बेंगलुरु में बांग्लादेशी के नाम पर जिनकी बस्ती उजाड़ी वह भारतीय हैं

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में पुलिस वालों ने जिन 100 से ज्यादा झुग्गियों को अवैध बांग्लादेशियों के नाम पर तोड़ दिया था उसमें सच्चाई यह है कि वहां रहने वाले सभी भारतीय है।

बेंगलुरु पुलिस ने 18-19 जनवरी को म्यूनिसिपल कार्पोरेशन के साथ मिलकर झुग्गी-बस्ती तोड दी थीं सोशल मीडिया पर खबरों के अनुसार और भाजपा विधायक ने ट्वीट कर आरोप लगाया था कि था कि यहां बांग्लादेशी अवैध रूप से रह रहे थे। अब बताया जा रहा है कि इन झुग्गियों में रहने वाले लोग भारतीय हैं।

पुलिस ने बेंगलुरु के करियामन्ना अग्रहारा में मौजूद इस झुग्गी-बस्ती में 100 घर थे जहां करीब 500 लोग रहते थे। इन झुग्गियों को तब गिराया गया जब भाजपा विधायक अरविंद लिंबावल्ली ने एक ट्वीट किया था। ट्वीट किए गए इस वीडियो में कहा गया था कि यहां पर अवैध भारतीय रह रहे हैं। लेकिन जब गहन जांच-पड़ताल हुई तो पता चला कि जिन लोगों के घरों को तोड़ा गया है वो सभी असम, त्रिपुरा और उत्तरी कर्नाटक के रहने वाले हैं। इतना ही नहीं इन सभी के पास आधार कार्ड, पैनकार्ड और चुनाव पहचान पत्र भी है। इन सभी के पास भारतीय नागरिकता के प्रमाण भी हैं और इनमें से कुछ के नाम आसाम की एनआरसी लिस्ट में भी है।

जिन लोगों के घर गिराए गए हैं उनमें से ज्यादातर लोग कहीं घरों में काम करते हैं, सुरक्षा गार्ड की नौकरी करते हैं, कचरा चुनने का काम करते हैं या आसपास दिहाड़ी करते हैं तो किसी की उसी बस्ती में छोटी सी दुकान पर सहारे आजीविका चल रही थी। लोग कहते रहे हम भारतीय हैं हमारे पास आधार कार्ड पैन कार्ड वोटर आईडी कार्ड सब कुछ मौजूद है फिर भी पुलिस वालों ने किसी की नहीं सुनी यहां तक कि घर का सामान भी निकालने नहीं दिया। शनिवार और रविवार को जिस वक्त झोपड़िया तोड़ी गई ज्यादातर लोग काम पर गए हुए थे और घर पर सिर्फ बच्चे थे। लोगों का कहना है कि पुलिस शादी ड्रेस में आई थी और सिर्फ 2 घंटे का टाइम देकर हमारे घर तोड़ दिया, हम 2 घंटे में अपना सामान कहां ले जाते हैं। अब पता चला है कि जिनके घर तोड़े गए हैं वह बिहार आसाम, बंगाल के रहने वाले थे।

अब पुलिस और बेंगलुरु म्युनिसिपल कॉरपोरेशन दोनों अपनी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। पुलिस का कहना है कि उन्हें अतिक्रमण हटाने अभियान के लिए मिली सफल कॉर्पोरेशन ले पत्र लिखकर सुरक्षा मांगी थी उनके पास लिखित आवेदन आया था। वही म्युनिसिपल कॉरपोरेशन का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। यह बेंगलुरु पुलिस ने किया है। हालांकि उन्हें शिकायतें मिली थी कि उस इलाके में अवैध तरीके से जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। सरकारी जमीन को खाली कराने के अभियान चलते रहते हैं।

हालांकि बेंगलुरु की जिस बस्ती को उजाड़ा गया है वह निजी जमीन है जिसके मालिक चेतन बाबू को 11 जनवरी को पुलिस ने एक वीडियो के हवाले से नोटिस जारी किया था कि यहां बांग्लादेशी रहते हैं उन्हें हटाओ नहीं तो हम यह जगह खाली कराएंगे। भाजपा विधायक अरविंद इस इलाके को 2018 में पहले भी अवैध घोषित करते हुए यहां के निवासी के बांग्लादेशी बताते रहे है।

दरअसल यह भाजपा सरकार द्वारा लोगों के मन में अप्रवासी मजदूरों के प्रति घोले गए जहर और उनकी फासीवादी नीतियों का परिणाम है। आपके पास पूरा प्रशासनिक अमला मौजूद है संसाधन मौजूद है और आप अपने नागरिकों की पहचान नहीं कर पाते हैं। वह बांग्ला बोलते हैं इसलिए वह बांग्लादेशी हो जाते हैं। आपका विधायक उनके खिलाफ ट्वीट करता है इसलिए पुलिस जाकर उनके घरों को तोड़ देती है। लोग कहते रहते हैं कि वह इसी देश के नागरिक है। मगर आपका देश प्रेम हिंदुत्व का राग अलापते हुए, आंख पर पट्टी बांधकर घरों पर बुलडोजर चला देता है। मौजूदा समय में सीएए-एनआरसी-एनपीआर को लेकर जिस तरीके से बवाल मचा हुआ है इस घटना से भाजपा सरकार की नियत साफ पता चलती है।

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