50 मज़दूरों की मौत दुर्घटना नहीं, हत्या है!

अग्निकांड में मज़दूरों की दर्दनाक मौत की जवाबदेही के लिए मासा का श्रम मंत्रालय, दिल्ली में आक्रोश प्रदर्शन

दिल्ली, 10 दिसम्बर। अनाज मंडी में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार व एमसीडी प्रशासन की आपराधिक लापरवाही और अवैध फैक्टरी मालिकों के साथ गठजोड़ के चलते आग में 50 से ज्यादा मज़दूरों की भयावह मौत की जवाबदेही के लिए मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा श्रम मंत्रालय, दिल्ली में आक्रोश प्रदर्शन किया गया और दिल्ली सरकार के श्रम मंत्री को ज्ञापन देकर शीघ्र कार्रवाई की माँग बुलंद हुई।

प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि दिल्ली के एक रिहायशी इलाके में 8 दिसंबर की सुबह 4:00 बजे हुए भीषण अग्निकांड में 50 से अधिक मज़दूर मारे गए इनमें से ज्यादातर मज़दूर एकदम नौजवान है और बहुत से बाल मज़दूर भी है। इससे पूर्व 2018 के जनवरी माह में बवाना में भी इसी तरह के अग्निकांड में बड़ी संख्या में मज़दूर मारे गए थे।

बवाना, नरेला, सुल्तानपुरी, पीरागढ़ी इत्यादि जगहों पर ऐसे अग्निकांड बार-बार होते रहे हैं जहाँ कि मज़दूरों को भागने तक का मौका नहीं मिल पाता है, क्योंकि कंपनी में ताला बंद कर मज़दूरों से काम कराया जाता है।

मज़दूर प्रतिनिधियो ने कहा कि 8 दिसंबर का अग्निकांड भी ऐसे ही कारखाने में हुआ जहाँ कि मज़दूरों को अपनी जान बचाकर भागने का भी मौका नहीं मिला। दिल्ली के ऐसे ज्यादातर कारखानों में किसी श्रम कानून का पालन नहीं होता है। मज़दूरों से न्यूनतम वेतन से भी आधे पर काम लिया जाता है। सुरक्षा मानदंडों का कोई भी पालन नहीं होता है। जाहिर सी बात है कि श्रम विभाग के अधिकारियों एवं शासन सत्ता की मिलीभगत के बगैर यह सब संभव नहीं है।

मासा ने ज्ञापन देकर उठाई माँग

मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) की ओर से विभिन्न मज़दूर संगठनों द्वारा किए गए इस विरोध प्रदर्शन के साथ दिल्ली सरकार के श्रम मंत्री को दिए गए ज्ञापन के माध्यम से माँग की गई कि- कारखाना मालिक एवं श्रम विभाग के रिश्वतखोर अधिकारी इस अग्निकांड के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है अतः उसे सजा दी जाए; कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और श्रम कानूनों को सख्ती से लागू किया जाए; मृतक मज़दूरों के परिजनों को ₹50-50 लाख एवं घायलों को ₹20-20 लाख का मुआवजा तथा मुफ्त इलाज दिया जाए; मृतक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए; बाल मज़दूरी पर रोक लगाई जाए, प्रवासी मज़दूरों के पंजीकरण और सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बने; श्रम कानूनों में मज़दूर विरोधी बदलाव करना बंद किया जाए। 

आज के विरोध प्रदर्शन में टीयूसीआई, जन संघर्ष मंच हरियाणा, इंकलाबी मज़दूर केंद्र, मज़दूर सहयोग केंद्र, मज़दूर पत्रिका, आईएफटीयू सर्वहारा, मज़दूर समन्वय केंद्र, संग्रामी मज़दूर यूनियन, पछास, कलेक्टिव आदि संगठनों ने भागेदारी की।

  • मुनाफाखोरों द्वारा मज़दूरों की हत्यायों का विरोध करो!
  • कार्य स्थल में सुरक्षा सुनिश्चित करो और श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करो!
  • श्रम कानूनों के लापरवाही करने वाले फैक्टरी मालिक व प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त सजा दो!
  • फैक्टरी एक्ट में मज़दूर विरोधी बदलाव नही सहेंगे! बाल मजदूरी नही सहेंगे!
  • प्रवासी मज़दूरों के पंजीकरण व सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाओ!
  • मृतकों को 50 लाख व घायलों को 20 लाख मुआवजा व मुफ्त इलाज दो!
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