मनारेगा मज़दूरों ने उठाई माँग, मिली गिरफ़्तारी

घूस नहीं देने पर पांच मज़दूरों पर झूठे मुक़दमे, तीन मज़दूर गिरफ़्तार

हनुमानगढ़ (राजस्थान)। नेठराना गाँव में मनारेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार का विरोध, घूस ना देना और न्यायपूर्ण माँगे उठाना भारी पड़ा। उल्टे पंचायत ने मनारेगा का काम बंद कर दिया, मज़दूरों पर फर्जी मुक़दमे हो गए और गिरफ्तारियां तेज हो गईं। इस घटना से क्षेत्र के मज़दूरों में भारी रोष व्याप्त हो गया है और उनके संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है।

दरअसल, हनुमानगढ़ की भादरा तहसील के नेठराना गाँव के मनारेगा मज़दूरों द्वारा विभिन्न न्यायसंगत माँगों का ज्ञापन दिया गया था और व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। इसकी प्रतिक्रिया में पंचायत ने गाँव में मनरेगा का काम ही बंद कर दिया। इसके ख़िलाफ़ सरपंच द्वारा कोई सुनवाई नहीं हुई, पंचायत कर्मचारियों ने ज्ञापन तक लेने से इंकार कर दिया।

इस घटना से मज़दूरों का आक्रोश फूट गया और उन्होंने पंचायत भवन पर जमकर प्रदर्शन किया। उधर प्रधान की मिलीभगत से पांच मज़दूरों पर तोड़फोड़ आदि के झूठे मुक़दमे ठोंक दिए गए। तीन मज़दूरों को गिरफ़्तार कर लिया गया। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जिन नामजद लोगों पर मुक़दमे दर्ज हुए हैं, उनमे से एक साथी तो प्रदर्शन में उपस्थित भी नहीं था।

दमनकारी घटना की पृष्ठभूमि

हनुमागढ़ ज़िले की भादरा तहसील के नेठराना गाँव के लोगों ने अपनी रचनात्मकता से एक बड़ा जन संघर्ष खड़ा किया है, जो अभी भी जारी है। बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति का बिजली जनसंघर्ष इसी गाँव से निकला और पूरे ज़िले में फैला, और राज्य के अन्य जिलों में भी इसने प्रवेश किया है। आज इस गाँव में मनरेगा मज़दूर संघर्ष एक तीखा मोड़ ले रहा है।

जब मनरेगा मज़दूरों ने अधिकार कि माँगें उठाईं, तो होना यह चाहिए था कि बिजली संघर्ष की पूरी शक्ति मज़दूर संघर्ष को मिलती। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बल्कि एक मज़दूर संघर्ष के उठते ही बिजली आंदोलन की रचनात्कमकता, संघर्षशीलता, एकता, सभ्यता और शांति, सब गम्भीर रूप से घायल हो गए। इससे संघर्षशील एकता कमज़ोर पड़ी और प्रशासन को कर्रवाई का मौका मिल गया।

मनारेगा मज़दूरों का संघर्ष

गाँव के मनरेगा के तहत लगभग 700 लोग सूची में शामिल हैं। वर्तमान में लगभग 100 लोगों को लगभग 25 दिन का काम मिला है।

पिछले कुछ महीनों से मज़दूरों ने काम के सुचारू आबँटन, हाज़री के सुचारू संचालन, मज़दूरी में पारदर्शिता, 200 दिन के काम, काम की जगह पर बैठने और पानी की व्यवस्था आदि को मेट (सूपरवाइज़र) और पंचायत स्तर पर बार-बार उठाया गया। 22 मई के देशव्यापी मज़दूर विरोध प्रदर्शन के समर्थन में यहाँ भी मनरेगा मज़दूरों ने अपनी माँगों को लेकर प्रदर्शन किया।

पंचायत क्लर्क के घूस माँगने का विरोध

2 जून को पंचायत क्लर्क, जो मनरेगा का काम देखते हैं, आए और बोले, “में गाड़ी से आया हूँ, ख़र्चा पानी दो।” मज़दूरों ने इंकार कर दिया और ऐसे भ्रष्टाचार पर आपत्ति जताई, सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडिओ उपस्थित है।

नतीजा यह हुआ कि मनरेगा में कार्यरत प्रशासनिक अधिकारियों और मज़दूरों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया। यह तनाव क्यूँ उत्पन्न हुआ? मज़दूरों का कहना है कि तनाव के पीछे मनरेगा में छुपा भ्रष्टाचार और सरकारी मुलाजिमों की कामचोरी है। यह भ्रष्टाचार और कामचोरी कहाँ तक जाती है यह इस बात से समझा जा सकता है कि आज पूरी पंचायत मनरेगा मज़दूरों के ख़िलाफ़ दल-बल लेके खड़ी है।

कोरोना संकट के साथ मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

कोरोना और भीषण गरमी के चलते मज़दूरों की कुछ नई माँगें भी उठीं: जो लोग काम कर रहे हैं उनका नाम सूची में नहीं दर्ज होना और उनकी मज़दूरी भी नहीं आना, काम करने की जगह पर पानी, दवाइयों और बैठने के लिए छाया (शेड) की माँग, दूर से आने वाले मज़दूरों के लिए साधन कि माँग तथा मुख्यमंत्री की घोषणा अनुसार 11 बजे छुट्टी की माँग। काम करने की जगह पर कोई शेड नहीं है, एक पीपल के पेड़ के नीचे सारे मज़दूरों को बैठना पड़ता है और इसके चलते सोशल डिस्टन्सिंग नहीं बनी रह पा रही है।

