आंदोलित आंगनबाड़ी वर्कर्स की सेवाएँ समाप्त करने का फरमान

उत्तराखंड सरकार का एक और दमनकारी क़दम, दो माह से सात सूत्रीय माँगों को लेकर दो माह से आंदोलित हैं आंगनबाड़ी कार्यकार्ता

देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने मानदेय बढ़ाने सहित अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर आंदोलनरत 15 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवाएं समाप्त करने का फरमान जारी किया है। टिहरी में दो हजार से अधिक को नोटिस दिया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य जनपदों में भी नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग की निदेशक झरना कमठान के मुताबिक यदि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम पर न लौटीं तो इनकी भी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।

इससे पूर्व समाधान की जगह राज्य की विभागीय मंत्री रेखा आर्य ने आंदोलनरत कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी थी, इससे आंगनबाड़ी वर्कर्स में आक्रोश बढ़ गया था।

दमनकारी क़दम के तहत देहरादून में आमरण अनशन पर बैठी दो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पुलिस प्रशासन ने जबरिया कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया। उसके बाद दो अन्य कार्यकर्ता आमरण अनशन पर बैठीं।

आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता, सेविका, मिनी कर्मचारी संगठन के बैनर तले विभिन्न मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करीब दो माह से हिंदी भवन के सामने धरने पर बैठी हैं। 10 जनवरी से दो कार्यकर्ताओं ने आमरण अनशन शुरू किया था। तब से शुक्रवार तक पुलिस 12 कार्यकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती करा चुका है।

परेड ग्राउंड में धरना 

उत्तराखंड में बाल विकास और महिला सशक्तिकरण विभाग के तहत करीब 20,000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं काम करती हैं। वे ‘समान कार्य, समान वेतन’ की माँग के साथ आंदोलनरत हैं जिसमे 18 हज़ार रुपये प्रतिमाह वेतन देने की माँग शामिल है।

ज्ञात हो कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बाल विकास विभाग के तहत अपने छह कामों को तो अंजाम देती ही हैं, साथ ही जनगणना, पल्स पोलियो, निर्वाचन और अन्य सरकारी अभियानों में उन्हें मनमर्जी तैनाती मिलती है। इसके बदले उन्हें अधिकतम साढ़े सात हजार मानदेय के नाम पर मिलता है। उन्हें नियून्तम वेतन भी नहीं मिलता है।

इन्ही स्थितियो में राज्य कर्मचारी का दर्जा देने, 18 हजार प्रति माह मानदेय देने सहित छह सूत्री माँग को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं 11 दिसंबर से कार्य बहिष्कार कर आंदोलनरत हैं।

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