चुनाव से बनी होण्डा मानेसर यूनियन की नई टीम

नए नेतृत्व के समक्ष माँग पत्र का निस्तारण, निलम्बित नेताओं सहित सभी ठेका मज़दूरों की कार्यबहाली का मुद्दा बरकरार है!

मानेसर, गुडगाँव। 31 जनवरी को होण्डा मानेसर कम्पनी यूनियन में चुनाव हुआ और नयी कार्यकारिणी जीतकर आई है। नई टीम में जहाँ अशोक यादव प्रधान व हरजीत महा सचिव बने हैं। वहीं निवर्तमान प्रधान सुंरेश गौड़ सचिव पद पर लौटे हैं। इसके अलावा जय वीर यादव उप प्रधान, राम निवास कोषाध्यक्ष, संदीप गुज्जर सह सचिव, विक्रम संगठन सचिव तथा प्रकाश क़ानूनी सलाहकार चुने गये हैं।

नयी टीम ऐसे समय में चुनकर आई है, जब यूनियन का माँग पत्र डेढ साल से विवादित है, तो दूसरी तरफ करीब ढाई हजार ठेका मज़दूर पिछले 3 माह से संघर्षरत हैं।

3 माह से संघर्षरत हैं होण्डा के ठेका मज़दूर

काफी कठिनाइयों के बावजूद भी मानेसर होंडा के ठेका मज़दूर लगातार 3 माह से संघर्षरत हैं। मंदी के बहाने अन्यायपूर्ण छँटनी के खि़लाफ लगभग 2500 मज़दूरों ने आईएमटी मानेसर में धरना जारी रखा है।

ज्ञात हो कि 4 नवम्बर 2019 को होंडा प्रबंधन ने अचानक 650 ठेका मज़दूरों का गेट बंद कर दिया था, जो पिछले 7-8 साल या उससे ज्यादा समय से कंपनी में काम कर रहे थे। 5 नवम्बर से ये मज़दूर कंपनी गेट के बाहर और बाकि ठेका मज़दूर कंपनी के अन्दर उत्पादन बंद करके धरने पर बैठ गए थे।

यूनियन का माँग पत्र भी विवादित है

पिछले ढेड़ साल से यूनियन का माँग पत्र भी लंबित है। इस पूरे संघर्ष के दौरान होंडा प्रबंधन ने होंडा यूनियन के निवर्तमान प्रधान सुरेश गौड़ सहित 6 मज़दूरों को निलंबित कर दिया था। इस प्रकार माँग पत्र के समाधान सहित यूनियन नेताओं की कार्यबहाली का मुद्दा भी सामने है।

मंदी तो कंपनी का बहाना है

एक तरफ होंडा प्रबंधन मंदी के बहाने मानेसर प्लांट में ठेका मज़दूरों की छँटनी कर रहा है, दूसरी तरफ होंडा के बाकि प्लांटों में उत्पादन शिफ्ट करके ओवरटाइम चला रहा है। ठेका मज़दूरों को वापस लेने की जगह प्रबंधन ने पिछले दिनों करीब 800 नये नीम ट्रेनी भर्ती किये हैं।

इलाकाई एकता से संघर्ष तेज करना होगा

ऐसी स्थिति में, सिर्फ धरना जारी रखना ही नहीं बल्कि पूरे औद्योगिक क्षेत्र में ठेका-स्थायी मज़दूरों का और व्यापक और जबरदस्त संघर्ष ही होंडा जैसी कंपनी को झुका सकती है। इस बीच होंडा के बेंगलुरु प्लांट में भी यूनियन का पंजीकरण हो गया है। ऐसे में होंडा यूनियनों का आपसी तालमेल व एकजुट संघर्ष भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

नए नेतृत्व से मज़दूरों को काफी उम्मीदें हैं

चुनकर आए इस नए नेतृत्व से मज़दूरों को काफी उम्मीदें हैं। माँग पत्र का मज़दूरों के हित में निस्तारण, निलम्बित नेताओं की कार्यबहाली और सभी ठेका मज़दूरों की कार्यबहाली प्राथमिक कार्य बनता है। ऐसे में यूनियन की नई टीम को इन सभी चुनौतियों से जूझना होगा।

निश्चित ही नया नेतृत्व इस गहरे संकट से बाहर निकलने के लिए नई व कुशल रणनीति बना रहा होगा!

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