सामाजिक रुढियों के ख़िलाफ़ संघर्षरत रहीं सावित्रीबाई फुले

जन संघर्ष मंच, हरियाणा ने कुरुक्षेत्र में सावित्रीबाई फुले की याद में कार्यक्रम में किया

कुरुक्षेत्र, 3 जनवरी। जन संघर्ष मंच हरियाणा की ओर से भारत की प्रथम महिला शिक्षक, जातिवाद , अंधविश्वास व पितृसत्ता को चुनौती देने वाली योद्धा सावित्रीबाई फुले के 190वें जन्म दिवस पर स्थानीय रेलवे कॉलोनी पार्क व कीर्ति नगर कुरुक्षेत्र में सभाओं का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता मंच की जिला सचिव चंद्र रेखा ने की। सभा में महिलाओं व बच्चों ने हिस्सा लिया।

सभा को संबोधित करते हुए मंच की प्रांतीय महासचिव सुदेश कुमारी व उषा कुमारी ने सावित्री बाई फुले द्वारा महिलाओ, दलितों व वंचित वर्ग के लिए दिए गए उनके अमूल्य योगदान को विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नाए गांव में जन्मी सावित्रीबाई फुले ने अपने पति ज्योतिबा फूले व अपनी सहयोगी फातिमा बाई के साथ प्रथम महिला स्कूल पुणे में खोला था जिसमें हर जाति की छात्राएं थी।

उन्होंने कहा कि उस समय हिंदू धर्म समाजिक व्यवस्था और परंपरा में शूद्रों और महिलाओं को एक समान माना गया था और हिंदू धर्म ,धर्मशास्त्र यह भी कहते हैं की स्त्री तथा शूद्र पढ़ नहीं सकते और इस सोच के खिलाफ यानी हिंदू धर्म ,समाज व्यवस्था और परंपरा शुद्र और महिलाओं के लिए जन्म से निम्न स्थान को भारत में पहली बार संगठित रूप से चुनौती सावित्रीबाई फुले ने दी थी। वे आजीवन शूद्र और महिलाओं की मुक्ति के लिए संघर्ष करती रही ।

उन्होंने कहा कि आज हमारे देश में केंद्र की मोदी सरकार धर्म के आधार पर कानूनों में संशोधन कर रही है। अभी हाल ही में पास किया गया नागरिकता संशोधन कानून, 44 लेबर कानून खत्म करके 4कोड बना कर देश में सांप्रदायिक कट्टरता ,भेदभाव गरीबों मजदूरों, अल्पसंख्यकों के खिलाफ कानून पास किए जा रहे हैं।

मंच कीे नेता चंद्र रेखा ने कहा कि आज हमें सावित्रीबाई फूले से प्रेरणा लेते हुए सांप्रदायिकता , रूढ़िवाद धार्मिक कट्टरता के खिलाफ एकजुट होने की जरूरत है और हमें नागरिकता संशोधन कानून एनआरसी एनपीआर के खिलाफ व सरकार की निजी करण, व्यपारीकरण, पूंजीवादी नीतियों के खिलाफ आगे आना है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की मजदूर कर्मचारी छात्र महिला विरोधी नीतियों के खिलाफ 8 जनवरी को होने वाली राष्ट्रीय हड़ताल में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लें।

सभा को संतोष कुमारी, आशा देवी, कोमल अमन, पूजा, करमजोत, नेहा, वंदना ने भी संबोधित किया।

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