पैन या आधार जमा नहीं करने पर वेतन से 20% टैक्स काटा जाएगा

आने वाले दिनों में उन लोगों के लिए समस्याएं बढ़ सकती हैं जो प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये कमा रहे हैं, लेकिन नियोक्ता को पैन या आधार का विवरण प्रदान नहीं किया है।

यह आयकर विभाग का फ़रमान है कि जिनकी आय प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये है और जिन्होंने पैन या आधार विवरण नहीं दिया है, उन सभी लोगों का 20% वेतन टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स(टीडीएस) के रूप में काटा जाए। वर्तमान समय में 2.5 लाख से लेकर 5 लाख सालाना आय पर 5% इनकम टैक्स का प्रावधान है। 2.5 लाख रुपए सालाना आय तक इनकम टैक्स से छूट दी गई है।

यह नियम केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) द्वारा तैयार किया गया था और 16 जनवरी को लागू हुआ था। यह नियम उन लोगों पर लागू होगा जो प्रति वर्ष 2.5 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं।

यह नियम इस तबके द्वारा अर्जित टीडीएस भुगतान और राजस्व पर कड़ी नजर रखने के उद्देश्य से है। वित्त वर्ष 2018-19 में, नौकरी पेशा हिस्से से मिलने वाला राजस्व, कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह का लगभग 37 प्रतिशत था।

सीबीडीटी ने अपने 86 पन्नों के सर्कुलर में कहा है कि कर्मचारियों को आयकर अधिनियम की धारा 206-एए के अनुसार अनिवार्य रूप से पैन या आधार का विवरण देना होगा।

सर्कुलर में लिखा गया है कि: “अधिनियम की धारा 206AA के अनुसार कर्मचारी को मिलने वाली कोई भी राशि या आय जिस पर टैक्स कटौती लागू होती है, के मामले में पैन या आधार नंबर प्रस्तुत करना अनिवार्य है”

सर्कुलर में कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी इन विवरणों को प्रदान करने में विफल रहता है, तो नियोक्ता, कर्मचारी के वेतन पर 20 प्रतिशत या उससे ज्यादा टैक्स कटौती कर सकता है।

जिसकी आय 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम है, उसका कोई टैक्स नहीं काटा जाएगा।
अन्य कटौती के बाद भी यदि आपका वेतन पर 20% टैक्स कटौती लागू होती है यानी आपका वेतन 2.5 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक है तो आप पर, 20% की टीडीएस दर लागू होगी।

यदि आपके वेतन पर 30% टैक्स लागू होता है, तो आपका नियोक्ता औसत कर दर, यानी कर्मचारी की कुल टैक्स देनदारी को कुल वार्षिक आय से विभाजित करेगा। यदि औसत कर की दर 20% निकलती है, तो टीडीएस 20% होगा।

हालांकि, टैक्स कटौती ज्यादा होने की स्थिति में कर्मचारियों को 4% की दर से शिक्षा और स्वास्थ्य उपकर का भुगतान करने से छूट दी जाएगी।
CBDT ने कहा कि पैन या आधार विवरण की कमी से उधार देने में समस्याएं आ रही हैं।

हालांकि, पैन और आधार को जोड़ना अनिवार्य कर दिया गया है, जिसकी समय सीमा 31 दिसंबर, 2019 थी जिसे बढ़ाकर 31 मार्च तक कर दिया गया है और यह आठवीं बार था कि समय सीमा बढ़ाई गई है।

आयकर अधिनियम की धारा 139 एए (2) में कहा गया है कि 1 जुलाई, 2017 से पैन और आधार रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को टैक्स अधिकारियों को अपना आधार नंबर बताना अनिवार्य होगा।

सरकार द्वारा लागू ये नीतियां अपने नागरिकों के आर्थिक -सामाजिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लागू की जा रही है आधार कार्ड की परियोजना पहले से ही सवालों के घेरे में है तथा बैंकों की दीवालिया स्थिति और आर्थिक मंदी से जूझती अर्थव्यवस्था में घाटे और मुनाफे का सारा बोझ अपने नागरिकों पर डालने के लिए इस तरह के तुगलकी फरमान जारी किए जा रहे हैं। इस नियम के लागू हो जाने से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों पर प्रभाव पड़ेगा साथ ही संगठित क्षेत्र में खासकर गारमेंट उद्योग में अप्रवासी मजदूरों के सामने इस नियम के लागू हो जाने से समस्याएं बढ़ जाएगी।

सरकार की प्रमुख चिंता है कि उसके पास कर्ज लेने देने के लिए राशि नहीं है और लगातार जीएसटी के जरिए होने वाले प्रत्यक्ष कर संग्रहण में भी कमी आ रही है। ऐसे में इस तरह के अनैतिक प्रावधानों के जरिए सरकार अपनी कमियों को छुपाने का प्रयास कर रही है।

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