और बढ़ेगी बेरोजगारी, कई कंपनियों ने किया छंटनी का ऐलान

हर चार में से एक बेरोजगार, लेकिन सरकार की चिंता मालिकों के प्रति

पीएम मोदी द्वारा ‘आत्मनिर्भर भारत’ का शिगूफा छोड़ने के बीच देश में मज़दूरों की छंटनी का दौर तेजी से बढ़ रहा है। ‘स्टार्टअप इण्डिया’ कम्पनियों में छंटनी की बयार के साथ 72 फीसदी एमएसएमई ने छंटनी का ऐलान किया है, तो बड़े उद्योग भी कार्यबल काम करने लगे हैं।

उद्योगों ने कहा- कारोबार के लिए छंटनी ज़रूरी

देश की 72 फीसदी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) का कहना है कि कारोबार को सुचारू तौर पर चलाने के लिए उन्हें निश्चित तौर पर छंटनी करनी होगी। इसके अलावा कॉरपोरेट जगत में 42 फीसदी उद्योगों ने कहा है कि आगे काम जारी रखने के लिए उन्हें वर्कफोर्स में कमी करनी होगी।

ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन और 9 अन्य औद्योगिक संगठनों की ओर से साझा तौर पर किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है।

एसोसिएशन के इस सर्वे में एमएसएमई सेक्टर, सेल्फ एंप्लॉयड और कॉरपोरेट सीईओ जैसे 46,525 लोगों ने हिस्सा लिया था। 24 मई से 30 मई के बीच किए गए इस सर्वे में उद्योगपतियों ने कहा कि लघु एवं मध्यम उद्योगों को वेतन भुगतान में संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा पुराने बकाये को हासिल करने, नए ऑर्डर मिलने और ईएमआई के भुगतान को लेकर भी समस्याएँ है।

सर्वे के मुताबिक 32 फीसदी उद्योग वेतन भुगतान से बचाना चाहते हैं। इसके अलावा 20 फीसदी का कहना था कि मौजूदा मैनपावर के साथ उनके लिए काम करना महंगा होगा। 15 फीसदी ने नए ऑर्डर में कमी आने और इतने ही लोगों ने कच्चे माल की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई।

बेरोजगारी भयावह स्थिति में

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआई) के अनुसार 17 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी की दर 24 फीसदी रही है। सीएमआई के अनुसार 3 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी दर बढ़कर रिकॉर्ड 27.11 फीसदी तक पहुंच गई थी। यानी हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार हो गया। यह देश में अब तक की सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है।

सीएमआई रिपोर्ट के मुताबिक, अर्थव्यवस्था को सुधरने में काफी समय लग सकता है और श्रमिकों के लिए अभी आने वाले दिन मुश्किल भरे ही रहेंगें।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 84 फीसदी से ज्यादा घरों की मासिक आमदनी में गिरावट दर्ज की गई है। देश में कामकाजी आबादी का 25% हिस्सा इस समय बेरोजगार हो चुका है।

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10 करोड़ हो चुके बेरोजगार

वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार लिखते हैं कि भारत अकेला देश है जहां 10 करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए। इनमें से करीब 2 करोड़ नियमित वेतन वाले थे। फिर भी भारत में बेरोज़गारी की चर्चा नहीं है।

सीएमआईई के अध्ययन के मुताबिक देश में बेरोजगारी के आंकड़े तेजी से बढ़े हैं। 21 मार्च को भारत में बेरोजगारी की दर 7.4 फीसदी थी, जो 5 मई को बढ़कर 25.5 फीसदी हो गई। अध्ययन के मुताबिक देश में महज 20 से 30 साल आयु वर्ग के 2 करोड़ 70 लाख युवाओं को अप्रैल में नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की ओर से किए गए एक अन्य सर्वे के मुताबिक 70 फीसदी रोजगार दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, पुणे में छिना है।

