सुप्रीम कोर्ट ने सीएए पर रोक लगाने से मना किया

सुप्रीम कोर्ट ने कथित तौर पर फ़िलहाल के लिए सीएए मामले पर सुनवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीएए मामले पर एकतरफा कार्रवाई करने से इनकार करते हुए फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया।

सीएएए को लेकर 140 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई थी, जिस पर आज सुनवाई थी। सुनवाई तीन जजों की बेंच के समक्ष हुई जिसमें चीफ जस्टिस एस एस बोबडे भी शामिल है। सरकार की तरफ से अटार्नी जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ताओं की तरफ से वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी राजीव धवन इत्यादि मौजूद थे।

याचिकाकर्ताओं का कहना था की इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए और तब तक सरकार को इस प्रक्रिया को अविलंब रोक देना चाहिए। वकीलों ने कहा कि नागरिकता देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, उत्तर प्रदेश में 30000 लोगों को चुना गया है। याचिकाकर्ताओं ने सीएए की प्रक्रिया को 2 सप्ताह के लिए रोकने की मांग की, जिस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर स्टे चाहिए तो अलग से याचिका दायर की जाए।

चीफ जस्टिस ने कहा कि हम सरकार को प्रोविजनल नागरिकता देने के लिए कह सकते हैं ।मगर इस मामले पर एकतरफा रोक नहीं लगा सकते हैं।सुप्रीम कोर्ट इस मामले को पांच जजों वाली संविधान पीठ के समक्ष भेजने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट आसाम, बंगाल और त्रिपुरा के मामले को अलग से सुनवाई करेगी। अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता ने कहा कि असम और बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों का मामला है। जिसमें आधे हिंदू है और आधे मुसलमान। हम सभी को नागरिकता नहीं दे सकते हैं 40 लाख लोग हैं। जिनमें से आधे को ही नागरिकता मिल सकती है।

देखा जाए तो सुप्रीम कोर्ट इस मामले से बचने की कोशिश करती नजर आई। सुप्रीम कोर्ट चाहती तो अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए सीएए पर रोक लगा सकती थी। सुप्रीम कोर्ट ने का कि हम सारा समय इस मामले को नहीं दे सकते हैं हमारे समक्ष और भी अन्य महत्वपूर्ण मामले हैं। हमें सबरीमाला मामले पर भी सुनवाई करनी है।

फिलहाल देशभर में लोग नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ सड़कों पर है और महिलाएं इस आंदोलन को नेतृत्व प्रदान कर रही हैं। जिसे सुप्रीम कोर्ट या सरकार ज्यादा दिनों तक नजरअंदाज नहीं कर सकती। फिलहाल दिल्ली के शाहीन बाग की तरह पूरे देश भर में जगह जगह पर महिलाओं के नेतृत्व में लोगों ने सीएए के खिलाफ मोर्चा डाल दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में आज घटनाक्रम इस प्रकार रहा:

1) सुप्रीम कोर्ट ने सीएए या एनआरसी या एनपीआर पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया और कहा कि सरकार इन कानूनों को लागू करने के लिए स्वतंत्र है।

2) सुप्रीम कोर्ट, असम और त्रिपुरा से संबंधित सुनवाई याचिकाओं पर अलग से विचार करेगा, इससे पहले केंद्र दो सप्ताह के अंदर अपना जवाब पेश करना होगा।

3) केंद्र को चार सप्ताह के भीतर अन्य सभी सीएए से संबंधित याचिकाओं पर (असम और त्रिपुरा के बारे में छोड़कर) पर जवाब दाखिल करना होगा।

4) सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को अभी संविधान पीठ को नहीं भेजा है। हालांकि, ऐसा होने की प्रबल संभावनाएं है। अगली सुनवाई पर एक निर्णायक फैसला आ सकता है।

5) सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालयों को भी निर्देश दिए हैं कि वे सीएए को लेकर दायर याचिकाओं पर तब तक कोई फ़ैसला ना सुनाएं, जब तक कि शीर्ष अदालत इस मामले में फैसला नहीं दे देती।