कर्फ्यू के दौरान सलूजा कंपनी के मज़दूर संघर्ष की राह पर

ना दिया वेतन, ना गुजरा भत्ता, ना ही राशन, ऊपर से कटौती की धौंस

लुधियाना। ‘सलूजा कंपनी’, लुधियाना में ढाई-तीन हजार मज़दूर काम करते हैं। कर्फ्यू लगने के कारण दूरदराज के इलाकों के पांच-छह सौ प्रवासी मज़दूर फैक्ट्री में फंस गए हैं। इन मज़दूरों के पास अब गुजारे के लिए कुछ भी नहीं बचा है। कंपनी की तरफ से कर्फ्यू के दौरान की तनख्वाह या गुजारा भत्ता मिलना तो बहुत दूर की बात है, मज़दूरों को अभी तक मार्च महीने की तनख्वाह भी नहीं मिली है। न ही कंपनी ने राशन देकर मदद की है।

कल मैनेजर ने अंदर आकर मज़दूरों से कहा कि तनख्वाह तो मिल जाएगी, लेकिन उसमें से 35 प्रतिशत की कटौती की जाएगी! इसके अलावा, तनख्वाह कब मिलेगी, इसका कोई समय भी नहीं बताया। 60-70 सुरक्षाकर्मियों को 35 प्रतिशत नाजायज कटौती करके तनख्वाह दी गई है।

तनख्वाह न दिए जाने और कटौती करने की घोषणा से मज़दूरों में काफी गुस्सा है। अपने सब्र का बांध टूटने के बाद मज़दूर अब सड़कों पर उतर आए हैं।

ये तस्वीरें आज की हैं। कंपनी का कोई प्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुँचा। इससे यह तो स्पष्ट हो गया है कि मालिकों की ये बातें कि “हम अपने मज़दूरों को भूखा नहीं मरने देंगे” सच्चाई से कोसों दूर हैं।

अब मज़दूरों के गुस्से को देखकर पुलिस अधिकारियों ने आकर घोषणा की है कि कल तक सभी की तनख्वा्ह उनके खातों में आ जाएगी और सरकार की तरफ से मज़दूरों को राशन भी दिया जाएगा।

पुलिस की घोषणा सही है या गलत, यह तो आने वाले दिनों में ही पता चलेगा।

#मुक्तिमार्ग

साथी नमिता के फेसबुक वाल से

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