डेल्टा व नेस्ले में कई पॉजिटिव, आइसोलेशन वार्ड में दुर्व्यवस्था, किया प्रदर्शन

होटल में बना आइसोलेशन वार्ड : जहाँ स्वास्थ्य व्यक्ति भी बीमार बन जाएगा

पन्तनगर (उत्तराखंड)। औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल की फैक्ट्रियों में कोरोना संक्रमितों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जहाँ डेल्टा में 35 और श्रमिकों के पॉजिटिव आने से संक्रमितों की संख्या 65 हो गई, वहीँ नेस्ले में अबतक 9 पॉजिटिव मामले आ चुके हैं। उधर आइसोलेशन नामित होटल में खाने-नाश्ते व अन्य दुर्व्यवस्था के कारण मज़दूरों ने थाली बजाकर प्रदर्शन किया।

डेल्टा में कोरोना विष्फोट

सिडकुल की डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स फैक्ट्री में कोरोना पॉजिटिव श्रमिकों का मिलना जारी है। 55 टेस्ट में 35 कोरोना पॉजिटिव श्रमिक और मिलने के साथ अब वहाँ संक्रमितों की संख्या 65 हो गई है। जिनमे से कुछ पन्तनगर विश्वविद्यालय के एक होस्टल में तथा बाकी को रुद्रपुर के जिंजर व रुद्रा होटल में आइसोलेट किया गया है।

फिलहाल फैक्ट्री 19 तक बंद है और यूनियन द्वारा सभी मज़दूरों की कोविड जाँच की माँग की जा रही है।

नेस्ले फैक्ट्री में 3 और पॉजिटिव

सिडकुल, पंतनगर की नेस्ले कम्पनी में 3 और पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद वहाँ संक्रमित मज़दूरों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है, जिन्हें स्थानीय रुद्रा होटल में बने आइसोलेशन वार्ड में रखा गया है।

होटल में दुर्व्यवस्था से आक्रोश

पॉजिटिव कोरोना मरीजों के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के हास्टलों के साथ रुद्रपुर व हल्द्वानी के कई होटलों को निर्धारित किया गया है, जहाँ लगातार दुर्व्यवस्था बनी हुई है। मरीजों को नास्ता व भोजन भी ना तो गुणवक्तायुक्त मिल रहा है, ना ही भोजन समय से मिल रहा है, ना ही उचित चिकित्सकीय व्यवस्था है। हालत ये हैं कि सफाई व्यवस्था भी उचित नहीं है।

नेस्ले के बीमार मज़दूर जब रुद्रा होटल पहुँचे तो वहाँ कमरे में गन्दगी का अम्बर था, जिससे उन्होंने नाराजगी जताई और रोष प्रकट किया।

वहीँ खाना-नास्ता लगातार काफी विलम्ब से मिलने और अव्यवस्था से नाराज मरीज मज़दूरों ने रुद्रा होटल में बने आइसोलेशन वार्ड में कमरों से बाहर निकल कर धरना देते थाली बजाकर प्रदर्शन किया।

इससे पूर्व पंतनगर विश्वविद्यालय के छात्रावासों में बने आइसोलेशन वार्ड की अव्यवस्था के ख़िलाफ़ भी मरीजों ने प्रदर्शन किया था।

स्वास्थ्य व्यक्ति भी बीमार बन जाएगा

किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना अति आवश्यक है, कोरोना संक्रमण में यह अहम है। लेकिन इसके लिए उचित व्यवस्था तो दूर, समय से भोजन भी नहीं मिलने और गन्दगी रहने से यह और गंभीर मामला बन जाता है। यह स्थिति तो स्वस्थ्य व्यक्ति को भी बीमार बना देगी।

प्रबंधन ने कर ली कर्तव्यों की इतिश्री

मज़दूरों में बढ़ाते संक्रमण के बावजूद प्रबंधन की चिंता कारखानों को चलने और उत्पादन की है। वे संक्रमित मज़दूरों को आइसोलेशन में डालकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहे हैं।

मरीज मज़दूरों ने खाने की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल खड़े किए। साथ ही फल दूध तो दूर, मज़दूरों को चाय तक ना मिलने, सुबह 9 बजे तक कुछ खाने को ना मिलने, सामान्य भोजन भी दोपहर 3-4 बजे तक मिलने, डाक्टरी जाँच ना होने आदि की शिकायत मज़दूरों द्वारा अपने फैक्ट्री प्रबंधन से की, लेकिन प्रबंधन की तरफ से भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला और ना ही उनको हो रही समस्याओं का समाधान किया गया। जिसको लेकर आज वह मजबूर होकर कमरों से बाहर निकले और थाली बजाकर धरना देते हुए प्रदर्शन किया।

वहीं इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है।

इस प्रकार मज़दूरों के मामले में चल रहा है कोरोना से जंग!

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