इस सप्ताह : कार्ल मार्क्स की 6 कविताएँ !

मज़दूर वर्ग के शिक्षक व दोस्त कार्ल मार्क्स के जन्म दिवस (5 मई) के अवसर पर

जीवन-लक्ष्य / कार्ल मार्क्स

कठिनाइयों से रीता जीवन
मेरे लिए नहीं,
नहीं, मेरे तूफ़ानी मन को यह स्वीकार नहीं।
मुझे तो चाहिए एक महान ऊँचा लक्ष्य
और, उसके लिए उम्रभर संघर्षों का अटूट क्रम।
ओ कला! तू खोल
मानवता की धरोहर, अपने अमूल्य कोषों के द्वार
मेरे लिए खोल!
अपनी प्रज्ञा और संवेगों के आलिंगन में
अखिल विश्व को बाँध लूँगा मैं!
आओ,
हम बीहड़ और कठिन सुदूर यात्रा पर चलें
आओ, क्योंकि –
छिछला, निरुद्देश्य और लक्ष्यहीन जीवन
हमें स्वीकार नहीं।
हम, ऊँघते, कलम घिसते हुए
उत्पीड़न और लाचारी में नहीं जियेंगे।
हम – आकांक्षा, आक्रोश, आवेग और
अभिमान में जियेंगे!
असली इंसान की तरह जियेंगे।


चिकित्सा-शास्त्र के विद्यार्थी की तत्त्व-मीमांसा / कार्ल मार्क्स

आत्मा-वात्मा थी ही नहीं कभी
सांड रहे हर-हमेश अनुभव किए बिना, कभी भी, कभी उसकी
निकम्मी फंतासी है आत्मा
पेट में तो खोजी ही नहीं जा सकती वह,
और गर कोई उसको सत्य सिद्ध भी कर दे
अण्ड-बण्ड गोली भी छूमन्तर कर देगी उसे,
फिर नज़र आएंगी आत्माएँ
उभरती अन्तहीन प्रवाह में


चिकित्सा-शास्त्र के विद्यार्थी का मनोविज्ञान / कार्ल मार्क्स

करेगा बियारी
जो मालपुओं और गुलगुलों की

भोगेगा बीमारी
दुःस्वप्नों, हुलहुलों, पुलपुलों की


आचार-संहिता चिकित्सा-शास्त्र के विद्यार्थियों की / कार्ल मार्क्स

पसीना नुकसान करे बेहतर है इससे तो
पहनना एक से ज़्यादा बंडियाँ यात्राओं में
सावधान रहो उन तमाम लालचों से जो
पैदा करें गड़बड़ियाँ तुम्हारे जठर-रस के लिए
ऐसी जगहों पर फटकने मत दो अपनी नज़रें
शोले उठा सकती हों जो तुम्हारी आँखों में
पानी मिलाओ शराब में
कॉफ़ी में हर बार लो दूध
और भूलना मत हमें याद करना भाई सा’ब
करने लगो कूच जब दूसरे जहान को


गणितीय चतुराई / कार्ल मार्क्स

घटा लिया है हमने
हर चीज़ को चिन्हों में
और तर्क करते यों पेश
जैसे सूत्र गणित के भिन्नों में

ईश्वर अगर बिन्दु है
तो लम्ब के समान गुज़र नहीं सकता वह
जैसे आप खड़े नहीं हो सकते सिर के बल
बैठे चूतड़ों पर।


जेनी के लिए / कार्ल मार्क्स

एक

जेनी, चिढ़ा सकती हो तुम मुझे यह पूछकर
मेरे गीतों का शीर्षक “जेनी के लिए” होता है क्योंकर
जब सिर्फ़ तुम्हारे लिए नाड़ी मेरी चलती है तेज़ ख़ास
जब गीत मेरे सिर्फ़ तुम्हारे लिए हैं उदास
जब सिर्फ़ तुम फूँक सकती हो उनके दिल में जान
जब तुम्हारा नाम हर हिज्जा लेता मान
जब तुम दो हर सुर को सुरीलापन
जब देवी से हो न किसी साँस की भटकन?
ऐसा इसलिए कि प्यारा नाम सुन पड़ता है मीठा कितना
और इसकी लय-तान मुझसे कहती है इतना
कितना भरा-पूरा, मधुर है इसका गुँजन
जैसे कि दूर कहीँ आत्माओं का कम्पन
जैसे लय-संगति सोने के तारोंवाले सिदर्न की
जैसे कोई चमत्कार भरी ज़िन्दगी जादू की

दो

देखो, भर सकता हूँ मैं किताबें कई हज़ार
लिख-लिख सिर्फ़ “जेनी” हर पंक्ति में बार-बार
फिर भी होगा छिपा उनमें विचार जगत
शाश्वत कृत्य और अपरिवर्तनीय संकल्प
मधुर पद्य जो करता हो अब भी कोमलता से आस
ईथर की सारी चमक और सारा प्रकाश
बेचैन दुःख की पीड़ा और अपूर्व आनन्द-भान
सारा जीवन और सारा है जो मेरा ज्ञान
पढ़ सकता हूँ मैं इसे दूर के तारों में
आता है वापस यह मुझ तक पछुआ-बयारों में
भीषण लहरों की गर्जना के होने में
सच, लिखूँगा मैं इसे हर एक कोने में
कि देख सकें आनेवाली सदियाँ सभी
है प्यार जेनी, प्यार का नाम है जेनी


साभार कविता कोश


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