महिला उत्पीड़न के खिलाफ हल्द्वानी में सभा

प्रगतिशील महिला एकता संगठन के बैनरतले उपभोक्तावादी संस्कृति, अश्लील फिल्मों, अश्लील वेबसाइट्स आदि पर रोक लगाने की माँग हुई मुखर

हल्द्वानी, 22 दिसंबर। प्रगतिशील महिला एकता संगठन ने महिला उत्पीड़न के खिलाफ आज रविवार को हल्द्वानी में बुध पार्क में एक सभा की। सभा के उपरांत नगर में एक जुलूस निकाला गया। जुलूस में पूंजीवाद पर हल्ला बोल, उपभोक्तावाद पर हल्ला बोल, अश्लील फिल्मों पर रोक लगाओ, अश्लील वेबसाइट्स पर रोक लगाओ, एनआरसी नहीं रोजगार चाहिए, नागरिकता कानून नहीं स्थाई रोजगार दो-आदि नारे लगाए गए। कार्यक्रम में विगत सालों में शहीद हुई जनवादी महिलाओं और पाशविकता का शिकार हुई महिलाओं की याद में दो मिनट का मौन रखा।

सभा को संबोधित करते हुए प्रमएके की नीता ने बताया कि महिलाओं के प्रति अपराधों का कारण किसी अपराधी व्यक्ति या उसके परिवार में ढूंढने की बजाय व्यापक समाज और इस उपभोक्तावादी पूंजीवादी राज्य व्यवस्था में देखे जाने की जरूरत है। जब तक इस पूंजीवादी व्यवस्था को पलट कर समाजवाद नहीं स्थापित जाएगा तब तक इस समस्या का निदान असंभव है।

प्रमएके की अध्यक्ष शीला शर्मा ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली भाजपा सरकार के गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद, कुलदीप सेंगर आदि का चरित्र ही भाजपा के आडंबर की पोल खोल देता है। इसके अलावा आसाराम बापू ,राम रहीम जैसों से भाजपा के नेताओं की निकटता दिखा देती है कि इनका चरित्र कैसा है। कठुआ में मंदिर में कई दिन तक नशा देकर एक आठ वर्ष की मासूम से सामूहिक दुराचार के बाद हत्या कर दी गई और भाजपा के मंत्रियों ने तिरंगा लहराते हुए उसका समर्थन किया। यह है इनका राष्ट्रवाद।

उन्होंने कहा कि वस्तुतः हमारे सौ से ऊपर सांसदों, विधायकों के ऊपर रेप के मामले दर्ज हैं। स्वयं हमारे मुख्य न्यायाधीश पर आरोप लगाने वाली महिला को खुद अपनी, अपने पति और देवर की नौकरी से ही हाथ धोना बैठा पड़ा। भारत आज रेप में दुनिया का सिरमौर है।

सभा में भोजन माता संगठन से बड़ी संख्या में पहाड़ की महिलाओं की भागीदारी रही। बेहद पिछड़े इलाकों से आने वाली और मुश्किल से साक्षर पिछड़ी चेतना वाली महिलाओं ने भी इस आयोजन में बड़ी संख्या में भाग लिया।

सभा में बिंदु गुप्ता ,ऋचा , प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की हेमा तिवारी, दीपा ,भगवती, कमलेश आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन रजनी जोशी ने किया।

सभा के अंत में उपभोक्तावादी पूंजीवादी संस्कृति के कई सिर वाले पुतले का दहन किया गया।

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