जनविरोधी बजट के ख़िलाफ़ जन सुनवाई और विरोध प्रदर्शन

दिल्ली के जंतर मंतर में विभिन्न संगठनों ने बताया कि कैसे बजट मज़दूर-किसान विरोधी है

दिल्ली ,5 फरवरी। जन विरोधी बजट के विरोध में राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक जन सुनवाई और विरोध प्रदर्शन हुआ, जहाँ विभिन्न अभियान, समूह, संगठनों और आम लोगों ने एक साथ आवाज़ बुलंद की। इस मौके पर कई वक्ताओं ने बजट का मूल्यांकन करके दिखाया कि कैसे यह बजट मज़दूर वर्ग और किसानों के ख़िलाफ़ है, और जनता के पॉकेट से पैसा लूटकर चंद अमीरों के हाथों में डालने की साजिश है।

वक्ताओं ने खाद्य सुरक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य, एससी/एसटी कल्याण, सामाजिक कल्याण पेंशन, शिक्षा और पर्यावरण पर इसके दुष्परिणामों को उजागर किया। बताया कि जनता के मूलभूत सुविधाएं, जीवन यापन के संसाधन, और नौकरियों पर यह सीधे-सीधे मार है।

अर्थशास्त्री जयति घोष ने बताया की मनरेगा, शिक्षा और खाद्य पर बजट में भारी कटौती तो है ही, लेकिन ये सिर्फ आंकड़ो से भी नही समझा जा सकता, क्योंकि सरकार सही आंकड़ो को सामने ही नही आने दे रही है, जिससे यह और भी साफ़ होता है कि जनता के खुद के पैसे का लूट किस प्रचंड रूप में हो रहा है। खाद्य सब्सिडी में 70 हज़ार करोड़ की कटौती है। और यह ऐसे माहौल में हैं जहाँ देश आर्थिक संकट मंडी से त्रस्त है, जिसका सुधार का तरीका यह होना चाहिए था की शिक्षा, स्वास्थ, खाद्य, आदि घरेलू आवश्यकताओं पर सरकारी खर्चा बढ़ाया जाए।

अलग अलग वक्ताओं ने कहा की कई क्षेत्र में मज़दूरों को निकाला जा रहा है और बकाया वेतन भी नही दिया जा रहा। इसका एक कारण यह भी हैं कि केंद्र सरकार से राज्य सरकारों को पैसा नही दिया गया है, जैसे की 4 महीने के ऊपर महारष्ट्र के आंगनवाणी, आशा वर्करों को तनख्वा नही मिली है, क्योंकि राज्य सरकार के पास पैसा ही नही हैं।

ट्रेड यूनियन से जुड़े कुछ वक्ताओं ने कहा की इसको सुलझाने के बजाए, सरकार रिज़र्व बैंक से पैसा निकालकर मालिकों और बड़े पूँजीपतियो को दे रही है।

सभा में विभिन्न मज़दूर साथियों ने कहा कि इस खराब आर्थिक हालात से ध्यान हटाने के लिए सीएए, एनआरसी जैसे कानून ला रही है, जिसके चलते मज़दूरों में दरारें पैदा हो, और कोई एकता न बन पाए। नागरिकता बस अधिकार ही नहीं, अधिकार होने का अधिकार है, इससे किसी भी नागरिक को वंचित करने की साजिश पूरे मज़दूर वर्ग पर प्रचंड हमला है। यह बात दिल्ली में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे विभिन्न प्रदर्शनों में भी हो रही है, जो साम्प्रदायिकता का ज़हर और अमीरों के हमले, दोनो के खिलाफ आवाज़ बुलंद कर रही है। नौकरियां और खाने के लिए पर्याप्त न होना का मुख्य कारण है कि 1% अमीरों के पास आज देश की 70% पूंजी है। यह बजट उसी 1% अमीरों को और अमीर बनाने की पूरी प्लानिंग है।

सभा में रोज़ी रोटी अधिकार अभियान, जनांदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय, नरेगा संघर्ष मोर्चा, पेंशन परिषद, सफाई कर्मचारी आंदोलन, जन स्वास्थ्य अभियान, नेशनल कैंपेन फॉर दलित ह्यूमन राइट्स, दसम, वादा न तोड़ो अभियान, जन एकता जन अधिकार मंच, जय किसान अंदोलन, आरटीई फोरम, एडवा, एनएफआईडब्ल्यू, सतर्क नागरिक संगठन, युवा हल्ला बोल, घरेलू कामगार यूनियन, दिल्ली समर्थक समूह, नेशनल फिशवर्कर्स फोरम, एनटीयूआई, निरमाना, नाइन इज़ माइन, अमन बिरादरी, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट, नेशनल नेटवर्क ऑफ़ सेक्स वर्कर्स, क्रान्तिकारी नौजवान सभा, नोट इन म्य नेम कैंपेन, आल इंडिया नेटवर्क आफ सेक्स वर्कर्स, AISA, AIPWA, AICCTU, मज़दूर किसान शक्ति संगठन, सूचना एवं रोज़गार अधिकार अभियान राजस्थान, पिंजरा तोड़, विकलांग अधिकार महासंघ और दिल्ली में अलग-अलग जगह CAA/NRC के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों से प्रदर्शनकारी सहित विभिन्न जन संगठन मौजूद रहे।

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