मज़दूर विरोधी नीतियों के सामूहिक विरोध के लिए आगे आओ!

‘मज़दूर संघर्ष अभियान’ जारी… 9 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन…

मज़दूर वर्ग पर मोदी सरकार सहित राज्य सरकारों के बढ़ाते हमलों, निजीकरण, छंटनी-बंदी, भयावह रूप लेती बेरोजगारी-महँगाई, सर्वजनिक संपत्तियों के निजीकारण आदि के ख़िलाफ़ मासा के आह्वान पर जारी ‘मज़दूर संघर्ष अभियान’ के तहत विभिन्न विरोध कार्यक्रम जारी हैं। इसी क्रम में हरियाणा व बिहार में कार्यक्रम हुए और हस्ताक्षर अभियान शुरू हुआ।

हरियाणा

जींद। 22 जुलाई को मनरेगा मज़दूर यूनियन, निर्माण कार्य मज़दूर मिस्त्री यूनियन, जन संघर्ष मंच हरियाणा की संयुक्त मीटिंग मनरेगा के कार्यालय मे हुई, जिसकी अध्यक्षता सुरेश कुमार ने की। मीटिंग मे मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) के कार्यक्रम को मजबूत करने के कार्यक्रम को ठोस रूप दिया केंद्र व राज्य सरकारो की मज़दूर विरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की गई तथा 9 अगस्त को अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन को सफल बनाने का आहवान किया गया।

बिहार

रोहताश। ग्रामीण मज़दूर यूनियन, बिहार घटक (मासा) ने ग्रामीण मज़दूर यूनियन, बिहार प्रखंड कमीटी नेता जयराम पाल के नेतृत्व में विरोध किया। मज़दूर संघर्ष अभियान द्वारा घोषित 9 जुलाई से 9 अगस्त 2020 तक मालिक पक्षीय श्रम सुधार के खिलाफ, निजीकरण, शिक्षा का बाजारीकरण के खिलाफ, 12 घंटे के कार्यदिवस के खात्मा, मज़दूरों के तमाम अधिकारों को तीन साल तक निरस्तीकरण के खिलाफ, मनरेगा एक साल में प्रति व्यक्ति 200 दिन काम और 800 रु. मज़दूरी के लिए अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन में शामिल करगहर प्रखंड के डुमरा पंचायत स्थित पड़वलिया और पिपरा खुर्द के साथियों के बीच चर्चा हुई।

पटना। आईएफटीयू सर्वहार द्वारा पटना के विभिन्न मज़दूर चौकों पर मज़दूरों के बीच हस्ताक्षर व पोस्टर अभियान चलाया गया।

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