एलआईसी में हिस्सा बेचने की सरकार की योजना का कर्मचारी संघों ने किया विरोध

एलआईसी के कर्मचारी संगठन देशभर में करेंगे प्रदर्शन

कोलकाता/नई दिल्ली: एलआईसी कर्मचारी संघों ने आईपीओ (इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग्स) के माध्यम से सरकारी बीमा निगम में केंद्र के एक हिस्से को बेचने की योजना का शनिवार को विरोध किया और कहा कि यह पहल देश हित के खिलाफ है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को सरकार के निवेश पहल के हिस्से के तौर पर सूचीबद्ध किया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा कि शेयर बाजार में सूचीबद्धता से कंपनियों में वित्तीय अनुशासन बढ़ता है. उन्होंने 2020-21 के लिए बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार का एलआईसी में आईपीओ के जरिये अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने का प्रस्ताव है. अभी एलआईसी की पूरी हिस्सेदारी सरकार के पास है.

कर्मचारी संघ के प्रवक्ता ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा, ‘एलआईसी में सरकार के एक हिस्से को बेचने की योजना का हम कड़ा विरोध करते हैं और यह पहल देश हित के खिलाफ है.’ एलआईसी की स्थापना 1956 में केंद्र सरकार ने की थी और देश में जीवन बीमा के क्षेत्र में इसकी सबसे ज्यादा बाजार भागीदारी है.

प्रवक्ता ने कहा कि अगर सरकार अपने इस फैसले पर आगे बढ़ती है तो एलआईसी के विभिन्न कर्मचारी संगठन देशभर में प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम में करोड़ों बीमाधारक प्रभावित होंगे. पुणे मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, ऑल इंडिया इंश्योरेंस इम्प्लॉइज एसोसिएशन (एआईआईईए) ने तीन और चार फरवरी की एक-एक घंटे की हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है.

संगठन के महासचिव श्रीकांत मिश्रा ने कहा, ‘हम इस कदम का विरोध करते हैं. तीन और चार फरवरी को हम पहले एक-एक घंटे की हड़ताल पर बैठेंगे. इसके बाद हम आगे की रणनीति तय करेंगे.’ श्रीकांत ने कहा कि इससे पहले सरकार एयर इंडिया की हिस्सेदारी बेचने में सफल नहीं हो सकी थी और अब उनसे एयर इंडिया के लिए यह कदम उठाया है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान वित्त वर्ष 2019 20 में 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश की तुलना में सरकार ने वित्त वर्ष 2020 21 में 2.1 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है.

केंद्र सरकार ने बीते 27 जनवरी को भारी कर्ज से लदी एयर इंडिया के 100 फीसदी शेयर बेचने की घोषणा की थी. उसी दिन जारी निविदा दस्तावेज के अनुसार, एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के तहत सरकार कंपनी की सस्ती विमानन सेवा ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’ में भी 100 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेगी.

इसके अलावा एयर इंडिया के सिंगापुर एयरलाइंस (सैट्स) के साथ संयुक्त उपक्रम ‘एयर इंडिया-सैट्स एयरपोर्ट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड’ (एआईसैट्स) की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी भी बेची जाएगी. एआईसैट्स हवाई अड्डों पर विमानों के खड़े होने और रखरखाव इत्यादि की सेवाएं देती है.

साल 2018 में सरकार ने एयर इंडिया की 76 प्रतिशत इक्विटी शेयर पूंजी को बंद करने के साथ-साथ निजी कंपनियों को प्रबंधन नियंत्रण स्थानांतरित करने का प्रस्ताव दिया था. हालांकि, इसकी किसी ने बोली नहीं लगाई थी. बीते जनवरी महीने में ही केंद्र सरकार ने नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) की रणनीतिक बिक्री को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी. सके तहत छह सार्वजनिक उपक्रमों को कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेचने की अनुमति दी गई है.

एनआईएनएल संयुक्त उद्यम कंपनी है, जिसमें चार केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों- खनिज एवं धातु व्यापार निगम लिमिटेड (एमएमटीसी), राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी), भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) और मेकॉन तथा ओडिशा सरकार की दो कंपनियों- ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) और इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इंवेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा लिमिटेड (आईपीआईसीओएल) की हिस्सेदारी है.

एनआईएनएल में एमएमटीसी की 49.78 प्रतिशत, ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन की 20.47 प्रतिशत, आईपीआईसीओएल की 12 प्रतिशत, एनएमडीसी 10.10 प्रतिशत तथा मेकॉन और भेल की 0.68-0.68 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. मालूम हो कि एयर इंडिया के अलावा पिछले साल केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत पेट्रोलियम निगम लिमिटेड (बीपीसीएल) सरकार की पूरी 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दी है. सरकार का कहना था कि रणनीतिक विनिवेश से जो राशि प्राप्त होगी, उसका उपयोग सामाजिक योजनाओं के वित्त पोषण में किया जाएगा जिससे लोगों को लाभ होगा.

मालूम हो कि बीपीसीएल के अलावा केंद्र सरकार की ओर से तीन सार्वजनिक उपक्रमों– कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर), नीपको तथा टीएचडीसी इंडिया में नियंत्रक हिस्सेदारी की बिक्री के संबंध में सलाहकारों को अनुबंधित करने के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं.

इसके अलावा सरकार ने भारतीय शिपिंग कॉरपोरेशन के 63.75 प्रतिशत हिस्से को बेचने की भी मंजूरी दे दी है. अनुमान के मुताबिक, सार्वजनिक क्षेत्र के इन पांचों उपक्रमों- बीपीसीएल, कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, नीपको, टीएचडीसी इंडिया और भारतीय शिपिंग कॉरपोरेशन के विनिवेश से सरकारी खजाने में अनुमानत: 60,000 करोड़ रुपये आएंगे.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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