बिजली बिल में बढ़ोतरी का विरोध कर रहे एक्टिविस्टों को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया

आंदोलनरत ग्रामीणों ने संघर्ष तेज करने की घोषणा की

बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति हनुमानगढ़ राजस्थान के चार नेतृत्व कारी साथियों शैलेंद्र, मोहन, राजकुमार और केदार को आज पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। बढ़ी हुई बिजली बिल के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व कर रहे बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति के आह्वान पर हनुमानगढ़ जिले के ग्रामीणों ने सरकार को बढ़े हुए बिजली बिल का भुगतान करने से इंकार कर दिया है यह आंदोलन काफी व्यापक हो चुका है।

बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि नेठराना ग्राम के इंदिरा चौक पर पर बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति के साथियों ने हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी में पुलिस थाना अधिकारी गोगामेड़ी को गांव में गिरफ्तारी दी है और बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति के सदस्यों एवं क्षेत्र की जनता ने बिजली विभाग द्वारा दर्ज करवाएं गये झूठे मुकदमे की निंदा करते हुए पुलिस से निष्पक्ष जांच करने का आग्रह किया है। बिजली विभाग ने आंदोलन को कुचलने के लिए झूठा मुकदमा दर्ज कराया है और आंदोलन को कुचलने के सरकार ने पुलिस को दबाव देकर आंदोलन करने वाले साथी मोहन कस्वां, शलैन्द्र नेठराना,केदार बुडानिया राजकुमार बुडानिया को गिरफ्तारी देने के लिए मजबूर किया गया है। लेकिन बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति एवं क्षेत्र की जनता आंदोलन को कुचलने नहीं देगी और बिजली विभाग के खिलाफ भादरा में उन्नीस दिसंबर को उपखण्ड अधिकारी भादरा के कार्यालय के सामने बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति राजस्थान एवं क्षेत्र की जनता एवं सभी सामाजिक संगठन द्वारा मिलकर विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा।

राजस्थान राज्य विद्युत बोर्ड द्वारा सितंबर से मनमाने सुरक्षा शुल्क लगाने और बढ़े हुए अनियमित बिजली बिलों में वृद्धि और प्रति यूनिट लागत में वृद्धि के खिलाफ हनुमानगढ़ जिले के ग्रामीणों द्वारा संघर्ष किया जा रहा है।

हाल ही में बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति ने भादरा एसडीएम कार्यालय के सामने धरना और क्रमिक भूख हड़ताल के जरिए इस आंदोलन की शुरुआत की थी लगभग 2 महीने तक चली भूख हड़ताल के दौरान इस आंदोलन के जरिए सैकड़ों गांव के ग्रामीण बढ़ी हुई और अनियमित बिजली बिल के खिलाफ संगठित हुए। बिजली उपभोक्ता संघर्ष समिति की तरफ से सरकार द्वारा संशोधित टैरिफ योजना के खिलाफ सरकार को 1500 से ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराई गई।

अडानी, जिंदल और टाटा जैसे बड़े पूंजीपतियों से महंगे दामों पर बिजली खरीद कर राजस्थान स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड पूंजीपतियों कि सेवा में जुटी हुई है और इन सब में राजस्थान सरकार और पुलिस तंत्र का पूरा सहयोग है। राजस्थान इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड आम जनता से पैसा लूट कर पूंजीपतियों को सौंपने का माध्यम बन चुका है। राजस्थान बिजली बोर्ड ने बिजली शुल्क में सुरक्षा राशि सहित 20 से 25% तक की वृद्धि की है जिससे ग्रामीण इलाकों के छोटे किसानों और आम जनता की जेब पर भारी मार पड़ी है।

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