नीमराना : लॉकडाउन के बहाने मज़दूरों की नौकरियों पर आफत

राजस्थान अलवर के नीमराना औद्योगिक क्षेत्र में छंटनी व वेतनबंदी तेज

  • निसिन ब्रेक, डाइकिन, हैवेल्स, टोकाई इंपीरियल रबर ने कई मजदूरों को निकाला
  • कई कंपनियों ने मई माह का वेतन देने से किया इनकार
  • मज़दूरों ने एसडीएम, नीमराना को दिया ज्ञापन

राजस्थान अलवर जिले में नीमराना औद्योगिक क्षेत्र में कंपनियों की मनमानी काफी तेज हो गई है। कोरोना/लॉकडाउन के बहाने मज़दूरों का वेतन काटना, नौकरी से निकालना, मनमाने ब्रेक लगाकर नयी भर्ती करना आम बात बन चुकी है। जिससे मज़दूरों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

निसिन ने ट्रेनी श्रमिकों को निकाला

नीमराना औद्योगिक क्षेत्र में जापानी जोन स्थित निसिन ब्रेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, नीमराना ने करीब एक साथ 35 ट्रेनी श्रमिकों को मई माह का वेतन देने से इंकार करते हुए काम पर वापस लेने से मना कर दिया है। इसके ख़िलाफ़ आज श्रमिकों ने एसडीएम नीमराना को ज्ञापन सौंपा।

इन ट्रेनी श्रमिकों को 2 साल की ट्रेनिंग के लिए रखा गया था। निसीन ब्रेक एक जापानी कंपनी है और होंडा और अन्य कंपनियों के लिए ब्रेक, डिस्क ड्रम और अन्य पार्ट्स बनाती है।

लॉकडाउन के बाद श्रमिकों को 25 मई तक रिपोर्ट करने को कहा गया था। जब श्रमिक अपने निर्धारित शिफ़्ट में काम पर पहुंचे तो उनका नाम शिफ्ट शेड्यूल से गायब था और एचआर से बात करने पर उनको हिसाब लेने को कह दिया गया।

कम्पनी ट्रेनिंग अवधि पूरी होने का नाम लेकर निकालने की बात कह रही है मगर कई श्रमिकों को ट्रेनिंग अवधि पूरी होने के बाद भी 3 महीने तक काम करवाया गया। ट्रेनिंग अवधि के दौरान इन श्रमिकों कोई चेतावनी नहीं दी गई थी और सभी नियमित रूप से काम कर रहे थे।

कम्पनी प्रबंधन यह भी कह रहा है कि काम नहीं है जबकि प्लांट में तीनों शिफ्ट पूरी क्षमता से चल रही है यही नहीं पिछले दरवाजे से ठेका मजदूर भर्ती किए जा रहे हैं। यहां ठेका मज़दूरों को भी 6 से 8 महीने के लिए काम पर रखा जाता है। उसके बाद या तो रिजॉइनिंग कराई जाती है या काम से निकाल दिया जाता है।

निसिन ब्रेक में करीब 100 ट्रेनी श्रमिक थे जिनको कम्पनी ने नवंबर 2019 से ही एक-दो की संख्या में काम से निकालना शुरू कर दिया था।

ट्रेनी श्रमिकों ने एसडीएम को दिया ज्ञापन

फ़िलहाल ट्रेनी श्रमिकों को काम पर वापस नहीं लिए जाने को लेकर निसिन यूनियन प्रबंधन से वार्ता करने को प्रयासरत है। मामले की सुनवाई ना होने पर निकाले गए श्रमिक आंदोलन तेज कर सकते हैं।

आज ट्रेनिंग श्रमिकों को काम पर न लिए जाने के खिलाफ एसडीएम नीमराना को ज्ञापन सौंपा गया। एसडीएम ने कहा कि मामले को श्रम विभाग के पास कार्रवाई के लिए भेज दिया गया है उन्हें पता है कि पूरे इलाके में इस तरीके से लगातार कंपनियों द्वारा श्रमिकों को निकाला जा रहा है।

कोरोना बना छंटनी का बहाना

पूरे नीमराना बेल्ट में लॉकडाउन और कोरोना महामारी के बहाने कंपनियों द्वारा लगातार छंटनी की जा रही है।

टोकाई इंपिरियल रबर में छंटनी व वेतन बंदी

एक सप्ताह पहले अभी नीमराना में टोकाई इंपिरियल रबर द्वारा करीब ढाई सौ मजदूरों को निकाल दिया गया था और प्रबंधन द्वारा उनकी अप्रैल और मई महीने का वेतन भी रोक लिया था।

विरोध प्रदर्शन और स्थानीय प्रशासन के साथ वार्ता के बाद कंपनी प्रबंधन बकाया वेतन देने के लिए राजी हुआ लेकिन काम पर वापस लेने के बारे में अभी तक कोई सहमति नहीं बनी है और पिछले दरवाजे से नए मजदूरों की भर्ती चालू है।

आकृत उद्योग, डाइकिन एयरकंडीशनिंग में छंटनी जारी

इंडियन ज़ोन स्थित आकृति उद्योग द्वारा भी कई श्रमिकों को नौकरी से निकाल दिया गया और मई महीने का वेतन नहीं दिया गया। 12 साल से काम कर रहे श्रमिकों को भी निकाल दिया गया है। सिर्फ डाइकिन एयरकंडीशनिंग से ही अभी तक 600 ठेका मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है लेकिन इसके बारे में कहीं कोई खबर नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट का हर आदेश तो नहीं मानती कंपनियां?

सभी कंपनियां मई महीने का वेतन ना देने के पीछे 18 मई को आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे रही है। यह वही कंपनियां है जो सुप्रीम कोर्ट के ही स्थाई काम स्थाई नौकरी और समान काम समान वेतन के फैसलों को लागू करने से इनकार करती रही है।

नीमराना औद्योगिक क्षेत्र में जिस तरह से कंपनियां मजदूरों की छंटनी कर रही है उसे क्या माना जाए कंपनियों की मजबूरी या मुनाफे की हवस या एक देश का अपने ही नागरिकों के साथ धोखा। महामारी के दौर में रोजी-रोटी छीन कर नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने वाला पहला देश है शायद ये।