दिल्ली में गुंडों ने की मुसलमान युवक की हत्या

हमलावरों द्वारा बनाई गयी विडियो का एक दृश्य

टेस्ट होने के बावजूद कोरोनावायरस फैलाने का इलज़ाम लगा कर युवक की करी पिटाई

रविवार 5 अप्रैल को दिल्ली में हुई विभस्त घटना में, बवाना के हरेवाली गाँव के 22 वर्षीय निवासी महबूब अली पर ‘कोरोना फैलाने के प्लान’ का इलज़ाम लगा कर जानलेवा रूप से पिटाई कर के खेतों में फ़ेंक दिया गया| पुलिस द्वारा उन्हें अस्पताल ले जाने के कुछ समय बाद उसकी मौत हो गयी|

अली तब्लीगी जमात के सम्मेलन के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल गए थे| 45 दिनों के बाद वह सब्जियों की एक ट्रक में बैठ कर वापस अपने गाँव लौटे थे। उन्हें आज़ादपुर सब्जी मंडी में पुलिस निगरानी में रखा गया था और स्वास्थ्य जांच के बाद घर लौटने की अनुमति दी गयी थी| पुलिस ने बताया कि जब वह अपने गांव पहुंचे, तो यह अफवाह फैली कि अली कोरोनावायरस फैलने की साज़िश तहत लौटे हैं।

हमलावरों ने खुद बनायीं मृतक के टॉर्चर की विडियो

गांव के कुछ आदमियों द्वारा अली को पीटते हुए, खुद हमलावरों द्वारा बनायीं गयी विडियो भी सामने आई है| इस विडियो में देखा जा सकता है की हमलावर अली को चप्पलों और लकड़ी के डंडों से पीते हुए उनसे उनका ‘प्लान’ पूछ रहे हैं| डरा हुआ अली उनसे उसे छोड़देने की विनती कर रहा है| सम्मलेन में वह क्या करने गया था इसके जवाब में ‘सीखना’ शब्द आने पर हमलावर उसमें अपनी व्याख्या जोड़ कर उसे किसी साज़िश से जोड़ते सुनाई दे रहे हैं| प्रकरण की प्रतिक्रिया में पुलिस ने आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

सांप्रदायिक और अवैज्ञानिक सोच है सबसे बड़ी सामाजिक चुनौती

तब्लीघी जमात के सम्मलेन में हुए कोरोना संक्रम के बाद देश भर में मुसलामानों पर विभिन्न प्रकार के हमलों की ख़बरें आ रही हैं| मीडिया में निज़म्मुदीन मर्कज़ प्रकरण की रिपोर्टिंग की इस माहौल को बनाने में बड़ी भूमिका रही है| दूसरी और, कोरोना संक्रमण के डर से लोगों द्वारा आत्महत्या, व संदिग्ध लोगों पर हमले की खबरें भी आम हो रही हैं| इस तरह की अफवाहबाज़ी और भ्रमित करने वाली रिपोर्टिंग कोरोना की चुनौती से निपटने की जगह देश के सामने खड़ी चुनौती को और बढ़ा रही है| देश की राजधानी दिल्ली में अवैज्ञानिक, साम्प्रदायिक सोच से उपजा यह अपराध इस बड़ी सामाजिक चुनौती का उदाहरण है|  

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