गुजरात अम्बुजा के श्रमिकों ने लगाया मिलीभगत का आरोप

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आयुक्त व श्रम सचिव को भेजा ज्ञापन, 31 अगस्त को श्रमभवन रुद्रपुर पहुँचाने का आह्वान

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। गुजरात अम्बुजा, सितारगंज के मज़दूरों ने श्रम प्रवर्तन अधिकारी पर प्रबंधन से सांठगांठ कर गैरकानूनी समझौता पत्र पर श्रमिकों से जबरिया हस्ताक्षर करवाने का गंभीर मामला उठाया है और उनपर कानूनी कार्रवाई करने एवं कथित समझौते को निरस्त कराने की माँग के साथ कुमाऊँ क्षेत्र के आयुक्त व उत्तराखंड के श्रम सचिव को ज्ञापन भेजा है।

पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि साजिश के तहत हुए गैरकानूनी समझौता श्रमिकों को मंजूर नहीं है क्योंकि वास्तव में एएलसी व अपर जिलाधिकारी द्वारा कथित समझौते को कभी भी संपन्न नहीं कराया गया।

बताया कि कई बार शिकायत के बाद सुनवाई ना होने से 31 अगस्त को पीड़ित श्रमिक सहायक श्रम आयुक्त के समक्ष उक्त गैरकानूनी समझौते को निरस्त कराने की माँग को लेकर उपस्थित होंगे।

गुजरात अम्बुजा मज़दूरों ने श्रम भवन, रुद्रपुर पहुँचाने के लिए क्षेत्र के मज़दूरों का भी अहवान किया है।

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भेजे गए ज्ञापन की मुख्य बातें-

गुजरात अंबुजा एक्सपोर्ट लिमिटेड, सिडकुल, सितारगंज, जिला उधम सिंह नगर में कार्यरत स्थाई श्रमिकों द्वारा 24 अगस्त को सहायक श्रमायुक्त, उधम सिंह के माध्यम से भेजे गए ज्ञापन में तत्काल हस्तक्षेप करने के अनुरोध के साथ लिखा है कि-

दिनांक 21/08/2020 व 22/08/2020 को श्रम प्रवर्तन अधिकारी, सितारगंज क्षेत्र, जनपद उधम सिंह नगर एवं उनके सहायक कर्मचारियों द्वारा कंपनी के प्लांट हेड श्री आर के गुप्ता एचआर हेड श्री केके राय एवं कंपनी के वकील के साथ श्रमिकों को धमकाया गया और गैरकानूनी समझौते पर जबरिया हस्ताक्षर करवाए गए।

जबकि श्रमिकों द्वारा बताया गया कि जैसा कि उक्त कथित समझौता पत्र में दर्ज है कि सहायक श्रम आयुक्त एवं अपर जिला अधिकारी की अध्यक्षता में दिनांक 09/07/2020 को यह समझौता संपन्न हुआ, जबकि ऐसा समझौता हुआ ही नहीं इसलिए यह गैरकानूनी है, और इस गैरकानूनी समझौते पत्र व शपथ पत्र को न्यायहित में निरस्त किया जाए।

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ज्ञापन में लिखा है कि श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा कानून हित व संविधान हित के विपरीत आचरण करना श्रम प्रवर्तन अधिकारी की कंपनी प्रबंधकों के साथ में सांठगांठ प्रतीत होती है, जोकि भ्रष्टाचार का गंभीर प्रकरण प्रतीत हो रहा है इस नजरिए से भी इसकी जांच कराना न्याय हित में अति आवश्यक है।

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ज्ञापन में लिखा है कि समझौते की प्रस्तावना में एएलसी व एडीएम महोदय द्वारा उपरोक्त समझौते को संपन्न कराने की असत्य बात दर्ज कर जालसाजी व धोखाधड़ी रचने वाले प्रबंधन के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की माँग को लेकर पीड़ित श्रमिकों एवं श्रमिक संयुक्त मोर्चा उधम सिंह नगर व उससे जुड़े करीब 20 यूनियनों व संगठनों द्वारा सहायक श्रम आयुक्त को शिकायती पत्र प्रेषित किए गए, परंतु कोई कार्यवाही ना करना अति चिंताजनक है।

