पुलिस उत्पीड़न के ख़िलाफ़ मासा ने उत्तराखंड के सीएम को भेजा ज्ञापन

आईएमके नेताओं पर लगे मुक़दमें वापस लेने, उच्चस्तरीय जाँच कर दोषी पुलिस पर कार्यवाही की माँग

दिल्ली। मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) ने उत्तराखंड पुलिस द्वारा विगत दिनों इंक़लाबी मज़दूर केंद्र के अध्यक्ष कॉमरेड कैलाश भट्ट व ठेका मज़दूर कल्याण समिति के सचिव कॉमरेड अभिलाख सिंह के साथ पुलिस उत्पीड़न की घटना की तीखी निंदा की है और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर देशद्रोह सहित सभी मुक़दमे वापस लेने, जप्त मोबाइल वापस करने, उत्पीड़न बंद करने और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्यवाही की माँग की है।

मासा की कोऑर्डिनेशन कमेटी की ओर से भेजे गए ज्ञापन में लिखा है कि यह बड़े ही दुख और क्षोभ का विषय है कि उत्तराखंड की पुलिस मज़दूर आन्दोलन के कार्यकर्ताओं व नेताओं का उत्पीड़न बढ़ा रही है, थानों में बुलाकर उनका मानसिक शोषण कर रही है, मोबाइल जप्त कर रही है और राजद्रोह जैसे फर्जी मुक़दमे दर्ज कर रही है।

घटना से अवगत करते हुए ज्ञापन में लिखा है कि-

दिनांक 9 अप्रैल, 2020 को कोतवाली रुद्रपुर, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) के पुलिस उप निरीक्षक द्वारा इंक़लाबी मज़दूर केंद्र (आईएमके) के केन्द्रीय अध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र भट्ट को कोतवाली रुद्रपुर में बुलाकर उनसे लगभग डेढ़ घंटे पूछताछ करने के बहाने उनका मानसिक उत्पीडन किया गया। उनका मोबाइल फोन जप्त किया गया।

पुलिस द्वारा साथी कैलाश भट्ट पर दबाव बनाने के लिए उनसे उल्टे-सीधे सवाल पूछना, उनपर मज़दूरों को भड़काने और मज़दूरों से पैसा खाने का आरोप लगाना, कथित जाँच के बहाने उनका मोबाइल जब्त करना आदि गलत है और जनवादी अधिकारों का सीधा हनन है।

आगे लिखा गया है कि दिनांक 31 मार्च, 2020 को थाना पंतनगर, उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) की पुलिस द्वारा पंतनगर विश्वविद्यालय के कर्मचारी, आईएमके के कार्यकार्ता व ठेका मज़दूर कल्याण समिति, पंतनगर के सचिव श्री अभिलाख सिंह को बुलाकर 3 घंटे पूछताछ के बहाने उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया गया। उनका मोबाइल जब्त कर लिया गया। फिर अगले दिन एस.टी.एफ. द्वारा पूछताछ के नाम पर उन्हें पुनः पंतनगर थाने में बुलाया गया।

पूछताछ के बाद उनपर धारा 124(A) के तहत राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर दिया गया। उनके ऊपर लगाए गए राजद्रोह का मुकदमा भारतीय संविधान एवं भारत के सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर राजद्रोह के मुकदमों के मामलों में दिए गए निर्णयों की खुली अवमानना है।

ज्ञापन द्वारा बताया गया कि श्री अभिलाख सिंह द्वारा ऑल यूनियन सिडकुल ग्रुप में डाली गई उस पोस्ट को आधार बनाया गया, जिसमे पुलिस द्वारा मज़दूरों को मुर्गा बनाने की एक घटना की उन्होंने पुलिस की आलोचना करते हुए उसे अमानवीय बताया था। स्पष्ट है कि मज़दूरों को मुर्गा बनाना एक शर्मनाक व निंदनीय घटना है।

इस संबंध में डी.जी.पी. महोदय ने स्वयं मज़दूरों को मुर्गा बनाने को गलत ठहराया था। इसपर पुलिस को शर्मशार होने की जगह साथी अभिलाख को प्रताड़ित करना, राजद्रोह जैसी धाराओं में मुक़दमा दर्ज करना, फिर इसी मामले में साथ कैलाश भट्ट को उत्पीडित करना गलत है। पुलिस कार्यवाही का यह तरीका अमानवीय व संविधान विरोधी कृत्य है।

उधम सिंह नगर जिले की कोतवाली रुद्रपुर व थाना पन्तनगर की पुलिस द्वारा की गई उपरोक्त कार्रवाई पूरी तरह बदले की भावना से प्रेरित है एवम शासन सत्ता के खिलाफ असंतोष को कुचलने की एक साजिश है। यह अभिव्यक्त के अधिकार का खुला उल्लंघन है।

दमनात्मक कार्यवाही की निंदा करते हुए मासा ने माँग की

  1. साथी अभिलाख सिंह पर धारा 124(A) के तहत दर्ज राजद्रोह व अन्य मुक़दमे तत्काल निरस्त किया जाए;
  2. साथी कैलाश भट्ट के जब्त मोबाइल फोन को अविलम्ब वापस करते हुए उनका उत्पीड़न बन्द किया जाए:
  3. सामाजिक-राजनैतिक व मज़दूर अधिकार कार्यकर्ताओं के पुलिस उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए;
  4. इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जाँच कराकर दोषी पुलिस अधिकारियों पर क़ानून सम्मत कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।

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