बजाज मोटर्स के मज़दूर कंपनी गेट पर धरनारत

यूनियन बनाने से बढ़ा दमन, यूनियन नेताओं सहित 11 मज़दूर हैं बर्ख़ास्त

पंतनगर (उत्तराखंड)। टाटा की वेंडर कंपनी बजाज मोटर्स लिमिटेड में यूनियन बनाने से बढ़ते दमन, पदाधिकारियो, श्रमिकों के निलंबन, बर्खास्तगी के क्रम में प्रबंधन द्वारा प्रचार मंत्री सहित दो मज़दूरों की ग़ैरक़ानूनी रूप से सेवा समाप्ति से मज़दूर आंदोलित हो गए। बजाज मोटर्स कर्मकार यूनियन के नेतृत्व में 20 जनवरी से मज़दूर अपने परिवार सहित कंपनी गेट पर बेमियादी धरने पर बैठे हैं। कंपनी में कार्य करते हुए मज़दूर शिफ्ट के अनुसार धरने में शामिल हो रहे हैं। जबकि पुलिस का दबाव बढ़ रहा है।

यूनियन बनाना हुआ अभिशाप

मज़दूरों ने 11 नवम्बर, 2018 को यूनियन पंजीयन के लिए श्रम विभाग में फाइल लगाई। 17 दिसंबर 2018 को फाइल की श्रम प्रवर्तन अधिकारी रुद्रपुर द्वारा जाँच हुई। इसकी जानकारी मिलते ही प्रबंधन का दमन और यूनियन फाइल वापस लेने का दबाव बढ़ गया।

जाँच वाले दिन (17 दिसंबर 2018 को) यूनियन के अध्यक्ष चन्दन सिंह मेवाड़ी और उपाध्यक्ष कुंवर सिंह कंडारी को तथा 20 दिसंबर, 2018 को महामंत्री कृपाल सिंह को प्रबंधन द्वारा झूठे आरोप लगाकर निलंबित कर दिया गया। बाद में कथित आरोप पत्र दे दिया गया। इसी बीच यूनियन के तीन अन्य पदाधिकारियो को कंपनी के रिसेप्सन मे बैठा कर 2 माह तक यूनियन की फाइल श्रम विभाग से वापस लाने के लिए दबाब बनाया गया और फाइल वापस न लाने पर नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।

29 अप्रैल को संयुक्त मंत्री हेम चंद्र दुर्गापाल को तथा 24 अगस्त को कोषाध्यक्ष विनोद जोशी को भी निलंबित कर दिया गया। पिछले 18 जनवरी को प्रचार मंत्री नंदकिशोर राम और यूनियन सदस्य विवेकानंद को भी बर्खास्त कर दिया। इस तरह से यूनियन के कुल 7 पदाधिकारियो मे से 6 पदाधिकारियो सहित कुल 11 श्रमिकों को अभी तक नौकरी से निकाला जा चुका है।

दमन के बीच संघर्ष से यूनियन हुई पंजीकृत

प्रबंधन की मिलीभगत से श्रम विभाग द्वारा यूनियन फ़ाइल को 6 मई 2019 को दाखिल दफ्तर कर दिया गया। इसके ख़िलाफ़ यूनियन ने उच्च न्यायालय, नैनीताल में अपील की। जहाँ से 12 सितम्बर को मज़दूरों के हक़ में फैसला आया और मज़दूरों की जीत हुई। इसके बाद प्रबंधन ने उच्च न्यायालय के डबल बेंच में चुनौती दी, जहाँ से भी 12 दिसंबर को मज़दूरो की जीत हुई और यूनियन पंजीकृत हुई। इससे प्रबंधन की बौखलाहट और बढ़ गई।

कारखाना प्रबंधन बार-बार यूनियन तोड़ने की कोशिश करता रहा, परन्तु यूनियन नही टूटी। इससे बौखलाए प्रबंधन ने कंपनी मे कार्यरत स्थाई श्रमिको को एक-एक कर के निकलना शुरू कर दिया। कंपनी में कार्यरत श्रमिकों का शोषण चरम सीमा पर है।

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मज़दूरों का माँग पत्र भी है विवादित

6 नवम्बर 2019 को श्रमिकों द्वारा प्रबंधन को माँग पत्र दिया गया, लेकिन प्रबंधन ने इसपर कोई वार्ता नहीं की। उलटे प्रबंधन दमन का रास्ता ही अपनाता रहा, जिससे मज़दूरों में रोष बढ़ता रहा। इसी बीच प्रबंधन द्वारा दो और श्रमिकों की बर्खास्तगी से मज़दूरों ने आन्दोलन की रह पकड़ी।

प्रबंधन के इस उत्पीडन एवं शोषण के खिलाफ समस्त श्रमिक 20 जनवरी से कंपनी के मुख्य गेट पर दिन-रात के धरने पर बैठे हैं। धरना शुरू होते ही श्रम अधिकारी भी सक्रिय हो गए। श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने कंपनी गेट आकर प्रबंधन व श्रमिकों से बात की और धरना ख़त्म करने की कोशिश की, लेकिन मज़दूर समाधान चाहते थे। अंततः सहायक श्रमायुक्त ने लिखित पत्र जारी कर 23 जनवरी को वार्ता की तिथि निर्धारित की है।

मज़दूरों की माँग

श्रमिकों की माँग है कि यूनियन बनाने के प्रतिशोधवश निकाले गये समस्त 11 श्रमिकों की कार्यबहाली की जाय तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण मे श्रमिकों के माँग पत्र पर वार्ता की जाय।

यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि कंपनी प्रवंधको द्वारा इस वार्ता में कोई हल नही निकाला गया तो समस्त श्रमिक अपने परिवार सहित इसी तरह दिन रात धरने पर बैठे रहंगे और संघर्ष को तेज करेंगे।

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