निजीकरण के ख़िलाफ़ कोयला मज़दूरों की तीन दिवसीय हड़ताल शुरू

कोल इण्डिया व एससीसीएल के देशभर की खदानें बंद

कोल खदानों के निजीकरण और कोरोना/लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार द्वारा वाणिज्यिक कोयला खनन की इजाजत देने के विरोध में कोल इंडिया के मजदूर संगठनों के आह्वान पर मज़दूरों की तीन दिवसीय हड़ताल बृहस्पतिवार से शुरू हो गई. सरकार ने दमन का सहारा लेते हुए नेताओं की गिरफ्तारियां भी शुरू जकर दीं, लेकिन हड़ताल कामयाब रही.

इसके साथ ही कोल इंडिया शाखा बीसीसीएल में कार्यरत कर्मचारी काम पर नहीं गए हैं, जिसके चलते खदानों में अस्पताल जैसी आपातकालीन सेवाएं ठप पड़ गई हैं.

जगह-जगह मज़दूर नेताओं की गिरफ्तारियों के साथ कोल इंडिया की शाखा एसईसीएल के सोहागपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक ने बाहरी लोगों को खदान में काम करने के लिए बुलाया है, जो एक असाधारण स्थिति है और ऐसा कोल इंडिया में कभी नहीं हुआ है.

कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी और ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के बीच बीते 1 जुलाई को एक वर्चुअल बैठक हुई थी. लेकिन कोल इंडिया के मजदूर संगठनों और सरकार के बीच वाणिज्यिक कोयला खनन के मुद्दे पर बातचीत विफल रही.

बैठक के दौरान कोयला मंत्री ने यूनियनों को बताया कि वाणिज्यिक खनन केंद्र सरकार का नीतिगत निर्णय है और कोयला उत्पादन बढ़ाने का एकमात्र तरीका है. दूसरी ओर मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों ने वाणिज्यिक खनन का विरोध करते हुए अपना रुख दोहराया.

मंत्री ने अड़ियल रुख के साथ वाणिज्यिक खनन के निर्णय को वापस लेने की मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद मजदूर संगठनों के पास दो से चार जुलाई तक तीन दिनों की हड़ताल पर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा.

ज्ञात हो कि कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 18 जून को 41 कोयला ब्लॉक के वाणिज्यिक खनन को लेकर नीलामी प्रक्रिया की शुरुआत की थी. इस कदम के साथ देश के कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है.

इसके बाद कोयला क्षेत्र से जुड़े श्रमिक संगठनों ने सरकार के फैसले के विरोध में कोल इंडिया और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) में दो जुलाई से तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल पर जाने का निर्णय करते हुए नोटिस दिया था.

मज़दूरों की मांगें-

श्रमिक संगठनों की प्रमुख मांगों में कोयला खदानों में वाणिज्यिक खनन के लिए नीलामी पर रोक, कोल इंडिया की परामर्श इकाई सीएमपीडीआईएल के कंपनी से अलगाव पर रोक, संविदा कर्मचारियों को उच्च शक्ति प्राप्त समिति द्वारा तय वेतन को देना और एक जनवरी 2017 से 28 मार्च 2018 के बीच सेवानिवृत्त लोगों के लिए ग्रेच्युटी राशि को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये किया जाना शामिल है.

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