गैरकानूनी स्थानांतरण : इंटरार्क के मजदूरों की हुई आंशिक जीत

यूनियन ने की धैर्य और एकजुटता बनाये रखने की अपील

पंतनगर (उत्तराखंड)। इंटरार्क फैक्ट्री के बीते एक जुलाई से गैरकानूनी स्थानांतरण के बहाने गेटबन्दी के शिकार 195 मज़दूरों को लगातार संघर्ष के बाद कार्य पर वापस ले लिया है। हाई कोर्ट की लताड़ के बाद इंटरार्क प्रबन्धन को 28 जुलाई से सभी मज़दूरों की शिफ्ट लगा दी है। यह मज़दूरों की आंशिक जीत है।

दरअसल, पंतनगर में स्थित इन्टरार्क बिल्डिंग प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन ने कोरोना/लॉक डाउन के बीच पहले 29 सुपरवाइजर/इंजीनियरों की सेवा समाप्त कर दी। उसके बाद 195 स्थाई श्रमिकों को गैर कानूनी रूप से चेन्नई स्थानांतरित करने का नोटिस चस्पा कर दिया। जबकि कानूनी रूप से किसी भी तरीके से बिना मज़दूरों की सहमति के उन्हें राज्य से बाहर नहीं भेजा जा सकता है। ऐसे में मज़दूरों ने आंदोलन की राह पकड़ी। इस बीच यूनियन ने उच्च न्यायालय नैनीताल से इस पर स्थगनादेश ले लिया।

ज्ञात हो कि इंटरार्क कंपनी के जिले में दो प्लांट हैं- पंतनगर और किच्छा और दोनों जगह संघर्ष से यूनियनें बन चुकी हैं।  अभी दोनो यूनियनों ने अखिल भारतीय इंटरार्क मज़दूर फेडरेशन बनाकर अपनी एकता मज़बूत कर ली है और नए उत्साह से संघर्ष जारी है।

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यह सामूहिक संघर्ष की जीत है!

इंटरार्क मजदूर संगठन, सिडकुल, पन्तनगर के अध्यक्ष दलजीत सिंह ने पत्र जारी कर बताया कि यह यूनियन के सभी सदस्यों व कार्यकर्ताओं के सामुहिक प्रयासों व मेहनत का ही फल है कि आज प्रबंधन दो कदम पीछे हटने को विवश हुआ है। मगर खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है। यदि हम ढीले पड़े और आपसी एकजुटता कमजोर हुई तो प्रबंधन इसका फायदा उठाकर पलटवार करने से हरगिज नहीं चुकेगा। इसलिए सावधान होकर चलना होगा।

उन्होंने कहा कि हमें इस बात को हमेशा ही याद रखना होगा कि एकता में ही बल होता है। हमें याद रखना होगा कि यदि झाड़ू में लगे तिनके एक डोर में बंधे रहे तो वो कूड़ा करकट की साफ सफाई कर माहौल को खुशनुमा व स्वच्छ बना देता यदि तिनके बिखरे तो वही झाड़ू स्वयं ही कूड़ा करकट में बदल जाता है। हमें तय करना है कि हम क्या बनें। अभी भी कई साथी ऐसे हैं जो दो तरफा चल रहे हैं- एक तरफ यूनियन से भी जुड़े हैं, दूसरी तरफ प्रबन्धन की नजरों में भी पाक साफ बने रहना चाहते हैं। ऐसे साथियों से विशेष रूप से अनुरोध है कि दोहरापन बन्द करें। एकनिष्ठता दिखाई जाए, यूनियन से जुडो तो मजबूती से जुडो अन्यथा प्रबन्धन फायदा उठाकर अपनी चालें चलेगा।

उन्होंने बताया कि 27 जुलाई को नैनीताल हाईकोर्ट ने मज़दूरों के चेन्नई स्थानांतरण पर प्रबन्धन को लताड़ा और पूछा कि कोरोना काल में मजदूरों का ट्रांसफर क्यों कर रहे हो तो प्रबंधन के पास कोई जवाब न था उसने अगली तारीख मांगी। हाईकोर्ट में प्रबन्धन के वकील दबाव में थे उनका मनोबल कमजोर लग रहा था। उसी का परिणाम है कि प्रबंधन ने नोटिस लगाकर मजदूरों को कार्य पर बुलाया है।

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