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एडीएम महोदय व सहायक श्रम आयुक्त महोदय द्वारा दिए गए निर्देश दिनांक 10/ 07/ 2020 में स्पष्ट दर्ज है कि कंपनी प्रबंधन व श्रमिक पक्ष के मध्य 01/07 2020 को एडीएम महोदय की अध्यक्षता में हुई वार्ता में सभी श्रमिकों की कार्यबहाली पर पूर्ण सहमति बन चुकी थी। कहीं यह भी दर्ज नहीं है कि श्रमिकों की नव नियुक्ति की जाएगी, यह भी दर्ज नहीं है कि दिनांक 06/07/2020 में एएलसी व एडीएम महोदय की अध्यक्षता में उपरोक्त गैरकानूनी समझौता संपन्न हुआ है।

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इन सभी तथ्यों के बावजूद श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा प्रार्थी गणों से जबरिया हस्ताक्षरित उपरोक्त पत्रांक में समझौते की तिथि 16/07/2020 अंकित करने का कृत्य कर जालसाजी रखने की साजिश है।

ज्ञापन में लिखा है कि माननीय श्रम न्यायालय हल्द्वानी में सुनवाई के दौरान मामले में संबंधित श्रमिकों की सेवा शर्तों में बदलाव कर नवनियुक्त करना एवं संगठित होकर शोषण का विरोध करने आदि संवैधानिक अधिकारों का हनन कर वेतन समझौते पर चल रही सुनवाई को वापस लेने का दबाव बनाना माननीय श्रम न्यायालय की खुली अवमानना है। यह उत्तर प्रदेश औ0 वि0 अधिनियम 1947 (उपांतरित उत्तराखंड) की धारा 6E का खुला उल्लंघन है।

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श्रमिकों की माँग-

प्रतिष्ठान में कार्यरत स्थाई श्रमिकों की ओर से प्रेषित ज्ञापन द्वारा आयुक्त कुमाऊँ क्षेत्र और श्रम सचिव से न्याय हित में तत्काल हस्तक्षेप करने के अनुरोध के साथ श्रमिकों ने निम्नलिखित माँगें की हैं-

  1. उपरोक्त गैर कानूनी कृत्यों में लिप्त श्रम प्रवर्तन अधिकारी महोदया को तत्काल दंडित किया जाए;
  2. श्रम प्रवर्तन अधिकारी महोदया एवं उनके परिजनों की चल अचल संपत्ति की जांच कर भ्रष्टाचार के उपरोक्त प्रकरण की जांच पड़ताल की जाए;
  3. उपरोक्त गैर कानूनी समझौता पत्र एवं शपथ पत्र को तत्काल नष्ट कर निरस्त कराया जाए;
  4. श्रम प्रवर्तन अधिकारी महोदय द्वारा 21.08.2020 को पीड़ित श्रमिकों से गैरकानूनी रूप से हस्ताक्षरित उपरोक्त पत्रनकों को तत्काल नष्ट व निरस्त कराया जाए;
  5. एएलसी व एडीएम महोदय द्वारा जारी उपरोक्त निर्देश दिनांक 10/07/2020 के अनुसार समस्त 208 श्रमिकों में से शेष 91 श्रमिकों की तत्काल कार्यबहाली कराई जाए;
  6. श्रमिक शोषण पर रोक लगाई जाए।

ज्ञापन की प्रतिलिपि श्रम आयुक्त, उत्तराखंड को भी भेजा गया है।

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ज्ञापन देने वालों में धर्मदेव,  सत्यप्रकाश,  ललित बहुगुणा,  चेतन गिरी,  नथुनी शाह,  जयपाल सिंह, राकेश, निरंजन गंगवार, शिवकुमार, मिथलेश, प्रदीप कुमार, दिनेश राणा, मुकेश शर्मा, रवींद्र गोस्वामी, प्रमोद पच्वारी, मनोज तोमर, धीरज,  जोखन प्रसाद, सूरज, गोपाल, जितेन्द्र आदि शामिल थे।

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