नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ रोष प्रदर्शन

जन संघर्ष मंच हरियाणा के नेतृत्व में विरोधस्वरूप कानून की प्रतियां जलाई गईं

कुरुक्षेत्र (हरियाणा) 13 दिसंबर। आज जन संघर्ष मंच हरियाणा के नेतृत्व में मोदी सरकार द्वारा पारित किये गए धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाले, धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर हमला करने वाले व देश में सांप्रदायिकता का जहर फैलाने वाले नागरिकता संशोधन कानून 2019 के खिलाफ शहर के बाजार से होते हुए स्थानीय अंबेडकर चौक पर रोष प्रदर्शन किया गया व विरोधस्वरूप कानून की प्रतियां जलाई गईं। वक्ताओं ने कहा कि देश भयावह संकट में फँसा है, ऐसे में सरकार और पूंजीवादी व्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार जनता में फूट डालने के लिए कुटिल चालें चल रही है।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जन संघर्ष मंच हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष कामरेड फूल सिंह ने कहा कि यह कानून पूरी तरह गैर संवैधानिक और समानता के अधिकार की धज्जियां उड़ाने वाला है। असल में चाहे कश्मीर की स्वायत्तता भंग करने का मामला हो या फिर एनआरसी या अब नागरिकता कानून में संशोधन यह सब भाजपा सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से हिंदुत्व फासीवादी एजेंडे को लागू करने के लिए किया जा रहा है। यह कानून जनता को धर्म के आधार पर बांटने वाला और संघीय ढांचे व धर्म निरपेक्षता पर हमला है। इस कानून के जरिए 3 देशों – बांग्लादेश, पाकिस्तान व अफगानिस्तान से वैध या अवैध रूप से आए हुए गैर मुस्लिम व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान स्पष्ट रूप से संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार का खुला उल्लंघन है। यदि अन्य देशों के प्रताड़ित लोगों को ही नागरिकता देने का सवाल है तो प्रताड़ना के शिकार तो तमिल शरणार्थी, म्यांमार के प्रताड़ित रोहिंग्या मुसलमान, पाकिस्तान में प्रताड़ित शिया व अहमदिया समुदाय के भी शरणार्थी हैं। ये भी क्यों मोदी सरकार को नजर नहीं आते? भाजपा यह सभी कदम चुनाव जीतने के लिए भी उठा रही है।

आज देश की अर्थव्यवस्था संकट में फंसी हुई है। बेरोजगारी चरम पर है। देश आर्थिक मंदी की चपेट में है। आर्थिक मंदी का सारा बोझ मजदूरों पर डाला जा रहा है। श्रम कानूनों को पूंजी के हित में बदला जा रहा है। महिलाओं के साथ तेजी से बढ़ते जघन्य अपराध – बलात्कार व हत्या के खिलाफ जनता में गुस्सा भड़क रहा है। शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ व सभी को मुफ्त शिक्षा की मांग को लेकर छात्र युवा आंदोलन कर रहे हैं, मजदूर कर्मचारी सड़कों पर हैं। ऐसी स्थिति में आंदोलनरत जनता के गुस्से से अपनी सरकार और पूंजीवादी व्यवस्था को बचाने के लिए मोदी सरकार जनता में फूट डालने के लिए यह सब कुटिल चालें चल रही है। उन्होंने कहा कि आज तमाम मजदूरों-मेहनतकशों, छात्र युवाओं, दलितों-महिलाओं, बुद्धिजीवियों व जनवादी धर्मनिरपेक्ष ताकतों को एकजुट होकर मोदी सरकार की तानाशाही का मुंहतोड़ जवाब देने की जरूरत है।

मंच की प्रदेश महासचिव कामरेड सुदेश कुमारी ने कहा कि मोदी सरकार तमाम जनवादी मूल्यों को त्याग कर लाठी गोली के बल पर विरोध की प्रत्येक आवाज को तानाशाही पूर्ण तरीके से दबा रही है। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूर्वोत्तर भारत में जनता की आवाज को कश्मीर की भांति फौजी बूटों तले रौंदा जा रहा है। उन्होंने गुवाहाटी में मारे गए 2 प्रदर्शनकारियों की मौत तथा अनेकों व्यक्तियों के पुलिस व सुरक्षा बलों द्वारा की गई गोलाबारी में घायल होने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने मोदी सरकार द्वारा बनाए गए इस फूटपरस्त नागरिकता संशोधन कानून को तुरंत रद्द किए जाने की मांग की।

निर्माणकार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के प्रधान करनैल सिंह ने कहा कि आज गृहमंत्री अमित शाह सवाल उठा रहे हैं कि 1947 में देश को धर्म के आधार पर बांटा ही क्यों गया। इतिहास गवाह है कि देश का धर्म के आधार पर विभाजन किये जाने के विचार – द्वि-राष्ट्र सिद्धांत सबसे पहले आर एस एस के विचारक व हिंदू महासभा के सावरकर जैसे नेताओं के रहे हैं। मुस्लिम लीग की भांति इन संगठनों का कार्यक्रम आजादी आंदोलन के दौरान भी और आजादी के बाद भी मुस्लिम लीग के नेता जिन्ना की भांति देश में सांप्रदायिक आधार पर नफरत पैदा करके फूटपरस्त राजनीति को आगे बढ़ाने का रहा है। क्या संघ परिवार और भाजपा बता सकती है कि आजादी आंदोलन में अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में सिवाय जनता में फूट डालने के उनकी क्या भूमिका रही है।

मनरेगा मजदूर यूनियन के नेता रामपाल ने कहा कि भाजपा सरकार कुख्यात तानाशाह हिटलर के कदमों पर चल रही है जिस तरह जर्मनी में अल्पसंख्यक यहूदियों पर हिटलर ने जुल्म ढाए थे उसी तरह मोदी-शाह की यह तानाशाही सरकार मुस्लिम समुदाय का दमन कर रही है। मोदी सरकार की तानाशाही सहन नहीं की जाएगी।

आवाज मंच के नेता मोहित ने कहा कि देश के छात्र सभी को मुफ्त शिक्षा और शिक्षा का निजीकरण किए जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और यह सरकार जेएनयू में छात्रों की आवाज को लाठी के सहारे दबा रही है। यह जुल्म सहन नहीं किया जाएगा। आज छात्र-युवा या कोई संगठन यदि सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे तुरंत आतंकी करार दे दिया जाता है। उन्होंने कहा कि आवाज मंच सांप्रदायिक आधार पर नफरत व भेदभाव पैदा करने वाले इस कानून का कड़ा विरोध करता है।

मंच के जिला प्रधान संसार चंद्र, जिला सचिव चंद्र रेखा,राज्य सचिव सोमनाथ, कविता विद्रोही, मनरेगा मजदूर यूनियन के नेता नरेश कुमार व मेवाराम तथा एस एफ आई के नेता विनोद गिल ने भी अपने विचार रखे और नागरिकता संशोधन कानून का कड़ा विरोध किया।

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