कोरोना के वक़्त यह माँग सिर्फ़ आराम करने की जगह की माँग नहीं रह जाती, यह स्वास्थ्य और जीवन के अधिकार की बात हो जाती है। इन और पुरानी माँगों के साथ कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

नतीजा यह हुआ कि 11 जून को एक पंचायत समिति भादरा से एलडीसी आए। मज़दूरों ने अपनी समस्याएँ और माँगें उठाईं, उन समस्याओं पर बात करने की बजाए, एलडीसी ने मज़दूरों पर काम चोरी का इल्ज़ाम लगाया, मज़दूरों से उनके काम का हिसाब माँगा। मज़दूरों ने कहा कि जो काम दिया जाता है, वो करते हैं, काम का आबँटन और हिसाब रखना मेट (सूपरवाइज़र) का काम है।

प्रतिक्रिया में उक्त कर्मचारी ने वहीं खड़े-खड़े घोषणा कर दी कि गाँव में नरेगा का काम ही बंद कर दिया जाएगा। मज़दूर इस घटना का विडीओ बना रहे थे, इस पर इन कर्मचारी का कहना था कि काम करो, नेतागीरी नहीं। यह विडीओ भी सोशल मीडिया पर उपस्थित है।

14 जून को नेठराना गाँव में मनेरगा का काम ग्राम पंचायत के आदेश अनुसार बंद कर दिया गया।

कामबंदी से मज़दूरों में फूटा आक्रोश

ऐसी विपदा के समय में जब पूरे देश में मनरेगा के काम और मज़दूरी को बढ़ाने की मुहिम चल रही है, जब जनता कोरोना, लॉकडाउन और बेरोज़गारी की तिहरी मार झेल रही है, राजस्थान के इस गाँव में मनरेगा का काम बंद कर दिया गया। मज़दूरों में इस बात को लेकर काफ़ी रोष भड़का। मज़दूरों ने 15 जून को सरपंच को ज्ञापन देने का फ़ैसला किया।

15 जून को सरपंच और पंचायत अधिकारियों ने मज़दूरों के हित में क़दम उठाने, मज़दूरों को आश्वासन देने की बजाए; ज्ञापन लेने से साफ़ इंकार कर दिया। सरपंच पंचायत में नहीं थे, मज़दूरों ने उन्हें बुलवाने की माँग की, पंचायत कर्मचारियों ने सरपंच को फ़ोन किया, मज़दूरों का कहना है कि कर्मचारियों ने कहा कि सरपंच ने मज़दूरों को बाहर निकालने और पुलिस बुलाने का आदेश दिया है।

मज़दूरों ने काफ़ी देर इंतेज़ार किया, धरना दिया, प्रदर्शन किया और अपनी बात को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार वीडिओ डाले। और आख़िर अधिकारों की माँग उठाने पर काम छीन लेने और शिकायत को इस प्रकार नज़रंदाज करने के पंचायत के इस रवैए पर मज़दूरों का ग़ुस्सा सब्र के बाँध से ऊपर उठ गया और उन्होंने ज्ञापन दर्ज किए जाने की माँग बुलंद की।

पंचायत कर्मियों ने तोड़फोड़ कर किया बवाल

मज़दूरों का कहना है कि पंचायत कारकर्ताओं ने ख़ुद चाय के गिलास और थर्मस इत्यादि फेंके और कुछ फ़ालतू काग़ज़ भी महिला मज़दूरों पर फेंके। प्रतिक्रिया में महिला मज़दूरों ने उन काग़ज़ों को फाड़ के हवा में उछाल दिया। पुलिस और बीडीओ आए। मज़दूरों पर तोड़फोड़ का आरोप लगाया गया, मज़दूरों ने उन्हें बताया कि इल्ज़ाम झूठा है और घटना का वीडिओ दिखाया और अपनी माँगें रखीं।

मज़दूरों पर फर्जी आरोप में मुक़दमा

बीडीओ ने आश्वासन दिया कि काम वापस शुरू कर दिया जाएगा। पंचायत ने इस पर भी अपना सामंती रवैया नहीं बदला और नाज़ुक हालात को सम्भालने की बजाए, पांच मज़दूरों/कार्यकर्ताओं पर तोड़फोड़ और महिला कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार की एफआईआर कर दी। जिन मज़दूरों पर मुक़दमा दर्ज हुआ वो हैं: महेंद्र, महबूब, शैलेन्द्र, पवन और हरीसिंह। इस घटना के वीडिओ भी सोशल मीडिया पर उपस्थित हैं। जबकि शैलेन्द्र प्रदर्शन में मौजूद भी नहीं थे।

मज़दूरों में इस बात को लेकर और भी ग़ुस्सा बढ़ गया है। 18 जून को मनरेगा मज़दूरों पर लगे झूठे मुक़दमे वापस लेने के लिए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।

19 जून को एक मज़दूर, महबूब, को गिरफ़्तार कर लिया गया।

20 जून को मज़दूरों ने गिरफ़्तारी के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया। विरोध के तुरंत बाद दो और मज़दूरों, पवन और हरीसिंह, को भी गिरफ़्तार कर लिया गाय।

इसके ख़िलाफ़ मज़दूरों में भारी आक्रोश व्याप्त है और उनका संघर्ष नया मॉड ले रहा है।

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