वरिष्ठ बैंकर के वी कामथ को मिल सकता है वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री का दर्जा

धीरूभाई अंबानी से उनके गहरे ताल्लुकात, दागदार है इतिहास

#आपल्याचं_पाहिजे… यह मराठी का वाक्य है जिसका अर्थ होता है ‘अपने वाला आदमी (मराठी) ही चाहिए…….…..खबर आई है कि मोदी जी वरिष्ठ बैंकर के वी कामथ को वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री बनाने जा रहे हैं और समय के साथ उनकी भूमिका बढ़ाई जा सकती है| उद्योग-व्यापार जगत में सब जानते हैं कि कुंदापुर वमन कामथ रिलायंस इंडस्ट्रीज के कितने करीबी रहे हैं दरअसल के वी कामथ की पहचान आईसीआईसीआई बैंक से जुड़ी हुई है कामथ ने 1971 में अपने करियर की शुरुआत आईसीआईसीआई फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन से की थी और इसी संस्था ने आईसीआईसीआई बैंक की स्थापना की और 2002 में बैंक और इस संस्था का विलय कर दिया गया था. केवी कामथ आईसीआईसीआई बैंक के गैर-कार्यकारी चेयरमैन रहे हैं.बाद में कामथ इंफोसिस लिमिटेड के भी चेयरमैन पद पर भी रहे.

धीरूभाई अंबानी से उनके गहरे ताल्लुकात रहे हैं कहा जाता है कि 1970 के दशक की शुरूआत में जब कपड़े का कारोबार फैलाने के लिए धीरू भाई अंबानी का ऋण अनुरोध ज्यादातर लोग ठुकरा रहे थे तब कामथ ही वह बैंकर थे जो उनकी मदद के लिए आगे आए।

बाद में एक समय ऐसा आया जब आईसीआईसीआई बैंक को रिलायंस की दुकान कहा जाने लगा…….. कहते हैं कि जब धीरूभाई की मृत्यु के आघात से उनकी पत्नी कोकिलाबेन उबर भी नहीं पायी थीं कि दोनों भाई आपस में लड़ पड़े…….धीरूभाई अंबानी की विरासत का बंटवारा करने के लिए कोकिलाबेन ने जिन दो लोगों को चुना था उसमें एक थे मुरली देवड़ा ओर दूसरे थे के वी कामथ ….. के वी कामथ ने तब यह सुझाया था कि आरआईएल और आईपीसीएल का विलय करके एक कंपनी बनायी जाए और फिर उसे दो हिस्सों में करके दोनों भाइयों मुकेश अंबानी ओर अनिल अंबानी में बराबर बांट दिया जाए. इस सुझाव पर मुकेश अंबानी को आपत्ति थी लिहाज़ा, आरआईएल और आईपीसीएल मुकेश के हिस्से में आयीं. रिलायंस इन्फोकॉम (कम्युनिकेशन), रिलायंस कैपिटल और रिलायंस एनर्जी की कमान अनिल के हाथों में गयी.

यह बिल्कुल साफ था 2005 में हुए बहुप्रचारित बंटवारे के पहले कामथ ने दोनों भाइयों के बीच मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है

ICICI ग्रुप कभी CEO बनाने की फैक्ट्री था। ICICI में काम करने वाले कई कर्मचारी आज देश में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं…………कामथ ने ही देश की दो सबसे बड़ी महिला बैंकर्स चंदा कोचर और शिखा शर्मा को ग्रूम किया था इन दोनों ने ICICI ग्रुप में केवी कामथ की मेंटरशिप में लंबे समय तक काम किया है। शिखा शर्मा पर भी एक्सिस बैंक के सीईओ रहते भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे है ओर चन्दा कोचर की तो वीडियोकॉन के लोन के मामले में संपत्ति तक जब्त कर ली गयी है

ऐसी गुणी महिला के बारे में ही के वी कामथ ने एक बार कहा था ‘मैने जितने लोगों को सिखाया उसमें चंदा मेरी फेवरेट है।’ जब कामथ 2009 में रिटायर हुए तो चंदा कोचर को ही उनका उत्तराधिकारी बनाया गया,

बहुत कम लोगो को मालूम है कि बैंक की जिस समिति ने वीडियोकॉन का लोन मंजूर किया था उसके अध्यक्ष के वी कामथ ही थे…….जब वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत से आईसीआईसीआई की चन्दा कोचर के बारे में एक टीवी इंटरव्यू सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था ‘मैं लोन मंजूर करने वाली समिति के सभी 12 सदस्यों को जानते हूं। बैंक के पूर्व चेयरमैन केवी कामथ (समिति के प्रमुख) के साथ तो मैं अक्सर लंच करता रहा हूं…….

जब 2018 में वीडियोकॉन को दिए गए लोन को लेकर सीबीआई ने शिकंजा कसना शुरू किया तो सीबीआइ इस मामले में पूछताछ के लिए बैंकिंग क्षेत्र के जाने-माने दिग्गज के वी कामत और अन्य लोगों से पूछताछ के लिए नामित किया……..… इससे अरुण जेटली को बड़ी तकलीफ हुई, उन्होंने अस्पताल से ही चिठ्ठी लिखी की जाँच गलत दिशा में भटक रही है नतीजा यह हुआ कि सुधांशु मिश्रा जो सीबीआई की बैंकिंग ऐंड सिक्योरिटीज फ्रॉड सेल के एसपी थे जिन्होंने आईसीआईसी-वीडियोकॉन मामले में चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर, वीएन धूत और अन्य के खिलाफ एफआईआर पर दस्तखत किये थे…….उनका तुरंत रांची ट्रांसफर कर दिया गया…….

ओर अब तो मोदी सरकार के वी कामथ जी को वित्त मंत्रालय में राज्यमंत्री का दर्जा देने जा रही है रिलायंस तो पहले से लाभ में है लगता है उसके और भी ‘अच्छे दिन’ आने वाले हैं।………..

गिरीश मालवीय की पोस्ट

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