भोजनमाताओं का देहरादून में प्रदर्शन

प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले भोजनमाताओं ने अपनी माँगें की बुलंद

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बीते 9 जनवरी को प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के बैनर तले उत्तराखंड के विभिन्न शहरों व ग्रामीण क्षेत्र से पहुंची भोजनमाताओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। परेड ग्राउंड से सचिवालय तक जुलूस निकालकर सभा की और मुख्यमंत्री को 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।

सभा में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की अध्यक्ष हंसी देवी ने कहा कि पूरे उत्तराखंड में 27000 भोजनमाताएं हैं, जो कि विभिन्न प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में खाना बनाने का कार्य करती है। वे लगभग 18-19 सालों से कार्य कर रही है। जिनसे खाना बनाने के अलावा साफ सफाई व क्यारी बाड़ी झाड़ी व घास कटाई आदि का कार्य भी करवाया जाता है। इनमें से कोई भी काम ना करने पर स्कूल से निकालने की धमकी दी जाती है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश भोजनमाताएं गरीब परिवारों से हैं, जिनपर अपने परिवारों की पूरी जिम्मेदारी होती है। कुछ भोजन माताएं विधवा व परित्यक्ता भी है, जिनको 2000 में गुजारा करना बहुत मुश्किल है।

दीपा उप्रेती ने कहा कि सरकार भोजनमाताओं की अनदेखी कर रही है। एक मजदूर की घोषित मज़दूरी भी नहीं दे रही है।

भोजनमाता कमलेश ने कहा कि कितनी बार जगह-जगह से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गए, किंतु कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हुई, इसलिए आज हम सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए राजधानी पहुंची है। पहाड़ की भोजनमाताएं तो पहले घने जंगलों से लकड़ी काट कर लाती हैं। जहां जंगली जानवरों का भय बना रहेता है। तब जाकर विद्यालयों में नौनिहालों का भोजन बनाती हैं। बेहद कठिन परिस्थितियों में काम करती है।

वक्ताओं ने कहा कि आज हम अपनी बात कहने आए हैं और चाहते हैं हमें ₹15 हजार मानदेय दिया जाए वह हमें स्थाई किया जाए। इस प्रकार का उत्पीड़न किया जाए, अन्यथा हम लोग उग्र प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगी।

प्रदर्शन में उत्तराखंड के विभिन्न शहरों हल्द्वानी, नैनीताल, चोरगलिया, रामगढ़, खाँसीयू, बेतालघाट, काशीपुर, पंतनगर, रुद्रपुर, हरिद्वार, रामनगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भोजनमताओं ने भागेदारी की।

प्रदर्शन के समर्थन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, परिवर्तन कामी छात्र संगठन तथा क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के कार्यकर्ता भी शामिल थे।

इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ज्ञापन देकर समस्याओं को उठाया।

इनकी प्रमुख मांगे हैं- भोजनमाताओं को न्यूनतम वेतन ₹15000 दिया जाए; सभी भोजनमाताओं की स्थाई नियुक्ति की जाए; स्कूलों में प्रत्येक 26वें विद्यार्थी पर दूसरी भोजन माता रखी जाए; ईएसआई, पेंशन, प्रसूति अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाए; स्कूलों में भोजनमाताओं का होने वाला उत्पीड़न बंद किया जाए; भोजनमाताओं को धुँए से मुक्त किया जाए; खाना बनाने का काम गैर सरकारी संगठन को सौंपना बंद किया जाए; वेतन, बोनस समय पर दिया जाए; बच्चे कम होने, पाल्य का स्कूलों में न पढ़ने की स्थिति में भी भोजनमाताओं को न हटाया जाए।

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