भगवती (माइक्रोमैक्स) मज़दूरों की शानदार जीत

प्रेस वार्ता में मज़दूरों ने कहा 15 माह का संघर्ष लाया रंग

रुद्रपुर (उत्तराखंड) 18 मार्च। माइक्रोमैक्स उत्पाद बनाने वाली भगवती प्रोडक्ट्स लिमिटेड के 303 श्रमिकों की छंटनी अवैध घोषित होने के बाद मज़दूर नेताओं ने कहा कि मालिक-सरकार गंठजोड़ के ख़िलाफ़ मज़दूरों के एकताबद्ध संघर्ष की यह जीत है। आज आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि सरकारी रियायतों का लाभ उठाकर भागने वाली कंपनियों के मुंह पर यह तमाचा है। 15 माह के लम्बे संघर्ष ने जो हौसला दिया है, उसने सभी श्रमिकों की कार्यबहाली के जज्बे को मजबूत किया है।

स्थानीय सूर्यलोक होटल में प्रेस वार्ता के माध्यम से श्रमिक प्रतिनिधियो ने बताया कि औद्योगिक न्यायाधिकरण ने सारे पक्षों को सुनने के बाद 303 श्रमिकों की छँटनी को गैरकानूनी घोषित कर दिया। माननीय न्यायाधिकरण का आदेश दिनांक 02.03.2020 जो कि दिनांक 13.03.2020 को प्रकाशित हुआ में स्पष्ट लिखा है कि “विपक्षी सेवायोजक द्वारा की गई वर्तमान अभिनिर्णय वाद में अंतरवर्णित श्रमिकों की छँटनी अवैध एवं अनुचित है एवं वर्तमान अभीनिर्णय वाद में अन्तरवर्णीत श्रमिकगण वे सभी हित लाभ पाने के अधिकारी हैं, जो उन्हें दिए गए होते यदि उपरोक्त प्रकार से छँटनी ना की गई होती।“ इसी के साथ समस्त श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली का रास्ता साफ हो गया।

दमन के बीच लगातार जारी रहा संघर्ष

प्रतिनिधियो ने बताया कि भगवती प्रबंधन ने 27 दिसंबर 2018 से महिला व पुरुष 303 श्रमिकों की गैरकानूनी छँटनी कर दी थी। साथ ही प्रबंधन में शेष बचे श्रमिकों में से यूनियन अध्यक्ष सूरज सिंह बिष्ट को निलंबित कर दिया था और बाकी 47 मज़दूरों को गैरकानूनी ले ऑफ के तहत बाहर बैठा दिया। पुलिस प्रशासन के फर्जी मुकदमों को झेलते हुए विगत 15 महीने से मज़दूर कंपनी गेट पर लगातार धरना के साथ आंदोलन को तरह-तरह के से ऊपर उठाने का प्रयास करते रहे। जमीनी लड़ाई के साथ हाईकोर्ट से लेकर न्यायाधिकरण तक वे कानूनी लड़ाई भी लड़ते रहे।

छँटनी-बन्दी का मुख्य कारण राज्य से पलायन

नेताओं ने कहा कि आज कंपनियों का यह धंधा बन गया है कि एक राज्य से सब्सिडी और विभिन्न सरकारी रियायतों का लाभ उठाकर, अपना मुनाफा बटोर कर व मज़दूरों के पेट पर लात मारकर एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन कर जाते हैं। भगवती प्रबंधन की भी यही चाहत थी। इसीलिए कभी 5000 मज़दूरों वाले इस कारखाने से प्रबन्धन धीरे-धीरे करके मशीनें और तमाम मज़दूरों को यहाँ से हटाता रहा, और अंततः बाकी मज़दूरों के ऊपर उसने गाज गिरा दी थी।

दूसरे, इस कम्पनी का यह भी धंधा है कि मज़दूरों से 3-4 साल काम कराओ फिर उन्हें निकालकर नये मज़दूर भर्ती करो। 2007-08 में कम्पनी ने जिन मज़दूरों की भर्ती की, उन्हें 2011 में निकाल दिया। पुनः 2012-13 में नई भर्ती की, जिन्हें 2018 में निकाल दिया।

तीसरे, 2017 में जब प्रबन्धन ने मज़दूरों की छँटनी और पन्तनगर प्लांट के मुनाफे से खड़ा हुये दूसरे प्लांटों (भिवाड़ी व हैदराबाद) में भेजने की शुरुआत की तो मज़दूरों ने अपने को संगठित किया और भगवती श्रमिक संगठन नाम से यूनियन बनाई। 12 दिसम्बर, 2018 को श्रम विभाग द्वारा यूनियन का वेरीफिकेशन हुआ। इसकी सूचना मिलते ही प्रबन्धन ने साजिश रची, अवैध छँटनी की और लगातार गैरकानूनी ले ऑफ का हथकण्डा अपनाता रहा।

यूनियन पंजीकरण से भी मिली है जीत

उन्होंने बताया कि प्रबन्धन की साजिश से कथित छंटनी के बहाने पहली यूनियन भगवती श्रमिक संगठन का पंजियन अभी भी बाधित है। ऐसे में भीतर बचे शेष श्रमिकों ने दूसरी यूनियन भगवती इम्पलाइज यूनियन बनाई, जो कि 26 फरवरी, 2020 को पंजीकृत हो गई। इस जीत के बाद अब यह एक बड़ी जीत मिली है।

मालिकों के पक्ष में रहा शाषन-प्रशासन-श्रम विभाग

नेताओं ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन, पुलिस, श्रम विभाग से लेकर शासन और सरकार तक ने प्रबन्धन का ही साथ दिया। मज़दूरों पर फ़र्जी मुक़दमें लगाए। श्रम विभाग ने एक भी वार्ता कराये बगैर मामले को लटकाने के लिए छँटनी का विवाद औद्योगिक न्यायाधिकरण भेज दिया। ले ऑफ के मामले में श्रम विभाग ने अपने ही पूर्ववर्ती आदेश का पालन नहीं कराया और आज भी 47 मज़दूर गैरकानूनी लेऑफ के कारण सड़क पर हैं।

श्रमिकों की अपील पर उच्च न्यायालय नैनीताल ने प्रमुख सचिव श्रम को 40 दिन में विवाद को निस्तारित करने का आदेश दिया था। लेकिन सारे तथ्यों को गोल करते हुए श्रम सचिव ने एकतरफा रूप से मालिकों के पक्ष में आदेश पारित कर दिया था। इसके बाद उच्च न्यायालय, नैनीताल द्वारा न्यायाधिकरण को 90 दिन के भीतर मामले के निस्तारण का आदेश दिया था। जिसके कारण लगातार और जल्दी जल्दी सुनवाई हुई और अंततः यह आदेश पारित हुआ।

न्यायाधिकरण का फैसला न्याय के पक्ष में

नेताओं ने बताया कि पूरे मामले में उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एम सी पन्त ने श्रमिक पक्ष से शानदार पैरवी की। जिसके बाद न्यायाधिकरण ने छंटनी को अवैध घोषित किया और सरे देयकों को पाने का अधिकारी बताया। प्रबंधन ने 144 श्रमिकों को हिसाब लिया जाना बताया था, लेकिन न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश समस्त 303 श्रमिकों के ऊपर लागू होगा। यह न्याय की जीत है।

प्रेसवार्ता में दीपक सनवाल, वंदना बिष्ट, नंदन सिंह बगडवाल, सूरज सिंह, प्रशांत, अफज़ल, ठाकुर सिंह, आदित्य, लोकेश पाठक, मुकेश जोशी आदि यूनियन प्रतिनिधि शामिल थे।

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