लम्बे संघर्ष के बाद शिवम ऑटोटेक के मज़दूरों की जीत

यूनियन नेताओं व श्रमिकों के स्थानांतरण, निलंबन रद्द, पुराना समझौता भी होगा लागू

गुडगाँव। शिवम् ऑटोटेक बिनोला के श्रमिकों का बीती 17 जनवरी की रात समझौता हो गया। उप श्रमायुक्त की मध्यस्तता में सम्पन्न समझौते के तहत यूनियन प्रधान व महासचिव सहित समस्त श्रमिकों का स्थानांतरण और 3 पदाधिकारियो का निलंबन रद्द कर काम पर वापस लेने, पुराने वेतन समझौते को लागू करने सहित तमाम मुद्दों पर सहमति बनी। इस जीत के साथ कंपनी में काम सुचारू हो गया।

लम्बे समय से जारी था संघर्ष

पिछले एक साल से शिवम ऑटोटेक में औद्योगिक विवाद चल रहा था। प्रबंधन का असल मक़सद यूनियन को तोड़ना रहा।

मार्च-अप्रैल, 2019 से ही मज़दूरों का जबरदस्ती दूसरे प्लांटों में स्थानांतरण शुरू हुआ। जून 2019 में यूनियन की तरफ से माँगपत्र देने के बाद 5 यूनियन सदस्य निलंबित हुए थे। तब 43 मज़दूर स्थानांतरित या निलंबित हुए था। लगातार संघर्ष के बाद 14 सितम्बर 2019 को त्रिपक्षीय समझौता हुआ।

उक्त समझौते के तहत 43 मज़दूरों को काम पर वापस लेना और 2018-19 के 2 साल के लिए वेतन में 4300 रुपये महीना बढोतरी होना था। लेकिन प्रबंधन ने वेतन बढ़ोतरी भी नहीं किया, उल्टे यूनियन प्रधान और महासचिव सहित 15 मज़दूरों का गैरकानूनी तरीके से स्थानांतरण कर दिया।

मज़दूर फिर हुए आंदोलित

इस गैरकानूनी स्थानांतरण और त्रिपक्षीय समझौते के उल्लंघन के खिलाफ पिछले 12 दिसम्बर 2019 से शिवम ऑटोटेक के मज़दूर गुड़गांव मिनी सचिवालय के सामने अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे।

प्रबंधन की जारी हठधर्मिता के कारण यूनियन ने लगभग 26 दिनो तक मिनिसचिवालय, गुडगाँव पर धरने के बाद सात जनवरी को कम्पनी के अंदर व बाहर धरना शुरू हुआ। उसी दिन से ही नये डीएलसी ने लगातार समझौता वार्ताओं का सिलसिला जारी रखा।

लम्बी वार्ता के बाद बनी सहमति

कई दौर की वार्ताओं के बाद 17 जनवरी की प्रातः 10:30 बजे से उपश्रमायुक्त दिनेश कुमार की मध्यस्तता में शुरू हुई वार्ता में अंततः रात 10:30 बजे दोनो पक्षों में समझौता संपन्न हुआ।

इसके तहत यूनियन अध्यक्ष राकेश बैरवा व महासचिव मुकेश कुमार यादव सहित बिनौला प्लांट से स्थानांतरित सभी श्रमिकों का स्थानांतरण रद्द करके इसी प्लांट में कार्यबहाली तथा यूनियन के तीन पधाधिकारियो का निलबंन रद्द करके कार्यबहाली हुई।

प्रबंधन द्वारा लगभग 18 श्रमिकों की लम्बी गैरहजारी को लेकर की गई जाँच पर प्रबंधन नरम रूख रखेगा। प्रबंधन पिछले वेतन समझौता को भी लागू करेगा।

सहमति के तहत सभी श्रमिक पूरा उत्पादन देंगे। 11 दिनों की हड़ताल से उत्पादन में जो कमी आई है उसे श्रमिक अतिरिक्त कार्य द्वारा पूरा करेंगे। साथ ही 11 दिनों का वेतन भी अतिरिक्त कार्य के बदले सवेतन अवकाश में बदल दिया जाएगा। कंपनी में कार्यरत 800 अस्थाई मज़दूरों का भी वेतन नहीं कटेगा।

वार्ता में प्रबंधकों की तरफ़ से श्री अंशुमन शर्मा जीएम एचआर, सुनील कुमार, श्री वास्तव शर्मा प्लांट हेड तथा श्रमिक पक्ष से राकेश वेरवा प्रधान, मुकेश यादव महासचिव, श्री भगवान तथा काo अनिल पवार मौजूद थे।

यूनियन प्रधान राकेश बेरवा ने डीएलसी, एआईटीयूसी के काo अनिल पवार को धन्यवाद दिया।

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