सरकारी बैंकों के कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल आज से!

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल आज से शुरू। इससे सामान्य बैंकिंग कामकाज प्रभावित हो सकता है। वेतन संशोधन को लेकर प्रबंधन के साथ बातचीत में सहमति नहीं बनने के बाद बैंक यूनियनों ने हड़ताल का आह्वान किया है।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआईक) सहित विभिन्न बैंकों ने अपने ग्राहकों को सूचित कर दिया है कि हड़ताल से उनका सामान्य बैंकिंग परिचालन प्रभावित हो सकता है।

सरकारी बैंकों की हड़ताल ऐसे समय हो रही है जबकि शुक्रवार से संसद का बजट सत्र शुरू हो रहा है। शनिवार को वित्त वर्ष 2020-21 का बजट पेश किया जाना है।

यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने हड़ताल का आह्वान किया है। इसमें आल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन (एआईबीओसी), आल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए) और नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक वर्कर्स (एनओबीडब्ल्यू) सहित नौ बैंक यूनियनें शामिल हैं।

एआईबीओसी के अध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि इससे पहले मुख्य श्रमायुक्त के साथ बैठक बेनतीजा रही थी। बैंक कर्मचारियों की मांग है कि, “वेतन में 20 फीसदी की वृद्धि की जाए। पांच दिन का कार्यदिवस हो। बेसिक सैलरी में स्पेशल भत्ते जोड़ा जाए। पेंशन को अपडेट किया जाए। साथ ही परिवारिक पेंशन में सुधार हो।” इसके साथ ही कर्मचारियों ने यह भी मांग की है कि रिटायरमेंट पर मिलने वाले लाभ पर इनकम टैक्स न लगे। बैंक की शाखाओं में काम के घंटे और ब्रेक के समय को सही से निर्धारित किया जाए। अधिकारियों के काम के घंटे भी नियमित हों। कांट्रैक्ट औऱ बिजनेस कॉरेस्पॉन्डेंट को भी समान वेतन मिले।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मियों का वेतन संशोधन नवंबर, 2017 से लंबित है।यूनियन का दावा है कि सार्वजनिक बैंकों और निजी क्षेत्र के कुछ बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल में भाग ले रहे हैं।

एआईबीईए के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि भारतीय बैंक संघ (आईबीए) के साथ हमारी मांगों को लेकर आज हुई बैठक विफल रही है। ऐसे में हम शुक्रवार से दो दिन की हड़ताल पर जा रहे हैं।

यूएफबीयू ने एक परिपत्र में आरोप लगाया है कि आईबीए वेतन संशोधन की उनकी मांग पर सख्त रवैया अपना रहा है।

एनओबीडब्ल्यू के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा कि यूएफबीयू की 13 जनवरी को मुंबई में हुई बैठक में हम इस नतीजे पर पहुंचे थे कि हमें अपनी मांगों के समर्थन में अपने आंदोलन को तेज करना होगा।

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