जनता कर्फ्यू के बीच शाहीन बाग में पेट्रोल बम से हमला, जामिया में चली गोली

जनता कर्फ़्यू को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे लोग सांकेतिक प्रदर्शन के तौर पर धरना स्थल पर अपनी चप्पलें छोड़कर गए थे

नई दिल्ली, 22 मार्च। कोरोना वायरस के खिलाफ जहां एक तरफ पूरे देश में आज जनता कर्फ्यू है, वहीं देश की राजधानी दिल्ली के शाहीन बाग धरना स्थल पर पेट्रोल बम से हमला हुआ है। इसी के साथ जामिया यूनिवर्सिटी में गोली चलने का समाचार मिला है, जिसे सुनते ही लोग वहाँ इकट्ठे हो गए हैं। घटना स्थल पर बुलेट भी देखा गया है।

शुरुआती ख़बरों में कहा जा रहा है कि शाहीन बाग में तोड़-फोड़ की गई और पेट्रोल बम फेंके गए। शाहीन बाग़ वही जगह है जहां बीते साल 15 दिसंबर से नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ महिलाएं प्रदर्शन कर रही है।

ज्ञात हो कि विगत साढ़े तीन महीने से जारी दुनिया में प्रतिक बने शाहीन बाग़ के शांतिपूर्ण धरने और जामिया विश्वविद्यालय पर कई बार हमले हो चुके हैं, जिसमे संघ-भाजपा की संलिप्तता भी उजागर होती रही है, लेकिन बेखौफ अराजक तत्वों के लिए साफ़ है कि ‘जब सैंया भय कोतवाल, तो डर काहें का!’

आज की घटना संदर्भ में पुलिस ने बीबीसी से घटना की पुष्टि तो की लेकिन यह नहीं कहा कि यह हमला ही था। पुलिस का कहना है कि इस मामले की जांच हो रही है और उसके बाद ही कोई बयान जारी किया जाएगा।

दरअसल, कोरोना वायरस को देखते हुए शाहीन बाग़ में प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने निर्णय लिया था कि संक्रमण का ध्यान रखते हुए कम संख्या में ही महिलाएं प्रदर्शन में शामिल होगी।

यही नहीं, आज जनता कर्फ़्यू को देखते हुए प्रदर्शन कर रहे लोग सांकेतिक प्रदर्शन के तौर पर अपनी चप्पलों को प्रदर्शन स्थल पर छोड़कर गए थे।

हमले के ठीक बाद घटनास्थल पर पहुंचे एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार हमलावर बाइक पर सवार होकर आया था। कुछ लोगों ने हमलावर को देखा। वो बाइक पर सवार था और उसकी बाइक पर पीछे एक ट्रे थी, जिसमें संभव है कि रसायनिक तत्व रहे हों। उसके मुताबिक़, पुलिस घटनास्थल पर मौजूद थी।

फिलहाल इस हमले में किसी के भी हताहत होने की ख़बर नहीं है।

उल्लेखनीय है कि दिल्ली से नोएडा को जोड़ने वाली शाहीन बाग स्थित सड़क पर महिलाएं नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ दिसंबर से ही धरने पर बैठी हुई हैं। बीते सप्ताह दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी किए थे जिसके तहत शादी के मौकों को छोड़कर 50 से ज़्यादा लोगों के एक जगह पर इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई थी। बाद में 50 की निर्धारित संख्या को घटाकर 20 कर दिया गया है.

शुक्रवार को महिला प्रदर्शनकारियों ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि संक्रमण की स्थिति को देखते हुए एक वक़्त में उनके धरने में 50 से ज़्यादा महिलाएं शरीक नहीं होती है।

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