भगवती माइक्रोमैक्स की छँटनी ग़ैरक़ानूनी घोषित

औद्योगिक न्यायाधिकरण ने कहा छँटनी अवैध, श्रमिक सभी हितलाभ पाने के अधिकारी

रुद्रपुर (उत्तराखंड)। 15 माह लंबे संघर्ष के बाद भगवती प्रोडक्ट्स (माइक्रोमैक्स) के मज़दूरों को शानदार जीत मिली है। औद्योगिक न्यायाधिकरण, हल्द्वानी ने सारे पक्षों को सुनने के बाद 303 श्रमिकों की छँटनी को गैरकानूनी घोषित कर दिया। इसी के साथ मज़दूरों की कार्यबहाली का रास्ता साफ़ हो गया।

यूनियन पंजीकृत होने की खुशी के बाद मिले इस और बड़ी जीत से माइक्रोमैक्स मज़दूरों में खुशी की लहर दौड़ गई।

15 महीने से जारी है संघर्ष

ज्ञात हो कि यूनियन बनाने की भनक मिलते ही माइक्रोमैक्स प्रबंधन ने 27 दिसंबर 2018 को 303 श्रमिकों की गैरकानूनी छँटनी कर दी थी। साथ ही प्रबंधन में शेष बचे श्रमिकों में से यूनियन अध्यक्ष को निलंबित कर दिया था और बाकी 47 मज़दूरों को गैरकानूनी ले ऑफ के तहत बाहर बैठा दिया। तब से मजदूरों का यह संघर्ष लगातार जारी है।

पुलिस प्रशासन के फर्जी मुकदमों को झेलते हुए विगत 15 महीने से मज़दूर कंपनी गेट पर लगातार धरना के साथ आंदोलन को तरह-तरह के से ऊपर उठाने का प्रयास करते रहे। वे जमीनी लड़ाई के साथ हाईकोर्ट से लेकर औद्योगिक न्यायाधिकरण तक कानूनी लड़ाई भी लड़ते रहे।

राज्य से पलायन की थी कोशिश

दरअसल आज कंपनियों का यह धंधा बन गया है कि एक राज्य में सब्सिडी और तरह-तरह के सरकारी रियायतों को लेकर प्लांट लगाते हैं और छूटों की अवधि समाप्त होने के बाद अपना मुनाफा बटोरकर व मज़दूरों के पेट पर लात मारकर एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन कर जाते हैं। माइक्रोमैक्स उत्पाद बनाने वाली भगवती प्रोडक्ट्स के प्रबंधन की भी यही चाहत थी। इसीलिए कभी 5000 मज़दूरों वाले इस कारखाने से वह धीरे-धीरे करके मशीनें और तमाम मज़दूरों को यहाँ से हटाता रहा, और अंततः बाकी मज़दूरों के ऊपर उसने गाज गिरा दी थी।

सरकार और उसका पूरा अमला मालिकों के पक्ष में खड़ा रहा

यहाँ यह भी गौरतलब है कि प्रबंधन के साथ जिला प्रशासन, श्रम विभाग से लेकर शासन और सरकार तक खड़े रहे और हर तरह से आंदोलन को तोड़ने, दबाने और कुचलने का प्रयास करते रहे। फ़र्जी मुक़दमें लगाए। लेकिन मज़दूर धैर्य के साथ अपने संघर्ष में डटे रहे।

विकट स्थितियों में मज़दूरों ने उच्च न्यायालय नैनीताल की शरण ली थी, जिसने प्रमुख सचिव श्रम को विवाद को निस्तारित करने का आदेश दिया था। लेकिन सारे तथ्यों को गोल करते हुए श्रम सचिव ने एकतरफा रूप से मालिकों के पक्ष में आदेश पारित कर दिया था जिसके बाद मज़दूर पुनः उच्च न्यायालय गए थे।

