठनों ने भागेदारी की। प्रदर्शन के दौरान विरोध स्वरूप तीनों श्रम कोड विधेयकों की प्रतियाँ फाड़ी गईं और विरोध सभा का आयोजन भी हुआ।

इस विरोध प्रदर्शन में एटक, सीटू, ऐक्टू, इंटक, एच.एम.एस, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी, सेवा, एलपीएफ तथा मासा के घटक टीयूसीआई, आईएफटीयू (सर्वहारा) व अन्य संगठन शामिल थे।

उत्तराखंड

रुद्रपुर। रुद्रपुर के अंबेडकर पार्क में श्रमिक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में विभिन्न संगठनों-यूनियनों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया और मज़दूर विरोधी लेबर कोड की प्रतियाँ जलाकर विरोध जताया।

कार्यक्रम में श्रमिक संयुक्त मोर्चा, मासा के घटक संगठन मज़दूर सहयोग केंद्र व इंकलाबी मज़दूर केंद्र, एक्टू, इंटक, सीटू, सीपीआई, के साथ इंट्रार्क, डेल्टा, एलजीबी, महिंद्रा, नेस्ले, सनसेरा, भगवती माइक्रोमैक्स, वोल्टास, पारले, पंतनगर विश्वविद्यालय के श्रमिक नेता, थाई सुमित नील ऑटो आदि यूनियने शामिल रहीं।

हरियाणा

गुडगाँव। गुडगाँव में केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के साथ मासा के घटक इन्क़लाबी मज़दूर केंद्र व मज़दूर सहयोग केंद्र ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें इलाके की कई यूनियनें शामिल हुईं।

इसके साथ ही गुड़गांव में बेलसोनिका एम्प्लाइज यूनियन ने जुलूस निकालकर विरोध जताया।

कैथल। आंगनवाड़ी वर्कर एंड हेल्पर यूनियन के बैनर तले राज्य मंत्री कमलेश ढांडा के आवास पर लगातार 21 वें भी धरना जारी रहा। धरने को समर्थन देने के लिए जन संघर्ष मंच हरियाणा के राज्य प्रधान कामरेड फूल सिंह, मनरेगा मजदूर यूनियन के राज्य प्रधान कामरेड पाल सिंह, तथा मज़दूर सहयोग केंद्र गुड़गांव के प्रधान कामरेड रामनिवास धरना स्थल पर पहुंचे।

धरना स्थल पर ही सामूहिक रूप से मज़दूर-कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन में  रिमोट लर्निंग के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने के बारे जारी आदेशों, मज़दूर विरोधी नए लेबर कोड तथा किसान विरोधी अध्यादेशों की प्रतियों का दहन किया गया और सरकार से इन्हें तुरंत रद्द करने की माँग की गई।

कुरुक्षेत्र। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा घोषित राष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जन संघर्ष मंच हरियाणा (घटक मासा) की ओर से कुरुक्षेत्र नए बस स्टैंड पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शन का नेतृत्व मंच की प्रांतीय महासचिव सुदेश कुमारी, निर्माण कार्य मज़दूर मिस्त्री यूनियन के प्रांतीय प्रधान करनैल सिंह ने किया।

राजस्थान

भादरा (हनुमानगढ़)। कोरोना संकट की आड़ में केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा मज़दूर व किसानों के हकों पर हो रहे हमलों का मनरेगा मज़दूर यूनियन की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया व एसडीएम भादरा को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

बिहार

मासा के घटक ग्रामीण मजदूर यूनियन, बिहार ने रोहतास जिले के करगहर, सासाराम और काराकाट प्रखंड के बड़की खरारी, महुली, मोहनपुर खरसान, लहुआरा के साथ साथ जिला मुख्यालय सासाराम में कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया के नेता कॉ.भोला शंकर, ग्रामीण मजदूर यूनियन बिहार, सासाराम प्रखंड के नेता कॉ.कपिल देव प्रसाद, प्रखंड संयोजक करगहर के कॉ. दिनेश कुमार, व कॉ. अमित कुमार के नेतृत्व में सभा और प्रदर्शन किया।

सभा के माध्यम से ग्रामीण मजदूर यूनियन, बिहार ने केंद्र सरकार के समक्ष ग्यारह सूत्री माँग रखा।

पश्चिम बंगाल

हरिपुरा। पश्चिम बर्धमान जिले के हरिपुरा में मासा के घटक आईएफटीयू (सर्वहारा) ने विरोध प्रदर्शन किया।

पंजाब

लुधियाना। कारखाना मज़दूर यूनियन और टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन ने केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी संशोधनों के खिलाफ़ आवाज़ उठाई और विज्ञप्ति जरी कर विरोध दर्ज कराया।

टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन के अध्यक्ष राजविंदर सिंह द्वारा जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में 25 सितंबर को कृषि कानूनों के खिलाफ़ पंजाब बंद के आह्वान के तहत लुधियाना में विभिन्न जनसंगठनों द्वारा हो रहे रोष प्रदर्शन में केंद्र सरकार के इस घोर मज़दूर विरोधी कदम के खिलाफ़ भी ज़ोरदार आवाज़ बुलंद की जाएगी।

उत्तरप्रदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच की ओर से विरोध स्वरुप रैली निकली गई और ज्ञापन दिया गया।

वर्कर्स फ्रंट ने उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में कार्यक्रम कर अपना विरोध दर्ज कराया। सोनभद्र, आगरा, लखनऊ, मऊ, बस्ती, गोंडा, इलाहाबाद, सीतापुर, चित्रकूट, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी आदि जनपदों में हुए इन प्रतिवाद कार्यक्रमों में सरकार से निजीकरण को बंद करने, नई श्रम संहिताएँ वापस लेने, विद्युत संशोधन विधेयक 2020 को रद्द करने, नई पेंशन स्कीम को खत्म करने, ठेका मजदूरों, आंगनबाड़ी, आशा, पंचायत मित्र, शिक्षामित्र आदि स्कीम वर्कर्स को स्थाई करने व सम्मानजनक वेतन देने, मनरेगा में सालभर काम की गारंटी, शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी कानून और बुनकरों को विशेष पैकेज देने की मांगे उठाई गई।

महाराष्ट्र-

ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ़ इंडिया (टीयूसीआई) घटक मासा के बैनर तले मुंबई में प्रदर्शन-

टीयूसीआई (घटक मासा) के बैनर तले ठाणे में प्रदर्शन-

दादर नगर हवेली-

टीयूसीआई (घटक मासा) के बैनर तले सिलवासा में प्रदर्शन-

केरल-

टीयूसीआई (घटक मासा) के बैनर तले प्रदर्शन-

से भी पढ़ें

%d bloggers like this: