पंतनगर : अब अमूल ऑटो बंद, मज़दूर सडकों पर

कोरोना के बहाने जिला प्रशासन ने कम्पनी में ही बना दिया था गोदाम, काम ठप्प, मज़दूर भटकते रहे

पंतनगर (उत्तराखंड)। बंदी-छंटनी का दौर तेज हुआ। टाटा की वेंडर कम्पनी अमूल ऑटो कंपोनेंट ने अचानक बंदी का नोटिस चस्पा कर दिया। इससे कंपनी में कार्यरत 69 स्थाई सहित सैकड़ों मज़दूर बेरोजगार हो गए हैं। इधर, सहायक श्रमायुक्त ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस भेज दिया है।

पांच माह से भटक रहे हैं मज़दूर

औद्योगिक क्षेत्र सिडकुल की सेक्टर-11 में स्थित अमूल ऑटो के मज़दूर पिछले लम्बे समय से प्रबंधन की कुनीतियों का शिकार था। फरवरी माह से ही प्लांट में उत्त्पदन ठप्प था। इसी बीच कोविड-19 महामारी से कम्पनी को बहाना मिल गया और उसने मज़दूरों का वेतन भी बंद कर दिया था।

मज़दूरों द्वारा लगातार शिकायत के बाद 10 जुलाई के समझौते के तहत मज़दूरों को 50 फ़ीसदी कटौती के साथ अप्रैल, मई व जून माह के वेतन का भुगतान हुआ और प्रबंधन ने जल्द प्लांट चलाने की बात की, लेकिन उसने 24 जुलाई को कम्पनी गेट पर बंदी का नोटिस चस्पा कर दिया।

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प्लांट में जिला प्रशासन ने बना दिया था गोदाम

मज़दूरों ने बताया की जिला प्रशासन ने कोरोना के बहाने प्लांट के एक हिस्से में अनाज का गोदाम बना दिया है। बाकी हिस्से में मशीनें बंद पड़ी हैं। जिस कारण विगत चार महीने से मज़दूरों व स्टाफ के लिए कोई भी जगह नहीं बची थी। इससे साफ़ जाहिर है कि प्रशासन व प्रबंधन के बीच कोई खिचड़ी पकी हुई थी, जिसका परिणाम एकतरफा बंदी के रूप में सामने आई है।

गेट पर बंदी की सूचना से मज़दूर आवाक

अमूल ऑटो कंपोनेंट कंपनी के प्रबंधन द्वारा कथित नुकसान व घाटे का हवाला देते हुए 24 जुलाई को कम्पनी गेट पर नोटिस चस्पा कर प्रतिष्ठान की बंदी घोषित कर दी गई है। मज़दूरों ने बताया कि उन्हें इस बात का पहले से ही आभास था। इस कारण वह लंबे समय से सहायक श्रमायुक्त और कारखाना निदेशक को सूचित कर रहे थे।

मज़दूरों ने बताया कि अचानक उनका कथित हिसाब शुक्रवार सुबह उनके बैंक खाते में पहुँच गया। इससे मज़दूरों में अफरा-तफरी मची और जब वे कंपनी गेट पहुंचे तो कारखाना प्रबंधक की ओर से कंपनी बंद का नोटिस गेट में चस्पा मिला। इससे मज़दूरों में आक्रोश फ़ाइल् गया और वे श्रम भवन, रुद्रपुर पहुँचे।

मज़दूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें गुमराह किया जा रहा है। उनको किस हिसाब से वेतन दिया गया है, इसकी सूचना भी प्रबंधक की ओर से नहीं मिली है। प्रबंधक की ओर से शुरू से ही 12 घंटे ड्यूटी करवाने के बाद भी ओवरटाइम नहीं दिया गया।

श्रम अधिकारी ने कम्पनी को भेजा नोटिस

मज़दूरों के आक्रोश को देखते हुए सहायक श्रमायुक्त उधम सिंह नगर ने कंपनी प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस भेजकर प्रतिष्ठान के सभी श्रमिकों के विगत एक वर्ष की उपस्थिति तथा उपस्थिति के सापेक्ष किए गए भुगतान के अभिलेख, अचानक प्रतिष्ठान बंद करने का कारण पूछा गया है। श्रम विभाग के अनुसार 27 जुलाई तक अभिलेख अगर कार्यालय में नहीं पहुंचे तो कारखाना प्रबंधक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

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