दबे पांव आपके करीब आ गई है कोरोना वायरस

सबसे बड़ी मार मेहनतकश वर्ग पर

चीन से शुरू हुई कोरोना (SARS CoV 2) वायरस से होने वाली कोविड-19 बीमारी अब दुनिया के कई देशों को अपने चपेट में ले लिया है। निमोनिया की तरह दिखने वाली बीमारी दबे पांव आपके करीब आ गई है। यूरोप अमेरिका में यह कहर ढा रही है और भारत में इसने दस्तक दे दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब कोरोना वायरस को पैनडेमिक यानी महामारी घोषित कर दिया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक भारत सहित 114 देशों में अब तक 118000 मामले सामने आए हैं।

चीन में इसके फैलने और उसे रोकने के लिए वहां की विफलता और सफलता से बहुत सारे देशों ने कुछ नहीं सीखा। भारत सहित दुनिया के कई देश चीन के खानपान और चमगादड़ गिनते रहे और चीन की तबाही के ख़्वाब में अपने सैकड़ों नागरिकों की जान जोखिम में डाल दी। बीमारी को रोकने के कम और शेयर बाजार के गिरने से लेकर राजनीतिक उठापटक की चिंता तकरीबन सभी देशों ने ज्यादा दिखाई।

इससे निपटने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को थोड़ी देर के लिए दरकिनार भी कर दें तो तकरीबन हर जगह की सरकारों ने तब तक कोई एक्शन नहीं लिया, जब तक यह बीमारी गुपचुप तरीके से महामारी नहीं बन गई।

क्या होती है महामारी?

महामारी होने की अधिक संभावना तब होती है जब वायरस बिलकुल नया हो, आसानी से लोगों में संक्रमित हो रहा हो और लोगों के बीच संपर्क से प्रभावी और निरंतरता से फैल रहा हो। कोरोना वायरस इन सभी पैमानों को पूरा करता है।

डब्ल्यूएचओ के अध्यक्ष डॉ. टेडरोज़ आध्यनोम गेब्रेयेसोस ने कोरोना वायरस को महामारी घोषित करते हुए बताया कि वायरस को लेकर निष्क्रियता चिंताजनक है। ये परिभाषा सिर्फ़ उस संक्रमणकारी बीमारियों के लिए इस्तेमाल की जाती है जो बेहद तेज़ी से कई देशों में एक साथ लोगों के बीच संपर्क से फैलती है।

अब भारत में दस्तक

SARS CoV 2 वायरस से होने वाली कोविड-19 बीमारी चीन में शुरू हुई। चीन ने इस पर काफी हद्द तक काबू पा लिया है। यूरोप अमेरिका में यह कहर ढा रही है और भारत में इसने दस्तक दे दी है।

डाक्टर नावमीत नव के अनुसार अब समस्या ये है कि भारत यूरोप, अमेरिका या चीन नहीं है। भारत में इस बीमारी के महामारी का रूप लेने की संभावना ज्यादा है। हालांकि मृत्यु दर इसकी 1 प्रतिशत के आसपास है। लेकिन भारत की जितनी बड़ी जनसँख्या है और उस जनसँख्या के जितने बड़े हिस्से को यह वायरस संक्रमित कर सकता है, उसका 1 प्रतिशत भी बहुत बड़ी संख्या बन जाएगी।

सबसे अधिक प्रभावित होगा मेहनतकश

यह वायरस अमीर, गरीब, हिन्दू, मुस्लिम, सवर्ण, अवर्ण का भेद नहीं करता। लेकिन हमारे देश की चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाएं यह भेद करती हैं। ऐसे में अगर यह वायरस महामारी का रूप धारण करता है (जिसकी संभावना भी है) तो इसकी मार सबसे ज्यादा मेहनतकश वर्ग पर पड़ेगी। ऐसी स्थिति में जो भी हताहत होंगे वे सब इस व्यवस्था का ही शिकार होंगे।

बचाव के लिए क्या करें

सरकार ने इसे इमरजेंसी घोषित कर दिया है लेकिन असली इमरजेंसी, जो इस इमरजेंसी का कारण है वो है व्यवस्था जो लोगों को बचाव व निदान की सुविधाएं नहीं प्रदान कर सकती। उस तरफ ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल के लिए बीमारी से बचाव में ही भलाई है।

अभी तक कोरोना वायरस का कोई इलाज या टीका नहीं है। वायरस के विस्तार को रोकना ही सबसे अहम है।

डाक्टर नावमीत नव के अनुसार बार बार साबुन पानी से हाथ धोना, खांसते छींकते वक्त मुंह नाक को ढंकना, मुंह आँख नाक को छूने से बचना, लोगों से दूरी बनाकर रखना, हाथ मिलाने से परहेज करना व बीमार होने की स्थिति में डॉक्टर से सम्पर्क करना जरूरी उपाय हैं जो हमें करने चाहिए।

चिंतनीय सवाल

डाक्टर नावमीत नव सोचने के ज़रूरी मुद्दे उठाते हुए लिखते हैं कि साथ ही यह भी सोचना चाहिए कि क्यों वायरस को कंटेन करने में दिक्कत हो रही है? क्यों मेहनतकश वर्ग को इससे ज्यादा खतरा है? क्यों इस वर्ग का स्वास्थ्य सरकार की प्रायोरिटी पर नहीं है? कैसे यह व्यवस्था इस तरह की महामारियों के लिए जिम्मेदार होती है? कैसे इस तरह की महामारियों को रोका जा सकता है?

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