52 फीसदी नौकरियां ख़त्म होने का अंदेशा

कोरोना संकट के बाद बेरोजगारी के नए संकट की आहट

वरिष्ठ आर्थिक विश्लेषक साथी गिरीश मालवीय की टिप्पणी

लॉक डाउन खुलने के बाद देश की अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर उभर कर आएगी। …कल भारत के प्रमुख उद्योग व्यापार संगठन सीआईआई के एक सीईओ सर्वे में 52 फीसदी नौकरियां खत्म होने का अंदेशा जताया गया है। कंपनियों में यह चर्चा बड़ी तेजी से चल रही है कि कितने लोगों को नौकरी से निकाले जाने की ज़रूरत है। सीआईआई ने करीब 200 सीईओ के बीच इस बारे में एक ऑनलाइन सर्वे किया है।

सीआईआई सीईओ स्नैप पोल नाम के इस सर्वे के मुताबिक़ लॉकडाउन की वजह से माँग में कमी से ज्यादातर कंपनियों की आय घटी है। इस वजह से नौकरी जाने का अंदेशा है। सीआईआई के इस सर्वे में शामिल 80 फीसदी कंपनियों ने दावा किया है कि मौजूदा वक्त में उनकी इनवेंटरी ऐसे ही पड़ी है। प्रोडक्शन में तेजी लाने की कोई योजना नही है…!

दअरसल छंटनी का यह संकट वैश्विक संकट है। IMF प्रमुख भी कह रहे हैं कि, ‘विश्व अर्थव्यवस्था के अचानक बंद होने के दीर्घकालिक प्रभावों में एक महत्वपूर्ण चिंता दिवालिया होने और छंटनी के जोखिम को लेकर है। ये न केवल सुधार धीमा कर सकती है, बल्कि हमारे समाजिक ताने-बाने को भी नष्ट कर सकती है।’ ….

कोरोना से प्रभावित अर्थव्यवस्था ‘एक तो दुबले ऊपर से दो आषाढ़’ की कहानी कह रही है।…

साल 2019 में भारत में बेरोज़गारी 45 सालों के सबसे अधिकतम स्तर पर थी और पिछले साल के अंत में देश के आठ प्रमुख क्षेत्रों से औद्योगिक उत्पादन 5.2 फ़ीसदी तक गिर गया। यह बीते 14 वर्षों में सबसे खराब स्थिति थी। कम शब्दों में कहें तो भारत की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत ख़राब हालत में थी।…

यह तो हुआ संगठित क्षेत्र का हाल। लेकिन असली संकट तो असंगठित क्षेत्र के सामने खड़ा हुआ है जिसमे देश की करीब 94 फ़ीसदी आबादी को रोज़गार प्राप्त करती है। अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का योगदान 45 फ़ीसदी है। लॉकडाउन की असंगठित क्षेत्र पर बहुत बुरी मार पड़ी है।

Coronavirus,covid19, Government Will Talk To Ficci And Cii To Save ...

भारत की कुल आबादी का 58 फ़ीसदी हिस्सा खेती पर निर्भर है और कोरोना की वजह से हुए लॉक डाउन द्वारा उपजा संकट बेहद गंभीर समय में आया है, जब नई फसल तैयार है और बाज़ार भेजे जाने के इंतज़ार में है। भारत जैसे देश में करोडों लोग गरीबी में जी रहे हैं। …अगर यह फसल बाजार तक नही पहुँची तो भूख से उपजा यह संकट सिविल वार के रूप में सामने आएगा।…

मोदी सरकार ने अपनी आर्थिक नाकामी को छुपाने के लिए कोरोना संकट के दोषी तो खोज ही लिए है, मीडिया को इसीलिए दिन रात काम पर लगा दिया गया है।….
कम लिखा है ज्यादा समझने का प्रयास कीजिएगा!…

साथी गिरीश मालवीय के फेसबुक वाल से साभार

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