उच्च न्यायालय ने 90 दिन में निस्तारण का दिया था आदेश

इस दौरान श्रमिक पक्ष की अपील पर उच्च न्यायालय, नैनीताल ने औद्योगिक न्यायाधिकरण को 90 दिन के भीतर मामले के निस्तारण का आदेश दिया था। जिसके कारण लगातार और जल्दी जल्दी सुनवाई हुई और अंततः यह आदेश पारित हुआ।

नहीं टिकीं प्रबंधन की दलीलें

प्रबंधन पक्ष ने लगातार यह साबित करने की कोशिश की कि उसके द्वारा की गई छँटनी पूरी तरह सही है लेकिन श्रमिक पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय से पैरवी करने के लिए आने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता एमसी पंत ने जोरदार तर्कों को प्रस्तुत किया और यह साबित किया कि प्रबंधन ने छँटनी के लिए केंद्रीय औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का अनुपालन नहीं किया।

जबकि प्रबंधन पक्ष का कथन था कि उसने उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के प्रावधानों के तहत प्रक्रिया पूरी की है जिसके तहत अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

इस संबंध में श्रमिक पक्ष की ओर से अधिवक्ता एम सी पंत ने सर्वोच्च न्यायालय की नजीर प्रस्तुत करते हुए बताया कि उत्तरांचल फॉरेस्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन एंड अदर्स वर्सेस जबर सिंह एंड अदर्स 2007 मामले में सर्वोच्च अदालत ने आदेशित किया था कि छँटनी के लिए केंद्रीय औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 25 एन के अनुसार ही छँटनी की जा सकती है। जिसका अनुपालन प्रबंधन ने नहीं किया।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रबंधन ने 27 दिसंबर को कंपनी में अवकाश घोषित किया और 29 दिसंबर को जब मज़दूर काम पर पहुँचे तो 27 दिसंबर की छँटनी दिख दी। एक ही तिथि पर दोनों करना ही छलनियोजन है।

न्यायाधिकरण ने जबर सिंह मामले को माना नज़ीर

न्यायाधिकरण ने प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत की गई अन्य नज़ीरों को अस्वीकार करते हुए जबर सिंह मामले में दिए गए फैसले को नजीर माना और श्रमिकों के पक्ष में अपना फैसला सुनाया।

अपने अभीनिर्णय में पीठासीन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि “विपक्षी सेवायोजक द्वारा की गई वर्तमान अभिनिर्णय वाद में अंतरवर्णित श्रमिकों की छँटनी अवैध एवं अनुचित है एवं वर्तमान अभीनिर्णय वाद में अन्तरवर्णीत श्रमिकगण वे सभी हित लाभ पाने के अधिकारी हैं, जो उन्हें दिए गए होते यदि उपरोक्त प्रकार से छँटनी ना की गई होती।”

माननीय न्यायालय ने  यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश समस्त 303 श्रमिकों के ऊपर लागू होगा। प्रबंधन ने जिन 144 श्रमिकों को हिसाब लिया जाना बताया था, उन्हें भी सबके समान लाभ मिलेगा।

मज़दूरों में खुशी की लहर

इस बड़ी जीत के बाद मज़दूरों में खुशी की लहर दौड़ गई। भगवती श्रमिक संगठन ने बताया कि अभी हमने एक बड़ा मोर्चा जीता है। अब हमें अपनी पूरी जंग को जीत में तब्दील करना है। अपने पूरे वेतन के साथ कंपनी में अपनी कार्यबहाली करानी है। इसलिए अपनी जुझारू एकता के साथ आगे बढ़ना है।

संगठन ने इस जीत के लिए समस्त मज़दूरों के एकताबद्ध लंबे संघर्ष व क्षेत्रीय यूनियनों व मज़दूरों के सतत सहयोग को बताते हुए उन्हें बधाई दी है और अपने वकीलों को धन्यवाद दिया है।

मज़दूरों के संघर्षशील जज़्बे और जीत के लिए मज़दूर सहयोग केंद्र ने बधाई दी है।

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