कोरोना आपदा : लॉक डाउन बनाम कंपनियों में उत्पादन

संकट की घडी में आईटीसी यूनियनों की मज़दूरों से अपील

एक तरफ कोरोना का खौफ, सामाजिक दूरी बनाने के लिए समूह में ना रहने की हिदायतें, दूसरी तरफ कुछ कंपनियों द्वारा उत्पादन जारी रखने के लिए मज़दूरों पर डियूटी आने का दबाव… तमाम मज़दूर पीड़ा और मानसिक दबाव को झेल रहे हैं। उत्तराखंड में हरिद्वार की आईटीसी से लेकर पंतनगर की ब्रिटानिया तक कई कंपनियों में उत्पादन शुरू हो रहा है। नेस्ले व पारले में अनुमति मिलने के बाद कभी भी उत्त्पदन शुरू हो सकता है। मज़दूर दहशत में हैं।

मज़दूरों का कहना है कि अपने घरों से दूर अलग-अलग जगहों पर फंसे हैं, गौला क्षेत्र के खनन के मज़दूर बेहाल हैं, उनके लिए सरकार कोई तत्परता नहीं दिखा रही है। लेकिन जिस तत्परता से उसने उत्तराखंड के कुछ कारखानों को अनुमति दी है, यह बताता है कि सरकार किसके हित साध रही है।

इसी संदर्भ में हम आईटीसी मज़दूरों का दर्द हम यहाँ साझा कर रहे हैं, जहाँ फ़ूड प्रोडक्ट्स के नाम पर मज़दूरों पर प्रबंधन दबाव बना रहा है, मज़दूरों को लुभाने की कोशिशे कर रहा है, लेकिन किसी संभावित घटना व किसी अनहोनी के लिए अथवा सुरक्षा की गारंटी देने को तैयार नहीं है

आईटीसी संयुक्त संघर्ष मोर्च, हरिद्वार की मज़दूरों से अपील

ऐसी मुश्किल घड़ी जबकी मानव जाति का जीवन खतरे में है और केंद्र व राज्य सरकारें घर में रह कर कोरोना के चेन को तोडने की हिदायत दे रही हैं, भारत के साथ साथ अन्य देशों में भी कोरोना की भयभीत कर देने वाली तस्वीर हम सब ने देखी है।

ऐसी गम्भीर परिस्थित में आईटीसी प्रबंधन फैक्ट्री चलाकर समाज में एक अलग उदहारण पेश कर रहा है। फैक्ट्री मजदूरों को अलग अलग अफ़वाह फैलाकर फैक्ट्री में बुलाने का प्रयास जारी है, जो कोरोना को खुला निमंत्रण भी है। जबकी प्रबंधन ने कोई भी लिखित जिमेदारी नही ली है।

प्रबंधन द्वारा मज़दूरों को नाश्ता, बस, ओवर टाईम का वेतन देने जैसे लालच और ड्यूटी ना आने पर ऐब्सेंट लगने जैसी झूठी धमकियों का सहारा लिया जा रहा है। जबकी प्रधानमंत्री मोदी जी ने यह पहले ही स्पष्ट किया है की इस दौरान सभी का अवकाश सवेतन होगा और किसी की नौकरी नही जाएगी। ऐसी मजबूत घोषणा के बाद भी आइटीसी प्रबंधन सब कुछ दरकिनार करते हुए अपने मुनाफ़े के लिये सोच रहा है।

ज्ञात हो कि 2018 में आईटीसी  हरिद्वार में यूनियन के साथ मांगपत्र पर समझौता वार्ता चल रही थी, जिसमे मज़दूरो के लिये सुबह का नाश्ता, आने-जाने के लिये बस जैसी अति आवश्यक सुविधा की माँग शामिल थी। किन्तु इन पर समझौता करने के बजाय आईटीसी  प्रबंधन ने 1200 मज़दूरों भारी बारिश में पुलिस-प्रशासन बल से डंडे मारकर फैक्ट्री से बाहर खदेड़ दिया था।

और आज मौकापरस्त और मुनाफाखोर प्रबंधन एसेंशियल जॉब की आड़ में फैक्ट्री चलाने का प्रयास कर रही है।

आईटीसी के तीनो प्लांट की यूनियन- पैकेजिंग एवं प्रिंटिंग मज़दूर संघ, मज़दूर एकता संघ व कल्याण श्रमिक संघ लगातर प्रबंधन से मज़दूरों की सुरक्षा के लिए लॉक डाउन का पूर्ण पालन करने की बात कर रही हैं, लेकिन प्रबंधन की हठधर्मिता जारी है, क्योंकि उसे सरकार-प्रशासन का सहयोग मिल रहा है।

कतिपय साथियों को प्रबंधन द्वारा फोन किया जा रहा है और फीडबेक लिया जा रहा है कि आप उत्पादन के लिए इच्छुक हैं कि नहीं। परिवहन सुविधा पर टेढ़ी आँख करने वाला प्रबंधन आज बस से लाने-लेजाने की बात कर रहा है।

इस संक्रमित महामारी के दौर में जो भी साथी उत्पादन के इच्छुक हैं उन साथियों से आग्रह है कि अपने लिए फुल प्रोटेक्शन किट और संक्रमण की स्थिति और उसके बाद होनी वाली अनहोनी की जिम्मेदारी किसकी होगी, पहले तय कर लें फिर फैसला लें।

ध्यान रहे कि देश के प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल तक पूरे देश मे लॉक डाउन घोषित की है और हिदायत दी है कि ‘संक्रमण की प्रकिया को रोकने के लिए अपने-अपने घरों से बाहर न निकलें। सिर्फ आपातकालीन सेवा से जुड़े लोग ही बाहर निकल सकते हैं।’

साथीयों, कंपनी हमारी है और हमारी जीविका भी कंपनी से है। इसलिए कंपनी के प्रति हमारा दायित्व भी बनाता है। साथ ही हमें कंपनी द्वारा लिखित सुरक्षात्मक गारंटी भी मिलना ज़रूरी है।

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