हिमाचल में 108, 102 सेवा पर संकट, 1200 कर्मचारी निकाले

हिमाचल प्रदेश में एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआई ने 1200 कर्मचारियों को टर्मिनेशन लेटर थमा दिया है जिसके बाद से कोविड-19 संकट के बीच हिमाचल प्रदेश में अति आवश्यक सेवा माने जाने वाली 108 और 102 एंबुलेंस सेवा 15 जुलाई के बाद बंद हो जाएगी।

दरअसल जीवीके ने 30 जून को ही सभी कर्मचारियों को निकाल दिया था मगर कर्मचारियों और यूनियन के विरोध और हिमाचल सरकार के हस्तक्षेप के बाद अनुबंध को 15 जुलाई तक बढ़ा दिया गया था।

जीवीके इएमआरआई ने 25 जून को ही 12 सौ कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के टर्मिनेशन लेटर थमा दिया था और उन्हें काम पर आने से मना कर दिया था।

जीवीके इएमआरआई हैदराबाद की कंपनी है जो अनुबंध के आधार पर अति आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराती है और यह कंपनी अपने कर्मचारियों के शोषण, भ्रष्टाचार और घोटालों के लिए कुख्यात है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश में भी करीब 350 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था और उनको 11 महीने से वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया था जिससे तंग आकर एक महिला कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली थी। तमिलनाडु में भी 108 कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा था।

इस कंपनी के ऊपर उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस सेवा के नाम पर कबाड़ वाहन और खराब वाहनों का इस्तेमाल करने का आरोप था। मुंबई एयरपोर्ट में हुए घोटाले के ऊपर भी इस कंपनी के मालिकों का नाम आया है जिस की सीबीआई जांच चल रही है।

जीवीके इएमआरआई जो कुछ भी कर रही है यह सब सरकार और प्रशासन के साथ मिलजुलकर हो रहा है। पब्लिक प्राइवेट हिस्सेदारी में सबका हिस्सा बंटा हुआ है। निजीकरण के नाम पर सुचारू संचालन व्यवस्था और मुनाफा बढ़ाने का जो सपना दिखाया जाता है यह उसकी हकीकत है। आने वाले दिनों में रेलवे और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का क्या हाल होगा इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं।

इसके अलावा कोरोना महामारी के बीच एंबुलेंस सेवा का बंद होना इस बात को दर्शाता है कि सरकार इस महामारी के खिलाफ लड़ाई को लेकर कितनी गंभीर है। बिना एंबुलेंस सेवा के कोविड-19 से लड़ने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। कोरोना वारियर्स यानी महामारी के खिलाफ आगे रहकर जनता की सेवा करने वाले लोगों को नौकरी से निकाल कर सरकारी कौन-सी मिसाल कायम करना चाहती है यह बात जनता को समझ लेना चाहिए।

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