यूपी में 181 महिला हेल्पलाइन के 351 कर्मचारियों को 11 महीने से वेतन नहीं मिला, एक ने की आत्महत्या

यूपी में संकट में फंसी महिलाओं के लिए संचालित 181 डिस्ट्रेस हेल्पलाइन में कार्यरत करीब 351 कर्मचारियों को पिछले 11 महीने से सैलरी नहीं मिली है। अखिलेश यादव के कार्यकाल में शुरू हुई महिला हेल्पलाइन 16 जिलों से बढ़कर 64 जिलों में संचालित हो रही थी।

आयुषी सिंह जो उन्नाव में महिला हेल्प लाइन में काम करती थी उन्होंने शुक्रवार को कानपुर में श्याम नगर रेलवे लाइन पर ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। आयुषी पिछले 11 महीने से अपने नियोक्ता जीवीके ईएमआरआई द्वारा सैलरी नहीं दिए जाने की वजह से काफी दबाव में थी। आयुषी कानपुर के श्याम नगर इलाके में अपने पति और 5 साल के बच्चे के साथ किराए के मकान में रह रही थी।

आयुषी के भाई सुभेंद्र ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान भी हेल्पलाइन कर्मचारियों को काम पर बुलाया जाता था और उनको सैलरी देने के बजाय 5 जून को उनके हाथ में टर्मिनेशन लेटर थमा कर उनको काम पर आने से मना कर दिया गया। आयुषी की मौत के जिम्मेदार योगी सरकार और जीवीके का प्रबंधन है।

हेल्पलाइन कर्मचारियों के अनुसार राज्य सरकार और जीवीके ईएमआरआई के बीच 18 नवंबर को 5 साल के लिए करार हुआ था जो नवंबर 2020 में पूरा होने वाला था मगर उससे पहले ही 5 जून को सभी को टर्मिनेशन लेटर थमा दिया गया।

आयुषी की मौत के बाद मामला तूल पकड़ गया और कर्मचारियों और परिवार वालों ने विरोध प्रदर्शन किया। कुछ महिलाओं और वर्कर्स फ्रंट के दिनकर कपूर ने श्रम आयुक्त वीके राय से मुलाकात कर तुरंत कार्रवाई की मांग की। उप श्रम आयुक्त ने नियोक्ता जीवीके को 10 जून से पहले सभी 351 कर्मचारियों के 11 महीने के बकाया वेतन का भुगतान करने और आयुषी के आश्रितों को ईएसआई के तहत 5,15,400 रुपए का भुगतान करने को कहा।

जीवीके ईएमआरआई हैदराबाद की कंपनी है और पूरे देश में इमरजेंसी सेवा के लिए ठेके पर काम करती है। यह कंपनी एम्बुलेंस सेवा, हेल्पलाइन टेलीफोन सहायता जैसी इमरजेंसी सेवा उपलब्ध कराती है। जीवीके ईएमआरआई भ्रष्टाचार और कर्मचारियों के शोषण के लिए कुख्यात है।

पिछले साल यूपी में ही 108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने जीवीके प्रबंधन के खिलाफ आरोप लगाए थे। जीवीके प्रबंधन 108 एंबुलेंस के नाम पर खटारा गाड़ियों का संचालन कर रहा था और विरोध करने पर कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता था। खटारा एंबुलेंस उपलब्ध कराने के नाम पर जीवीके ग्रुप ने यूपी सरकार से मोटा पैसा वसूला और यह सब यूपी के परिवार कल्याण मंत्रालय और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से हुआ।

यही नहीं जीवीके ग्रुप पर इसी साल मुंबई एयरपोर्ट पर फर्जी कंस्ट्रक्शन के नाम पर करीब 800 करोड रुपए के घोटाले का आरोप लगा है जिस की सीबीआई जांच चल रही है और सीबीआई ने चार्जशीट भी दायर कर दी है। जीवीके ग्रुप के मालिक वेंकट कृष्णा रेड्डी और राजनेताओं की मिलीभगत के आगे संपूर्ण व्यवस्था नतमस्तक दिख रही है।

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