खाली रूट पर भी 30 घंटे तक लेट हुई 40 श्रमिक ट्रेनें

रेलवे की सफाई – भीड़ ज्यादा होने के कारण ट्रेनों का किया गया रूट डायवर्जन

लाॅकडान में श्रमिक ट्रेनों को लेकर राजनीति खूब हो रही है, लेकिन कोई भी पार्टी श्रमिकों की परेशानियों को नहीं समझ रही है। हालत यह है कि पिछले दिनों 40 से ज्यादा ट्रेनों के रूट डाइवर्ट कर दिए गए, जिससे श्रमिक का सफर और भी मुश्किलों भरा हो गया। 20 – 20 घंटे लेट चल रही ट्रेनों में खाने पीने तक का कोई इंतजाम नहीं किया गया। रेलवे का कहना है कि यूपी और बिहार में रेलवे नेटवर्क में भीड़ के कारण ट्रेनों को डायवर्ट करना पड़ा। जबकि, सामान्य दिनों में भारतीय रेलवे बिना डायवर्जन के 12,500 ट्रेनों का संचालन कैसे करता है ? चूंकि, यह वीआईपी ट्रेनें नहीं हैं इस कारण, इनका कोई पुरसाहाल नहीं है।

जानकारी के अनुसार 23 मई को कई ट्रेनें का रास्ता बदला गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार करीब 40 श्रमिक ट्रेनों का रास्ता बदला जा चुका है। रेलवे का कहना है कि इन ट्रेनों का रूट जानबूझ कर बदला गया, जबकि गोरखपुर जाने वाली ट्रेन को राउरकेला भेजने का तर्क समझ से परे है। इसके अलावा, कुछ ट्रेनों के रूट जो बदले गए हैं वह मनमर्जी और सामान्य प्रोटोकाॅल के विपरीत हैं, जैसे एक श्रमिक स्पेशल ट्रेन बेंगलुरु से करीब 1450 लोगों को लेकर यूपी के बस्ती जा रही थी। जब ट्रेन रुकी तो लोगों को लगा वह अपने घर पहुंचा गए, लेकिन ट्रेन तो गाजियाबाद में खड़ी थी। पता चला कि ट्रेन को रूट व्यस्त होने की वजह से डायवर्ट किया गया है।


इसी तरह, महाराष्ट्र के लोकमान्य टर्मिनल से 21 मई की रात एक ट्रेन पटना के लिए चली, लेकिन वह पहुंच गई पुरुलिया। रेलवे का तर्क तो यही होगा कि इसे डायवर्ट किया गया है, लेकिन रेलवे के इस डायवर्जन से यात्री कितने परेशान हो रहे हैं, उसका अंदाजा भी लगा पाना मुश्किल है। दरभंगा से चली एक ट्रेन का रूट भी बदलकर राउरकेला की ओर कर दिया गया। इस दौरान ये भी ध्यान नहीं रखा गया कि आखिर यात्री क्या खाएंगे-पिएंगे।


रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव के अनुसार 80 फीसदी ट्रेनें यूपी और बिहार पहुंच रही हैं, जिससे भीड़-भाड़ काफी अधिक बढ़ गई है। ऐसे में रेलवे को कई ट्रेनों का रूट बदलना पड़ा है। जबकि, यात्रियों का कहना है कि सामान्य दिनों में भी शायद ही कभी रूट डायवर्जन की जरूरत हो, फिर इस लाॅकडाउन में ऐसा क्या हो गया है कि भारी संख्या में ट्रेनों के रूट को बदला जा रहा है। वहीं, यात्री काफी परेशान हैं। एक ट्विटर यूजर ने लिखा है- मेरा दोस्त आनंद बख्शी सोलापुर से इटारसी जा रहा था और उसकी ट्रेन का रास्ता बदल दिया गया तो वह नागपुर पहुंच गया है।


अब स्टेशन पर रेलवे स्टाफ का कहना है कि उसे क्वारंटीन में रहना होगा। रेलवे ने तो उनके खाने-पीने के बारे में भी नहीं सोचा कि आखिर डायवर्जन में जो अतिरिक्त समय लग रहा है, उसमें यात्री क्या खाएंगे। बेंगलुरु से गाजियाबाद पहुंची ट्रेन में बैठे कुछ यात्रियों का कहना है कि उन्होंने 20 घंटों से कुछ नहीं खाया है। पुरुलिया पहुंची ट्रेन के यात्रियों से पता चला है कि उन्हें खाना-पीना कुछ नहीं मिला है और ट्रेन का पानी भी खत्म हो गया है। पहले से ही परेशान प्रवासी मजदूरों से किराया वसूले जाने को लेकर राजनीति तो खूब हो रही है, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा। बेंगलुरु से गाजियाबाद पहुंची ट्रेन के यात्रियों ने बताया कि उनसे 1020 रुपए लिए गए हैं, जिसमें से 875 रुपए ट्रेन का किराया है और 145 रुपए बस का किराया है।

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