भिलाई : मुनाफे की हवस में एक और मज़दूर की मौत

भिलाई इस्पात संयंत्र के दल्ली मेकेनाईज्ड खदान में हुआ हादसा

आज सुबह 8 बजे भिलाई इस्पात संयंत्र के दल्ली मेकेनाईज्ड खदान में पोल टूट कर गिरने से ठेका श्रमिक अतिराम शिवना, 35 वर्ष, निवासी ग्राम अरमुरकसा की मौत हो गई। माइंस प्रबंधन के उच्च अधिकारीयो की प्रमोशन के लिए तमाम सुरक्षा उपायो की अनदेखी की घोर लापरवाह पूर्ण कार्यशैली और कार्यनीति ने आज फिर एक नौजवान ठेका श्रमिक की जान ले ली है।

ठेकेदार और विभाग के छोटे अधिकारी बिना उचित सुरक्षा साधन उपलब्ध करवाये व माइंस सेफ्टी नियम का उचित ढंग से पालन करे बगैर ठेका श्रमिको के जान को जोखिम में डालकर दबाव पूर्वक काम करवा रहे है। प्रबंधन का मुखिया ट्रेड युनियन राजनीति में व्यस्त है, सेफ्टी के लिए जिम्मेदार विभाग और उसके अधिकारी गांधी जी के तीन बंदर बने आराम से बैठे रहते है। जिसकी कीमत ठेका श्रमिक कभी घायल हो कर, कभी अपंग होकर और कभी मौत के मुंह में समाकर भुगत रहे है।

ठेका श्रमिको की मौत के बाद परिवार को अनुकंपा नियुक्ति देने के लिए खुब हो हल्ला मचता है जो मृत श्रमिक के परिवार के सदस्य को नौकरी मिलते ही शांत हो जाता है।

पिछले कई दशको से चल-चल कर सड़-गल चुके मशनीरी, पुर्जो को बदलने की कोई आवाज नही उठाता, ठेका श्रमीको को सही सुरक्षा उपकरण दिया जा रहा है की नही, उनसे सुरक्षित कार्य स्थल पर कार्य करवाया जा रहा है अथवा नही, उनसे कही खतरनाक कार्यो को मैनवली तो नही करवाया जा रहा है यह सब देखने वाला कोई नही है।

मैनजमेंट और ठेकेदारो की नजर में ठेका श्रमिक की अहमियत महज मशीनी कलपुर्जो के अतिरिक्त कुछ नही है। वर्ना हर हादसे के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारीयो पर पूरी ईमानदारी के साथ जिम्मेदारी तय होती, उन्हे जेल भेजा जाता, सजा होती। पर अफसोस किसी भी घटना के लिए आज तक किसी पर जिम्मेदारी तय नही हुई, अगर हो भी रहा है तो वो महज खानापूर्ती के अतिरिक्त कुछ नही है।

अधिकारियो की लापरवाही से मजदूर घायल होते है मरते है और इसे दुर्घटना का नाम देकर फाईलो में लीपापोती कर दी जाती है। अगर एक भी अधिकारी पर ईमानदारी पूर्वक जिम्मेदारी तय कर ऐसे लापरवाहो को सजा दिलाई गई होती तो ठेका मजदूरो को ऐसे मरना नही पड़ता।

इतना सब होने के बावजुद माइंस प्रबंधन अपने पुराने सड़ गल रहे मशनीरी को बदलने की जहमत नही ऊठाता, ठेका मजदूरो के सुरक्षा की तरफ से आँख मुंदे रहता है और ऊपर से हर मौत के बाद मृतक के परिवार को अनुकंपा नौकरी देने में हिल हवाला करता आया है।

आज भी अति राम के परिवार के एक आश्रित सदस्य को सीधे-सीधे अनुकंपा नौकरी दिये जाने का पत्र सौपने के बजाए जाँच के बाद नौकरी देने का पत्र लाकर दे रहे थे।

जन मुक्ति मोर्चा और CITU के साथीयो के द्वारा भारी विरोध किये जाने के बाद प्रबंधन ने उस पत्र को वापस लेकर पुन: दूसरा पत्र दिया जिसमें एक आश्रित सदस्य को नौकरी देना लिखा हुआ है। प्रबंधन की यह हद दर्जे की बेशर्मी, अमानवीय और असंवेदनशीलता चरित्र है जो ऐसे ही समय में खुलकर सामने आता है।

आज जन मुक्ति मोर्चा ने जिम्मेदार अधिकारीयो पर FIR दर्ज करने का मांग रखा है और ऐसा नही होने पर उग्र कदम उठाने की चेतावनी दिया है।

जन मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़, जन खदान श्रमिक संघ, छत्तीसगढ़़

साथी विजय नोनहारे की फेसबुक पोस्ट से

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