स्टार्टअप-स्टैंडअप…? अब ‘आत्मनिर्भर भारत’

इस भयावह तस्वीर के बीच उद्योगपतियों की संस्था सीआईई में ज़नाब मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक और जुमला उछल दिया है। इसपर त्वरित टिपण्णी करते हुए वरिष्ठ समालोचक गिरीश मालवीय लिखते हैं-

मोदीजी!…. काठ की हांडी दुबारा चूल्हे पर नही चढ़ाई जाती…! आज जो आप सीआईई को संदेश दे रहे हो ठीक वैसा ही संदेश आपने 15 जनवरी 2016 में विज्ञान भवन में ‘स्टार्टअप इंडिया – स्टैंडअप इंडिया- योजना की शुरुआत करते हुए दिया था!

2015 में ‘मेक इन इंडिया’ की जब आप बात करते थे तब भी ऐसे बोलबचन देते थे, आज फिर ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नया जुमला मार्केट में उछाल दिया है आपने! …आप पहले ये तो बताइये कि मेक इन इंडिया का क्या हुआ? स्टार्टअप इंडिया का क्या हुआ? स्किल इंडिया जैसी योजना का क्या हुआ?

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स्टार्टअप कम्पनियों में भारी छंटनी का दौर

स्टार्टअप कम्पनियाँ भी इस दौर में बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं। कुछ उदहारण गौरतलब हैं-

  • मेक माय ट्रिप ने 350 कर्मचारियों की छंटनी की है।
  • बुक माय शो ने 270 कर्मचारियों की छंटनी की है।
  • उबर ने भारत में 600 कर्मचारियों को हटाने का फैसला लिया था।
  • ओला ने 1,400 कर्मचारियों की छंटनी का फैसला लिया।
  • जोमैटो ने 541 एम्प्लाई की छुट्टी की।
  • स्विगी ने 1,100 कर्मचारियों की छंटनी की है।
  • स्टार्टअप लिवस्पेस ने 450 लोगों की छंटनी कर दी है।
  • कार देखो डॉटकॉम 200 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।
  • स्टार्टअप क्योर फिट ने अपने करीब 500 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहा है।
  • होमक्रेडिट इंडिया ने 1,800 कर्मचारियों की छंटनी की -शेयरचैट अपने वर्कफोर्स के 101 कर्मचारियों की छंटनी करने जा रही है।
  • टेलीपरफॉर्मेंस ने अपने कारोबार पर COVID-19 के मार के चलते 3000 कर्मचारियों की छटनी का फैसला किया है।
  • एचडीबी फाइनेंशियल सर्विसेस ने लॉकडाउन (बंद) के दौरान करीब 150 कर्मचारियों की छंटनी कर दी है।

आखिर कहां गए 20 लाख करोड़ रुपये?

कोरोना लॉकडाउन संकट के नाम मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए का ऐलान किया था। लेकिन उसमे देश के मज़दूरों और बेरोजगारों के लिए कुछ भी नहीं है।

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पिछले दिनों वेतन भुगतान की सुनवाई के दौरान देश की सर्वोच्च अदालत के जस्टिस संजय किशन कौल ने सरकारी पक्ष के वकील से पूछा कि आप एक ओर तो ये दावा कर रहे हैं कि आपने कामगारों की जेब में पैसे डाले हैं। वो 20 हजार करोड़ रुपए आखिर कहाँ गए?

इस पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि हमने सूक्ष्म, लघु और मंझोले उद्योगों की मदद में वो रकम लगाई है। सरकार ने ये बहुत जबरदस्त काम किया है।

सवाल यह है कि सराकार के इस ‘जबरदस्त काम’ (करोड़ों रुपए देने) के बावजूद वे छंटनी पर क्यों आमादा हैं?

साफ़ है, सारी कवायद मुनाफाखोर मालिकों का मुनाफा और बढ़ाने के लिए हैं, मज़दूर जाएँ भाड़ में!

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