तमिलनाडु: पिता-पुत्र की हत्या के आरोपी पुलिसकर्मियों पर कई अन्य को प्रताड़ित करने के आरोप

चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया

चेन्नई: तमिलनाडु के तूतीकोरिन में पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले की न्यायिक जांच में पता चला है कि दो सप्ताह से पहले उसी पुलिस स्टेशन में उन्हीं पुलिस अधिकारियों द्वारा करीब एक दर्जन लोगों की पिटाई की गई थी.उनमें से एक की बाद में मौत हो गई जबकि न्यायिक अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दो को अस्पताल में भर्ती करवाया गया था.

बता दें कि पुलिस ने तुथुकुडी में 59 वर्षीय जयराज और उनके 31 वर्षीय बेटे बेनिक्स इमानुएल को निर्धारित समय के बाद भी मोबाइल की दुकान खोले रखने पर 19 जून को गिरफ्तार किया था.चार दिनों के बाद दोनों की अस्पताल में मौत हो गई थी. दोनों की मौत के बाद चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है.इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, तुथुकुडी जिला जज ने अपनी रिपोर्ट में इसे हिरासत में प्रताड़ना की परेशान करने वाली जानकारी कहा है.जज ने बीते 25 जून को मद्रास हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट जमा की और विस्तृत जांच के लिए निर्देश मांगा है. रिपोर्ट मंगलवार को अदालत में पेश की जा सकती है.

सूत्रों ने कहा है कि सथनकुलम न्यायिक मजिस्ट्रेट पी. सर्वानन की भूमिका की भी जांच की जा रही है जिन्होंने जयराज और बेनिक्स सहित एक दर्जन लोगों की पुलिस हिरासत को मंजूरी दी थी.रविवार को मुख्यमंत्री ईके पलानीसामी ने जयराज और बेनिक्स की मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की.हाईकोर्ट के एक सूत्र ने कहा कि न्यायिक रिपोर्ट में पाया गया कि दो सप्ताह पहले अधिकारियों द्वारा तीन दिनों तक लगातार सथनकुलम पुलिस स्टेशन में एक नाबालिग सहित आठ लोगों को प्रताड़ित किया गया था.इसमें  फ्रेंड्स ऑफ पुलिस नामक एक स्वयंसेवी समूह भी शामिल रहा. रिपोर्ट में सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन और रघु गणेश को प्रताड़ित करने वाला बताया गया है, जिसमें इंस्पेक्टर श्रीधर की सक्रिय भूमिका थी.इन्हीं तीनों पुलिसकर्मियों का नाम जयराज और बेनिक्स की मौत में सामने आया और उन्हें निलंबित कर दिया गया.

न्यायिक रिपोर्ट से यह पता नहीं चल सका कि जयराज और बेनिक्स की मौत से पहले मरने वाले महेंद्रन को किस अपराध में हिरासत में लिया गया था.महेंद्रन को उनके भाई दुरई की गिरफ्तारी के बाद हिरासत में लिया गया था. रिपोर्ट में कहा गया, दुरई के छोटे भाई (महेंद्रन) को सथनकुलम स्टेशन के उन्हीं अधिकारियों द्वारा पीट-पीटकर मार डाला गया था.उनका शव बिना पोस्टमार्टम के उनकी मां को सौंप दिया गया था. परिवार को धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने कुछ कहा, तो दुरई को भी उसी तरह मार दिया जाएगा.एक अन्य आरोपी राजासिंह को पहले सथनकुलम पुलिस स्टेशन और फिर 70 किमी दूर थट्टरमडम में प्रताड़ित किया गया था.

एक हत्या के मामले में सात अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार राजासिंह की पुलिस हिरासत हासिल करने के बाद उन पर 2017 में ऑटोरिक्शा चोरी का आरोप लगाया गया था.इन आठ लोगों में से एक 16 साल के नाबालिग को दो दिनों तक गैरकानूनी तौर पर पुलिस हिरासत में रखा गया और पिटाई की गई.राजासिंह ने न्यायिक टीम को बताया कि अधिकारियों ने उन्हें एक बेंच पर लिटा दिया और जैसे ही फ्रेंड्स ऑफ पुलिस वालंटियर उसके पैरों पर बैठे, किसी ने उसके सिर और हाथों को पकड़ लिया और दो सब-इंस्पेक्टरों ने उन्हें पीटा.उन्होंने इंस्पेक्टर श्रीधर पर आदेश देने का आरोप लगाया है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार एक फोटो में उनके बाएं कूल्हे पर गहरी चोट का निशान दिखता है.

न्यायिक रिपोर्ट में कहा गया है कि आरोपियों को शरीर के विभिन्न हिस्सों विशेषकर पिछले हिस्से पर लाठियों से लगातार पीटा जाता था.सूत्र ने कहा कि निजी अंगों में खुले चोट और दिखाई देने वाले चोटों के बाद भी राजासिंह को कोविलपट्टी उप-जेल भेज दिया गया जबकि उन्हें अस्पताल भेजा जाना चाहिए था.न्यायिक रिपोर्ट में यह भी पाया है कि कोविलपट्टी उप-जेल में कोई सीसीटीवी नहीं है और वहां मौजूद कई कैदियों ने टीम को बताया था कि उन्हें तुथुकुडी जिले के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में यातना का सामना करना पड़ा.रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि उप-जेल अधीक्षक जेल मैनुअल के अनुसार कार्य करने में क्यों विफल रहे, विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने पर कि कैदियों को आवश्यक चिकित्सा उपचार प्राप्त हो.20 जून को जयराज और बेनिक्स को भी उसी जेल में ले जाया गया और दो दिन बाद उनकी मृत्यु हो गई.

द वायर से साभार

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