8 जनवरी को होगी देशव्यापी हड़ताल

मोदी सरकार की मज़दूर विरोधी नीतियो के ख़िलाफ़ हड़ताल को सतत संघर्ष में बदलना होगा!

पूँजीपतिपरस्त जन विरोधी, श्रम विरोधी नीतियो व ट्रेड यूनियनों की लंबित माँगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ 8 जनवरी को देशव्यापी आम हड़ताल होगी। हड़ताल का आह्वान केंद्रीय श्रम संगठनों ने किया है, जिसका समर्थन मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) सहित देशभर की तमाम यूनियनों ने किया है। इससे पहले आह्वानकर्ता केन्द्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों ने गुरुवार को श्रम मंत्री संतोष गंगवार से वार्ता की थी, लेकिन उनकी किसी भी माँग का समाधान नहीं हो सका।

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बेरोजगारी, न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा सहित 14 सूत्री माँग उठाए हैं। इनमे समान काम- समान वेतन, न्यूनतम वेतन 21000, न्यूनतम पेंशन 10000, श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी बदलाव वापस लेने, रक्षा, रेलवे, बीमा, क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश संबंधित निर्णय को वापस लेने जैसी मुख्य मांगें हैं। हालाँकि कई संगठनो ने न्यूनतम मासिक वेतन 25 हजार रुपए, पेंशन 15 हजार और बेरोजगारी भत्ता 10 हजार रुपए करने की माँग उठाई है। इसके साथ ही जनता को साम्प्रदायिक रूप से बांटने और मेहनतकश जनता में भ्रम पैदा करने वाले सीएए, एनआरसी, एनपीआर का भी विरोध होगा।

ज्ञात हो कि मोदी सरकार लम्बे संघर्षों के दौरान हासिल 44 श्रम कानूनी अधिकारों को छीनकर मालिकों के हित में 4 संहिताओं में बांध दी है। काम के घंटे बढ़ाने, स्थाई रोजगार ख़त्म करके फिक्स्ड टर्म, नीम ट्रेनी जैसे प्रावधान करने, यूनियन अधिकारों में कटौती आदि के प्रावधानों द्वारा मालिकों को मनमर्जी रखने-निकालने व छंटनी-बंदी की खुली छूट दे दी है। साथ ही मोदी सरकार जनता के खून-पसीने से खड़े सरकारी-सार्वजानिक उद्योगों को बेचने, सरकारी कर्मचारियों की छंटनी की गति तेज करा दी है।

केन्द्रीय यूनियनों AITUC, HMS, CITU, AIUTUC, SEWA, AICCTU, LPF, UTUC आदि के मुताबिक सरकार द्वारा 2015 के बाद से त्रिपक्षीय इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस का आयोजन भी नहीं किया गया है।

इस हड़ताल में देशभर के बैंक, बीमा, एमआर, पेंशनर, आयकर, पोस्टल, बिजली, निकाय, सफाई आदि सरकारी कर्मचारियों के साथ आशा कर्मी, आंगनवाड़ी, भोजनामता व औद्द्योगिक मज़दूर भी शामिल होंगे।

आज मज़दूर वर्ग पर मोदी सरकार का हमला प्रचंड है, इसलिए एक-दो सालाना हड़तालों की जगह एकजुट सतत, जुझारू समझौताहीन संघर्ष को प्रचंड गति से आगे बढ़ाना होगा!

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