कोविड 19 : अब हरियाणा में कर्मचारियों के डीए पर भी चली कैंची

DA-DR

पूँजीपतियों को राहत, श्रमिकों की वेतन कटौती और टैक्स का बढ़ता बोझ

केंद्र की मोदी सरकार से लेकर राज्य सरकारें कोविड 19 संकट का बोझ लगातार मज़दूरों-कर्मचारियों के ऊपर डाल रही हैं। ताजा मामला हरियाणा की भाजपा सरकार का है, जिसने कर्मचारियों के डीए और पेंशन भोगियों के डीआर को फ्रिज कर दिया है और एरियर भुगतान पर भी रोक लगा दी है।

राज्य की खट्टर सरकार द्वारा जारी नोटिस के अनुसार, “यह फैसला लिया गया है कि हरियाणा सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली डीए की अतिरिक्त किश्त और पेंशन भोगियों को डीआर, जो कि एक जनवरी, 2020 से बकाया है, उसे नहीं चुकाया जाएगा।”

कोविड 19 का ठीकरा कर्मचारियों के मत्थे

कोविड 19 संकट के बहाने से हरियाणा के सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ता (डीए) पर भी कैंची चला दी गई है। सूबे में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कर्मचारियों को बकाया रकम नहीं मिलेगी। छह जुलाई को राज्य सरकार की ओर से जारी किए गए नोटिफिकेशन में स्पष्ट कहा गया है कि राज्य सरकार के कर्मचारियों के डीए और पेशंनभोगियों के डियरनेस रिलीफ (डीआर) पर जुलाई 2021 तक रोक लगा दी गई है।

नोटिस के अनुसार, “यह फैसला लिया गया है कि हरियाणा सरकार के कर्मचारियों को दी जाने वाली डीए की अतिरिक्त किस्त और पेंशन भोगियों को डीआर, जो कि एक जनवरी, 2020 से बकाया है, उसे नहीं चुकाया जाएगा।” हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है, “मौजूदा दर 17 फीसदी पर दिया जा रहा डियरनेस अलाउंस और डियरनेस रिलीफ क्रमशः राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को दिया जाता रहेगा।”

सरकारी नोटिस के मुताबिक, “सरकार जब भी डीए और डीआर की की आगे की किस्तों (जो 1 जुलाई, 2021 से बकाया होंगी) को जारी करने का फैसला लेगी, उनके लिए डीए और डीआर की प्रभावी दर वही होगी, जो 1 जनवरी, 2020 से 1 जनवरी 2021 के बीच की होगी। बकौल नोटिस, “1 जनवरी, 2020 से लेकर 30 जून 2021 के समयकाल का एरियर भी नहीं चुकाया जाएगा।”

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केंद्र व यूपी सरकार लगा चुकी है रोक

इससे पूर्व केंद्र की मोदी सरकार कोरोना संकट का हवाला देकर केन्द्रीय कर्मचारियों के डीए औ पेंशन भोगियों के डीआर पर जुलाई, 2021 तक के लिए रोक लगा चुकी है। इसी का अनुसरण करते हुए अन्य राज्य सरकारें भी मज़दूर-कर्मचारियों के वेतन पर कैंची चला रही हैं।

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को दिए जाने वाले सभी छह भत्ते खत्म कर दिए थे। इससे पहले, कर्मचारियों और शिक्षकों को दिए जाने वाले छह श्रेणियों के भत्तों के भुगतान पर एक साल तक के लिए रोक लगा दी गई थी। यूपी सरकार ने इसके साथ ही कुछ और भत्तों को भी खत्म कर दिया था, जिसमें सचिवालय के सभी विभागों में लोगों का ई-गर्वनेंस के लिए प्रमोशन किया जाता था।

एक तरफ पूँजीपतियों को तरह-तरह के राहत पैकेज, दूसरी ओर मज़दूरों कर्मचारियों के वेतन में कटौती और तरह-तरह के टैक्स लगाकर बोझ लादते जाना, यही है मोदी और उसकी पूरी जमात की हक़ीक़त!

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