इस सप्ताह : गोरख पाण्डेय की कविताएं !

कुर्सीनामा / गोरख पाण्डेय

खून के समंदर पर सिक्के रखे हैं
सिक्कों पर रखी है कुर्सी
कुर्सी पर रखा हुआ
तानाशाह
एक बार फिर
कत्ले-आम का आदेश देता है


हत्या-दर-हत्या / गोरख पाण्डेय

हत्या की खबर फैली हुई है
अखबार पर,
पंजाब में हत्या
हत्या बिहार में
लंका में हत्या
लीबिया में हत्या
बीसवीं सदी हत्या से होकर जा रही है
अपने अंत की ओर
इक्कीसवीं सदी
की सुबह
क्या होगा अखबार पर ?
खून के धब्बे
या कबूतर
क्या होगा
उन अगले सौ सालों की
शुरुआत पर
लिखा ?


दंगा / गोरख पाण्डेय

1.

आओ भाई बेचू आओ
आओ भाई अशरफ आओ
मिल-जुल करके छुरा चलाओ
मालिक रोजगार देता है
पेट काट-काट कर छुरा मँगाओ
फिर मालिक की दुआ मनाओ
अपना-अपना धरम बचाओ
मिलजुल करके छुरा चलाओ
आपस में कटकर मर जाओ
छुरा चलाओ धरम बचाओ
आओ भाई आओ आओ


2.

छुरा भोंककर चिल्लाये ..
हर हर शंकर
छुरा भोंककर चिल्लाये ..
अल्लाहो अकबर
शोर खत्म होने पर
जो कुछ बच रहा
वह था छुरा
और
बहता लोहू…


3.

इस बार दंगा बहुत बड़ा था
खूब हुई थी
ख़ून की बारिश
अगले साल अच्छी होगी
फसल
मतदान की



जन्म : 1945
निधन : 29 जनवरी 1989

जन्म स्थान : ग्राम ‘पंडित के मुंडेरवा’, जिला देवरिया, उत्तर प्रदेश, भारत

कुछ प्रमुख कृतियाँ :
भोजपुरी के नौ गीत (1978), जागते रहो सोने वालो (1983), स्वर्ग से बिदाई (1989)


भूली-बिसरी ख़बरे