लुधियाना : कारखाना मालिकों की बढ़ती गुंडागर्दी

दूसरे राज्यों से काम पर वापस लौट रहे मज़दूरों की दुर्दशा की एक बानगी

लॉकडाउन से जहाँ सभी मेहनतकशों पर मार पड़ी है, वहीं इसके घातक प्रभाव कामबंदी, बेरोज़गारी आदि के रूप में सामने आ रहे हैं और आने वाले दिनों में और भी स्पष्ट रूप में सामने आएँगे। लेकिन मौजूदा वक़्त में सबसे अधिक प्रभावित औद्योगिक मज़दूर हुए हैं।

लॉकडाउन लगने के समय उद्योगपतियों और सरकार की बेरुखी के कारण भूखमरी और बेरोज़गारी के चलते बड़ी संख्या में औद्योगिक मज़दूर लुधियाना छोड़कर अपने पुश्तैनी गाँवों को चले गए। अब कुछ हद तक काम चालू होने के बाद मज़दूरों का वापिस लौटना जारी है। रेलों का प्रबंध नाममात्र का होने के कारण अधिकतर मज़दूर 1500 से 3000 रुपए खर्च करके बसों के ज़रिए लौट रहे हैं।

अब ख़बरें आ रही हैं कि दूसरे शहरों में काम ना मिलने के कारण बंबई, गुजरात आदि शहरों में काम करने वाले उत्तर प्रदेश, बिहार के मज़दूर भी लुधियाना आ रहे हैं। पर शहरों में काम पूरी रफ़्तार से नहीं चल रहा जिसके कारण मज़दूरों को काम मिलने में मुश्किल आ रही है। बाज़ार ग्राहकों के बिना सूने पड़े हैं, कारखाना मालिकों को तैयार माल बिकने की उम्मीद कम है।

मालिकों की बढ़ती मनमानी

ऐसी स्थिति में बहुत-से मालिक मनमानियाँ कर रहे हैं। पहले पीस रेट/वेतन बढ़ाने के वायदे करके बसें भेजकर मज़दूरों को गाँवों से बुलाया गया, अब कई मालिक पीस रेट/वेतन घटा रहे हैं और बस किराए से भी अधिक पैसे वसूल रहे हैं।

बालाजी होजरी में मनमानी

लगभग महीना पहले बालाजी हौज़री, गुरु विहार, राहों रोड के मालिकों ने मज़दूरों का पीस रेट लगभग आधा घटा दिया और तय समय पर पैसे भी नहीं दिए। इस कारण दर्जियों ने काम बंद करके छुट्टी कर ली, पता लगने पर काम बंद करने के लिए कहने वाले मज़दूरों को अपने दफ्तर बुलाकर बुरी तरह पीटा गया, बाहर कहीं शिकायत करने पर वहाँ काम करने वाली एक मज़दूर औरत के साथ छेड़-छाड़ का झूठा केस दर्ज कराने की धमकी दी गई। इस मसले पर कुछ दलालों द्वारा मध्यस्थ बनकर मामला रफा-दफा करा दिया गया पर घटाए गए पीस रेट बढ़ाए नहीं गए।

वेतन में कटौती

बिहार के दस मज़दूरों के साथ भी ऐसा ही हुआ, जो बाढ़ की मार झेलते हुए, बिहार सरकार की ओर से कोई मदद ना मिलने के कारण कुछ कमाने की उम्मीद में दो-दो हज़ार रुपया बस का किराया खर्च करके लुधियाना आए। जब पहले वाली जगह पर जाकर हौज़री मालिक से काम की बात की तो उसने 12 की बजाए 10 हज़ार वेतन देने की बात कही। जब मज़दूरों ने इस पर आपत्ति जताई तो मालिकों ने कह दिया कि कौन-सा मैंने तुम्हें बुलाया है।

बुलाया, काम कराया और वेतन कम दिया

ऐसा ही एक और वाकया मनजीत टेक्सटाइल, टिब्बा रोड में काम करने वाले मज़दूर ने बताया। उसके गाँव के कई मज़दूर, जो एक हौज़री कारखाने में काम करते थे, मालिक द्वारा बस भेजने पर लुधियाना आ गए। ठेकेदार ने 14000 वेतन देने की बात कही थी। उन्होंने कुछ दिन काम किया जब मालिक को पैसे देने के लिए कहा तो 12000 के हिसाब से पैसे दे दिए गए, वेतन घटाने का मज़दूरों ने विरोध किया।

एक मज़दूर ने काम छोड़ दिया और मनजीत टेक्सटाइल में काम करने लगा। दूसरे दिन ठेकेदार उसके कमरे पर आकर बस के किराए के 4000 रुपए माँगने लगा, किए गए काम के पैसे देने से मालिक मुकर गया। हिसाब करने और बस किराए के अधिक पैसे माँगने की बात करने पर ठेकेदार उसका फ़ोन छीनकर ले गया।

बढ़ती बेरोजगारी के साथ तेज होती गुंडागर्दी

ऐसे अनेकों वाकया मज़दूरों से रोज़ाना सुनने को मिलते हैं। मौजूदा स्थितियों को देखकर लगता है कि जैसे-जैसे मज़दूर वापिस आ रहे हैं, मज़दूरों के साथ मालिकों की गुंडागर्दी और बढ़ेगी, क्योंकि काम पहले ही धीमी रफ़्तार से चल रहा है। बेरोज़गारों की फ़ौज़ जैसे-जैसे बढ़ रही है, मालिकों की मनमानी भी बढ़ रही है।

केंद्र व पंजाब सरकारें पहले ही श्रम क़ानूनों को मालिकों के पक्ष में बदलकर श्रम की लूट तेज़ करने का रास्ता साफ कर रही हैं। श्रम विभाग मूक दर्शक बना बैठा है। मज़दूरों के साथ हो रही ज़्यादतियों से संबंधी शिकायत करने पर मालिकों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। लाज़िमी है कि आने वाले दिनों में सरकार व मालिकों को मज़दूरों के गुस्से की गर्मी को झेलना पड़ेगा।

– राजविन्‍दर

#मुक्ति_मार्ग से साभार

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