बैकफुट पर योगी सरकार, 12 घंटे कार्यदिवस का फरमान वापस

मज़दूरों पर बढ़ाते हमलों के ख़िलाफ़ लम्बी लड़ाई में मिली आंशिक जीत

वर्कर्स फ्रंट की जनहित याचिका के बाद उत्तर प्रदेश में काम के घंटे बारह करने का फरमान योगी सरकार को वापस लेना पड़ गया। हालाँकि राज्य में लागू 38 श्रम क़ानूनों में से 35 क़ानूनों को पूरी तरह और वेतन अधिनियम को आंशिक तौर पर 3 साल के लिए निम्बित करने के गैर संवैधानिक क़दम पर अभी संशय बनी हुई है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी किया था।  18 मई की सुनवाई में सरकार को ज़वाब दाखिल करना है। इस बीच सरकार ने हाईकोर्ट के हवाले से 15 मई को आदेश वापसी का पत्र जारी कर दिया।

वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने इसके लिए मजदूरों और उनके सहयोग करने वालों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि सरकार संविधान के धारा 213 व 354 का खुला उल्लंघन करने की कोशिश में थी, जो कि नाकाम हो गई।

ज्ञात हो कि काम के घंटे बारह करने की प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के खिलाफ वर्कर्स फ्रंट द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश की खण्ड़पीठ के द्वारा नोटिस जारी हुआ था। मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 18 मई निर्धारित की थी। इस जनहित याचिका में अधिवक्ता प्रांजल शुक्ला व विनायक मित्तल द्वारा बहस की गयी थी।

नोटिस जारी करने के बाद हरकत में आयी प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव श्रम ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता, इलाहाबाद उच्च न्यायालय को आज जारी अपने पत्र में काम के घंटे बारह करने की अधिसूचना वापस लेने की सूचना दी है। पत्र में इसकी सूचना माननीय उच्च न्यायालय को देने का अनुरोध किया गया है।

इस निर्णय की जानकारी प्रेस को देते हुए याचिकाकर्ता व वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहा कि आखिर योगी सरकार को काम के घंटे बारह करने का मजदूर विरोधी, मनमाना, विधि विरूद्ध और तानाशाहीपूर्ण फैसला वापस लेना पड़ा।

उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा पैदल चल रहे प्रवासी मजदूरों पर कार्यवाही करने की घोषणा की आलोचना करते हुए कहा कि आरएसएस-भाजपा की सरकार को इतना अमानवीय नहीं होना चाहिए। अगर उनकी सरकार मजदूरों को मदद नहीं कर सकती तो कम से कम उनका उत्पीड़न तो न करे।

उन्होंने कहा कि आज जो मजदूरों की त्रासद स्थिति है उसके लिए सिर्फ और सिर्फ पीएम मोदी और उनकी सरकार जिम्मेदार है, जिसने चार घंटे का वक्त देकर लॉकडाउन लागू किया।

उन्होंने कहा कि श्रम कानूनों को खत्म करने का अध्यादेश भी अगर सरकार लाती है तो उसे भी चुनौती दी जायेगी। सरकार की मनमानी और तानाशाही को परास्त किया जायेगा और मेहनतकशों के लोकतांत्रिक अधिकारों और उनके जीवन की रक्षा के लिए चौतरफा प्रयास किया जायेगा।

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