वोल्टास मज़दूरों ने निकाली प्रबंधन की शवयात्रा

गैरकानूनी गेट बंदी के 100 दिन पूरा होने पर वोल्टास के मज़दूरों ने जताया आक्रोश

पंतनगर (उत्तराखंड)। वोल्टास लिमिटेड सिडकुल पंतनगर में 9 मज़दूरों कि गैरकानूनी गेटबंदी के 100 दिन पूरा होने पर आक्रोशित मज़दूरों ने प्रबंधन के पुतले की शव यात्रा निकाली और कंपनी गेट से सिडकुल ढाल होते हुए कंपनी परिसर की परिक्रमा करके मुख्य गेट पर प्रबंधन के पुतले का दाह संस्कार किया। प्रबंधन के ख़िलाफ़ जोरदार नारों के साथ कार्यबहाली की माँग बुलंद की।

इस अवसर पर वोल्टास इम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि यूनियन के माँगपत्र पर 9 दिसंबर 2017 से कंपनी में औद्योगिक विवाद कायम है। इस पूरे दौर में प्रबंधन लगातार दमन का सहारा लेता रहा। मज़दूरों की एक के बाद एक पूर्वर्ती सुविधाएं और पैसों में कटौती करता गया। उन्होंने कहा कि यूनियन ने स्थायीकरण की माँग की थी तो प्रबन्धन ने पुराने ठेका मज़दूरों को बाहर कर दिया। एक यूनियन सदस्य विक्रम सिंह को फर्जी मामलों में आरोपित करके पहले निलंबित किया और अब बर्खास्तगी का पत्र भेज दिया।

उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि पिछले 25 सितंबर 2019 से प्रबंधन ने यूनियन अध्यक्ष, महामंत्री, संगठन मंत्री, पूर्व अध्यक्ष सहित 8 श्रमिकों की गैरकानूनी गेट बंदी कर दी थी। इन स्थितियों में मज़दूरों का गेट पर 100 दिनों से लगातार धरना चल रहा है।

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महामंत्री दिनेश चंद्र पंत ने बताया कि प्रबंधन द्वारा की गई गेटबंदी हर तरीके से गैरकानूनी साबित हो चुकी है, क्योंकि उसने ना तो इसकी कोई सूचना नोटिस बोर्ड पर लगाया, ना मज़दूरों को दी थी, ना तो यूनियन को दी और ना ही श्रम विभाग से कोई अनुमति ली। श्रम अधिकारियों ने भी काम पर वापस लेने का निर्देश दिया लेकिन उसका अनुपालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि 3 महीने से मज़दूरों के वेतन भी उसने काट लिए हैं इसलिए कुल 9 मज़दूरों की गैरकानूनी गेट बंदी के खिलाफ यह संघर्ष चल रहा है।

मुकेश विश्वकर्मा ने बताया कि इस पूरे मामले में श्रम विभाग और प्रबंधन की मिलीभगत साफ जाहिर है। वेतन न दिए जाने के संबंध में श्रम विभाग द्वारा वेतन वसूली का नोटिस भी जारी कर दिया गया है, लेकिन अभी तक मज़दूरों को वेतन नहीं मिला और मनमाने तरीके से उसने मज़दूरों के इस माह का भी वेतन काट लिया।

यूनियन ने कहा कि इसके खिलाफ हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा और यदि प्रबंधन की हठधर्मिता और श्रम विभाग की मौन सहमति जारी रही तो आंदोलन और व्यापक होगा।

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