राष्ट्रीयसर्वे: तीन हफ्तों में 90% मजदूरों का छिना रोजगार

94 फीसदी नहीं किसी सरकारी राहत योजना के हकदार

देशभर में कोरोना वायरस और इसके प्रसार को रोकने के लिए लागू 21 दिनों का लॉकडाउन गरीबों और खासकर मजदूर वर्ग के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है। एक गैर सरकारी संगठन (NGO) जन साहन (Jan Sahas) द्वारा कराए हालिया सर्वे के मुताबिक देश में पिछले तीन हफ्तों में करीब 90 फीसदी मजदूर अपनी आय के साधन खो चुके हैं। इससे भी ज्यादा खराब बात यह है कि केंद्र सरकार ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों को मुआवजा देने की घोषणा की है जिनकी आजीविका लॉकडाउन के चलते प्रभावित हुई है। ऐसे में अधिकांश श्रमिकों को मुआवजे का लाभ उठाना आसान नहीं होगा।

दरअसल देशभर में निर्माण क्षेत्र से जुड़े 3196 श्रमिकों पर कराए सर्वे से पता चला है कि 94 फीसदी मजदूरों के पास सरकार के मुआवजे का लाभ उठाने के लिए जरूरी भवन और निर्माण श्रमिक पहचान पत्र नहीं है। सर्वे के मुताबिक ऐसे 5.1 करोड़ मजदूर हो सकते हैं जो मुआवजे के लिए अयोग्य रह हो सकते हैं। सर्वे कहता है, ‘आंकड़ों के मुताबिक देश में 5.5 करोड़ मजदूर निर्माण क्षेत्र में कार्यरत हैं। ऐसे में 5.1 करोड़ मजूदरों को सरकारी सहायता का लाभ नहीं मिल पाएगा।’ सर्वे में सलाह दी गई कि इन मजदूरों को बोर्ड के दायरे में लाया जाना चाहिए।

सर्वे में शामिल 17 फीसदी मजदूरों के बैंक खाते नहीं हैं, जिसके चलते उन्हें सरकार का आर्थिक लाभ मिलना मुश्किल हो सकता है। एनजीओ जन सहस की सलाह है कि उन्हें आधार पहचान, ग्राम पंचायत और डाक घरों का उपयोग करके भुगतान किया जा सकता है। सर्वे के मुताबिक मजदूरों को आर्थिक राहत मिलने की एक समस्या जानकारी की कमी है। 62 फीसदी श्रमिकों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि सरकार के आपातकालीन राहत उपायों तक कैसे पहुंचा जाए, जबकि 37 फीसदी ने कहा कि वो अनभिज्ञ थे कि सरकार की मौजूदा योजनाओं का लाभ कैसे उठाया जाए।

सर्वे के मुताबिक 42 फीसदी मजदूरों ने बताया कि उनके पास दिनभर का राशन भी नहीं बचा है। सर्वे में 33 फीसदी मजदूरों ने कहा कि उनके पास राशन खरीदने के लिए पैसे नहीं है। 14 फीसदी ने कहा कि उनके पास राशन कार्ड नहीं है। 12 फीसदी ने कहा कि वो राशन नहीं ले सकते क्योंकि मौजूदा स्थिति में वहां मौजूद नहीं थे।

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