हालत : पहली अप्रैल को बन गए अप्रैल फूल!

नहीं मिल पाया प्रवासी मजदूरों, कच्ची बस्तियों में रहने वालों, जरूरतमंद लोगों को राशन

जयपुर। लॉक डाउन के पहले दूसरे दिन से ही पूरे देश भर में आम जनता की खराब हालात दिखने लग गई थी। देश के महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्रों से प्रवासी मजदूरों ने अपने गांव की तरफ पैदल ही लौटना शुरू कर दिया था। वित्त मंत्री द्वारा जब 1.70 लाख करोड़ की घोषणा की गई तब आम दिहाड़ी मजदूरी करने वाले एवं प्रवासी मजदूरों को यह आशा बनी की 1 तारीख से उनको भूखे पेट दिन नहीं काटने पड़ेंगे।

आज 1 अप्रैल को पूरे देश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन सामग्री वितरित की गई। उचित मूल्य की दुकानों से पर लोगों की भीड़ सुबह-सुबह ही जमा हो गई थी। लोग अपनी बारी का इंतजार करते हुए लंबी-लंबी लाइनों में खड़े थे। लेकिन अधिकतर लोगों को खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा, उनसे कहा गया की आपका राशन कार्ड चालू नहीं है, यह आपका नाम खाद्य सुरक्षा योजना में दर्ज नहीं है।

यह लोग वह लोग हैं जिन्होंने काफी समय पहले उचित मूल्य की दुकानों पर जाना बंद कर दिया, क्योंकि दुकानदार बहुत कम सभी को पूरा राशन वितरित करता था या फिर राशन कार्ड चालू करवाने के लिए इन लोगों ने अपने इलाके के पार्षद सरपंच के घरों और कार्यालयों पर दिन-रात चक्कर निकाले, लेकिन उनको यह कह कर भेज दिया जाता की आपने हमें वोट नहीं दिए हैं।

आज जब लोगों को राशन कार्ड चालू ना होने की वजह से राशन नहीं मिला तब अलग-अलग जगह बहुत सारे दलाल भी सामने आए, जो यह कह रहे हैं कि आप हमें तीन पांच हजार दीजिए हम आपका नाम  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जुड़वा देंगें। वित्त मंत्री की घोषणा के बाद से लोग अपने  मुश्किल दिन 1 अप्रैल इंतजार में काट रहे थे यह सोचकर की तब तो राशन मिल ही जाएगा। लोगों का कहना है कि मोदी सरकार और राज्य सरकार ने उन्हें अप्रेल फूल बनाया है।

प्रशासन से बात करने पर जवाब मिला कि इस तरह के लोगों को खाने के पैकेट वितरित किये जायेंगे। जबकि प्रशासन बहुत ही कम संख्या में लोगों तक फ़ूड पैकेट्स पहुंचाता है। पूरे जयपुर में अलग अलग संगठन, संस्था और व्यक्तिगत रूप से खाद्य सामग्री का वितरण किया जा रहा है लेकिन वह भी सभी जरूरतमंदो तक नही पहुंच पा रहे है ।

जनता की माँग है कि प्रवासी मजदूरों, कच्ची बस्तियों में रहने वाले एवम जरूरतमंद किरायेदारों को सुखा राशन वितरित किया जाये।

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